अपोन ए टाइम दियर वाझ ए यूक्रेन।
यूक्रेन के साथ एक समस्या थी।
उसमे आधे लोग खुद को रूसी मानते रूसी भाषा, रहन सहन खान पान, Culture, सभ्यता संस्कृति सब रूसी ही थी।
बाकी आधे यूक्रेनी थे।
मने यूक्रेन वाझ ए कन्फ्यूज्ड नेशन ऑफ कन्फ्यूज़्ड पीपुल।
मने ऊ सब यही decide नही कर पाए कि ऊ सब रूसी हैं या यूक्रेनी।
बहरहाल, ऐसे जनता एक फंतासी की दुनिया मे जीती है, Utopian World में... कल्पना लोक में.... एक राजकुमार घोड़े पे सवार हो के आएगा और राजकुमारी सिंड्रेला को छुड़ा के ले जाएगा।
सो 2015 में यूक्रेन में एक TV धारावाहिक शुरू हुआ।
उसका नाम था Servant Of The People ।
वो धारावाहिक 2015 से 2019 तक लगातार चला और यूक्रेन में अत्यधिक पॉपुलर हुआ।
मने लोगबाग उस सीरियल के दीवाने थे।
सीरियल में Volodymyr Zelensky नामक एक कॉमेडियन actor यूक्रेन के राष्ट्रपति का रोल करता था।
2019 में सीरियल की लोकप्रियता को भुनाने के लिये उसने उसी नाम - Servant of the People नाम की एक political पाल्टी बनाई और घोषणा कर दी कि वो राष्ट्रपति का चुनाव लड़ेगा। और उसने ये भी दावा किया कि वो बेहद ईमानदार है और देश से Corruption दूर कर देगा।
उसने बाकायदे चुनाव लड़ा और जनता ने उसे 73%से भी ज़्यादा मत दे के चुनाव जिता दिया।
इस तरह Volodymyr Zelensky यूक्रेन का राष्ट्रपति बन गया।
कालांतर में Feb 2022 में यूक्रेन बर्बादी के कगार पर खड़ा
#Bhagwant_Mann
#Comedian_actor
#Punjab
कभी कशमीर आईये .....!!!!!
गली -गली मे डाॅक्टर और डेंटल सर्जन बैठे है । हर मेडिकल स्टोर के अंदर बने केबिन मे एक डाॅक्टर साहब विराजमान मिलेंगें । MBBS ड्रिग्री धारी ......
कभी गुडगाँव मे "मेदांता द मेडिसिटी" हो आईये , बाकायदा हिजाबधारी लडकियां और दाढीयुक्त मोमिन डाॅक्टर मिलेंगें ।
कभी मूड हो तो थोडी पडताल कर लेना , सब के सब बांग्लादेश जाकर डाॅक्टरी पढे है , बचे खुचे वुहान (चीन) या फिर यूक्रेन ,जाॅर्जिया और रशियन फेडरेशन के देशो के मेडिकल काॅलेजो से ।
कशमीरियो मे तो एक परम्परा ही बन गई है , "हलाल डिग्री" लेने की , जो केवल बांग्लादेश मे मिलती है । ये हलाल डिग्री वाले डाॅक्टर इतने एक्सपर्ट डाॅक्टर है कि बगैर MCI का एग्जाम पास किये , प्रैक्टिस करते है , कशमीर है भाई , जहाँ इंडिया के नाम से ही चिढ हो , तो मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया गई तेल लेने , भारत सरकार तक चूँ ना करे ।
बेखौफ , बेलौस प्रेक्टिस करते है "बांग्लादेश" से हलाल डिग्री लेकर आये डाॅक्टर साहब । राज्य सरकार भी सबसे ज्यादा वरीयता बांग्लादेश से डिग्री लेकर लौटे दढियलो को ही देती है ।
और काबिलियत तो पूछिये ही मत , जम्मू परिक्षेत्र है ,तो दस्त की दवाई लेने 300 किलोमीटर दूर जम्मू भागिये , कशमीर रीजन है तो चलिये शेर ए कशमीर श्रीनगर ।
एक दाँत तक निकलवाना तो जम्मू जाईये , जबकि एक एक ड्रिस्ट्रिक्ट हाॅस्पिटल के पे रोल पर पचास पचास डाॅक्टर मौजूद है ।
यही हाल यूक्रेन ,जाॅर्जिया , रोमानिया , बुल्गारिया , रूस , के डिग्रीधारियो का है । कमाल तो ये है कि वहाँ मेडिकल की पढाई स्थानीय भाषा मे होती है , ना कि अंग्रेजी मे । सीधे M.D. की डिग्री मिलती है ,जो यहाँ एग्जाम पास करने के बाद MBBS के समकक्ष मानी जाती है , और इसे लेने मे मात्र 07 साल लगते है । पहला साल केवल लैंग्वेज सिखाई जाती है , क्योंकि मेडिसिन की पढाई का माध्यम केवल और केवल स्थानीय भाषा है ।
अरे मेडिकल तो छोडिये , फाईटर एयरक्राफ्ट / पनडुब्बी के क्रू , नेवल नेविगेशन , और एडमिरल गोर्शकोव (विक्रमादित्य) की ट्रेनिंग रूस मे पाने वाले सैनिको से पूछकर देखिये ,वही बता देंगें कि उनको ट्रैनिंग किस भाषा मे दी जाती है रूस , और रशियन फेडरेशन के देशो मे .....????
