बुधवार, 25 दिसंबर 2013

बीमारियों में है रामबाण) लहसुन सिर्फ खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के लिए एक औषधी की तरह भी काम करता है।इसमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज, लवण और फॉस्फोरस, आयरन व विटामिन ए,बी व सी भी पाए जाते हैं। लहसुन शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है। भोजन में किसी भी तरह इसका सेवन करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है आज हम बताने जा रहे हैं आपको औषधिय गुण से भरपूर लहसुन के कुछ ऐसे ही नुस्खों के बारे में जो नीचे लिखी स्वास्थ्य समस्याओं में रामबाण है। 1-- 100 ग्राम सरसों के तेल में दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवाइन के दाने और आठ-दस लहसुन की कुली डालकर धीमी-धीमी आंच पर पकाएं। जब लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर छान लें और बोतल में भर दें। इस तेल को गुनगुना कर इसकी मालिश करने से हर प्रकार का बदन का दर्द दूर हो जाता है। 2-- लहसुन की एक कली छीलकर सुबह एक गिलास पानी से निगल लेने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है।साथ ही ब्लडप्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। 3-- लहसुन डायबिटीज के रोगियों के लिए भी फायदेमंद होता है। यह शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में कारगर साबित होता है। 4-- खांसी और टीबी में लहसुन बेहद फायदेमंद है। लहसुन के रस की कुछ बूंदे रुई पर डालकर सूंघने से सर्दी ठीक हो जाती है। 5-- लहसुन दमा के इलाज में कारगर साबित होता है। 30 मिली लीटर दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। 6-- लहसुन की दो कलियों को पीसकर उसमें और एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर क्रीम बना ले इसे सिर्फ मुहांसों पर लगाएं। मुहांसे साफ हो जाएंगे। 7-- लहसुन की दो कलियां पीसकर एक गिलास दूध में उबाल लें और ठं
डा करके सुबह शाम कुछ दिन पीएं दिल से संबंधित बीमारियों में आराम मिलता है। 8-- लहसुन के नियमित सेवन से पेट और भोजन की नली का कैंसर और स्तन कैंसर की सम्भावना कम हो जाती है। 9-- नियमित लहसुन खाने से ब्लडप्रेशर नियमित रहता है। एसीडिटी और गैस्टिक ट्रबल में भी इसका प्रयोग फायदेमंद होता है। दिल की बीमारियों के साथ यह तनाव को भी नियंत्रित करती है। 10-- लहसुन की 5 कलियों को थोड़ा पानी डालकर पीस लें और उसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह -शाम सेवन करें। इस उपाय को करने से सफेद बाल काले हो जाएंगे। 11- यदि रोज नियमित रूप से लहसुन की पाँच कलियाँ खाई जाएँ तो हृदय संबंधी रोग होने की संभावना में कमी आती है। इसको पीसकर त्वचा पर लेप करने से विषैले कीड़ों के काटने या डंक मारने से होने वाली जलन कम हो जाती है। 12- जुकाम और सर्दी में तो यह रामबाण की तरह काम करता है। पाँच साल तक के बच्चों में होने वाले प्रॉयमरी कॉम्प्लेक्स में यह बहुत फायदा करता है। लहसुन को दूध में उबालकर पिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लहसुन की कलियों को आग में भून कर खिलाने से बच्चों की साँस चलने की तकलीफ पर काफी काबू पाया जा सकता है। 13- लहसुन गठिया और अन्य जोड़ों के रोग में भी लहसुन का सेवन बहुत ही लाभदायक है। लहसुन की बदबू- अगर आपको लहसुन की गंध पसंद नहीं है कारण मुंह से बदबू आती है। मगर लहसुन खाना भी जरूरी है तो रोजमर्रा के लिये आप लहसुन को छीलकर या पीसकर दही में मिलाकर खाये तो आपके मुंह से बदबू नहीं आयेगी। लहसुन खाने के बाद इसकी बदबू से बचना है तो जरा सा गुड़ और सूखा धनिया मिलाकर मुंह में डालकर चूसें कुछ देर तक, बदबू बिल्कुल निकल जायेगी।
कच्चे प्याज के कुछ स्वास्थ्य लाभ
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एनीमिया ठीक करे-
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प्याज काटते वक्त आंखों से आंसू टपकते हैं,
ऐसा प्याज में मौजूद सल्फर की वजह से होता है
जो नाक के दृारा शरीर में प्रेवश करता है। इस
सल्फर में एक तेल मौजूद होता है
जो कि एनीमिया को ठीक करने में सहायक
होता है। खाना पकाते वक्त यही सल्फर जल
जाता है, तो ऐसे में कच्चा प्याज खाइये।

कब्ज दूर करे-
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इसमें मौजूद रेशा पेट के अंदर के चिपके हुए भोजन
को निकालता है जिससे पेट साफ हो जाता है,
तो यदि आपको कब्ज की शिकायत है
तो कच्चा प्याज खाना शुरु कर दीजिये।

गले की खराश मिटाए-
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यदि आप सर्दी, कफ या खराश से पीडित हैं
तो आप ताजे प्याज का रस पीजिये। इमसें गुड
या फिर शहद मिलाया जा सकता है।

ब्लीडिंग समस्या दूर करे-
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नाक से खून बह रहा हो तो कच्चा प्याज काट
कर सूघ लीजिये। इसके अलावा यदि पाइल्स
की समस्या हो तो सफेद प्याज खाना शुरु कर दें।

मधुमेह करे कंट्रोल-
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यदि प्याज को कच्चा खाया जाए तो यह शरीर
में इंसुलिन उत्पन्न करेगा, तो यदि आप
डायबिटिक हैं तो इसे सलाद में खाना शुरु कर दें।

दिल की सुरक्षा-
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कच्चा प्याज हाई ब्लड प्रेशर को नार्मल करता है
और बंद खून की धमनियों को खोलता है जिससे
दिल की कोई बीमारी नहीं होती।

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करे-
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इसमें मिथाइल सल्फाइड और अमीनो एसिड
होता है जो कि खराब कोलेस्ट्रॉल को घटा कर
अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाता है।

कैंसर सेल की ग्रोथ रोके-
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प्याज में सल्फर तत्व अधिक होते हैं। सल्फर शरीर
को पेट, कोलोन, ब्रेस्ट, फेफडे और प्रोस्टेट कैंसर से
बचाता है। साथ ही यह मूत्र पथ संक्रमण
की समस्या को भी खत्म