शायद वो वर्ष था , 1984 जब हमारे स्कवाड्रन लीडर राकेश शर्मा जी को पहले कास्मोनॅट बनने का गौरव प्राप्त हुआ था , जो USSR के बैकानूर (वर्तंमान मे कजाकिस्तान) से अंतरिक्ष मे गये थे रूसियो के साथ । कभी पता करिये कि उन्होने रूसी भाषा क्यों सीखी थी ??? ट्रेनिंग का माध्यम कौन सी भाषा थी ???
ड्रग कंपनी का षड्यंत्र में फंसा विश्व https://youtu.be/bbZyrHmMEnE
चलिये फिर से डाॅक्टरो की काबिलियत पर आते है । तो जनाब इन डाॅक्टर साहब ने डिग्री प्राप्त कर ली , MCI का छोटा सा दफ्तर है , सेक्टर -8 द्वारका दिल्ली मे मलेरिया इंस्टीट्यूट के बगल मे । मेडिकल काउंसिल का एग्जाम पास किया या नही किया कौन पूछने आता है इनसे ???? किसी भी बी-ग्रेड सिटी मे नर्सिंग होम खोलकर बैठ गये । कौन सा मरीज इलाज से पहले डाॅक्टर की ड्रिगी चैक कर रहा है ????
इलाके के थानेदार को क्या पडी है , कि वो डाॅक्टर से मगजमारी करता फिरे। हो गये डाॅगदर , चल पडी डाॅगदरी । दस दिन ICU का बिल बनाओ , और रेफर कर दो , घंटा किसी को फर्क नही पडता , ना डाॅगदर को , ना मरीज के तीमारदारो को । इंसानी जिंदगी बहुत सस्ती है ना अपने देश मे ।
जरा सोचिये , साल दर साल तीस हजार डाॅक्टर तो अकेले यूक्रेन से आ रहे है , उसके बाद जाॅर्जिया , दस बीस हजार बांग्लादेश से, उतने ही चीन , रोमानिया , बुल्गारिया , हंगरी , कजाकिस्तान , ताजिकिस्तान , मालदोवा , उजबेकिस्तान , नेपाल, मॉरीशस जैसे देशो से आ रहे है । फिर हम ये भी बोलते है कि डाॅक्टर कसांई है , ऐसे लूट लिया ,ऐसे काट लिया , ऐसे मेडिकल नेग्लीजेंसी के चलते मरीज मर गया ।
हरियाणा जैसे राज्यो मे तो जमींदारो मे मशहूर कहावते जन्म ले चुकी है ....
ये दो किल्ले ,रामप्यारी के ब्याह मे बेच देंगें , दो किल्ले बेच के रामकिशन को यूक्रेन/रूस से MBBS करवाणी है , अर फेर ये पाँच किल्ले बेच के इसका नर्सिंग होम बण ज्यागा ।
मै दस फैमिलीज को जानता हूँ , जो अपनी SUV लेकर , सपरिवार छोरी को मेडिकल ऐट्रेंस एग्जाम दिलवाने हरियाणा से बैंगलोर, चेन्नई , गुवाहाटी तक गये है । चल्लो छोरी पेपर दे लेगी , अर हम घूम यांगे ।
और बाद मे यही भारत जैसा देश मेडिकल प्रैक्टिस मे डाॅक्टरो से नेकनीयती , शुचिता , ईमानदारी , सच्चाई , की उम्मीद भी करता है ।
भाई ठगी , चालाकी , बेईमानी , जोड तोड , और मक्कारी से नाममात्र के डाक्टर बनने वाले वही सब तरीके तो अपनायेंगें ना ???
काबिल होते तो यही डाॅक्टर बन लेते , एग्जाम पास कर लेते । किसी लायक नही थे ,तभी तो जोड -तोड , पैसे , संपर्को , दौड धूप , और येन केण प्रकारेण डाॅक्टर बनने डोनेशन सीट पर बांग्लादेश , चीन , यूक्रेन, जाॅर्जिया , रोमानिया , कजाकिस्तान , ताजिकिस्तान से डाॅक्टर बनकर आये है ।
अब सोच लो भाई , क्योंकि जान है तुम्हारी , पैसा है तुम्हारा , बीमारी है तुम्हारी । और डाॅक्टर है यूक्रेन /बांग्लादेश का ....
यूक्रेन का संकट वे फंसे हुए mbbs डिग्री के आकांक्षी चिखते चिल्लाते भारतीय अपने ही हाथों अपने बिनाश कर अपने ही जाल में उलझ कर फडफ़ड़ा रहे हैं वैश्विक फार्मा ड्रग लॉबी और हथियार लॉबी यूक्रेन और रुस के राष्ट्रपति जो चतुर जासूस रह चुका है को अपने जाल में फंसा कर पूरी दुनिया में भय और तनाव से आक्रांत किए हुए है वही दिशाहीन भारत 70 सालों से इनकी बनाए हुए मेडिकल व्यवस्था MCI के चंगुल में फस कर पूरा देश इस मेडिकल लूट का शिकार बना हुआ है कोई आदिवासी बनवासी अपने मूल परंपरागत चिकित्सा से लोगों को ठीक कर रहा है तो उसे मारपीट कर बंद कर दिया जाता है उसको जुर्माना लगाया जाता है उसको आजीवन कारावास कर दिया जाता है वहीं यह फर्जी डिग्रियां पूरे दुनिया से भारत में बांटकर सबके जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है पर कोई व्यवस्था कोई सरकारी तंत्र इस पर कोई भी कारवाई करने में अक्षम हो रहा जो पिछले 70 साल से चल रहा है इसलिए अब एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान यूरोपियन देश #यूक्रेन में बड़ी बड़ी शानदार बिल्डिंगें है.. चमचमाती हुई सड़कें और लंबी लक्जरी कार गाडियां हैं सड़कों पर साइकिल तो क्या दोपहिया वाहन भी दिखाई नहीं देते क्योंकि सबके पास महंगी लक्जरी गाडियां जो है अच्छे मेडिकल कॉलेज भी है...
युनिवर्सिटी है तभी तो मेडिकल शिक्षा के लिए भारत के हजारों छात्र यूक्रेन में पढ़ाई कर रहें हैं यानि यूक्रेन में चारों तरफ संपन्नता है अगर नहीं है तो सामरिक शक्ति ,मजबूत सेना , अत्याधुनिक हथियार और वहां की जनता में राष्ट्रवादी भावना यही कारण है कि मात्र दो घंटे में रुस ने यूक्रेन को घुटनों पर लाकर खड़ा कर दिया यूक्रेन के
सेनिक भाग खड़े हुए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति आम लोगों से युद्ध लड़ने की अपील कर रहें हैं..
इसके लिए सारी पाबंदियां भी हटा दी गई है... यूक्रेन आम नागरिकों को युद्ध लड़ने के लिए हथियार देने की बात भी कह रहा है पर मजाल यूक्रेन का एक भी नागरिक युद्ध लड़ने को तैयार हुआ हो , क्योंकि यूक्रेन के नागरिकों में इजराइल के नागरिकों की तरह राष्ट्रवाद की भावना ही नहीं है।
वह तो एशो आराम की जिन्दगी जीने के आदी हो चुके हैं। यूक्रेन के स्कूल कालेज, युनिवर्सिटी, बाजार, दुकान,आफिस सब बन्द कर दिये गये हैं। सब कारोबार चौपट हो गया है। कारखाने फैक्ट्री सब बन्द हो गये
सब कारोबार चौपट हो गया है कारखाने फैक्ट्री बंद हो गई लोग रोजगार तो क्या अपनी जान बचाने के लिए सिमित संख्या में मौजूद बंकरों में छुप रहें हैं अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों में शरण ले रहें हैं। यानि सब कुछ होते हुए भी यूक्रेन आज जिंदगी की भीख मांग रहा है।
ये लेख भारत के उन लोगों को समर्पित है जो राष्ट्रवाद और राष्ट्रवादियों को गाहे बगाहे गालियां देते रहते हैं तथा सिर्फ महंगाई, बेरोजगारी और आलू प्याज टमाटर तथा मुफ्त की योजनाओं को ही देश के विकास का पैमाना मान बैठे हैं।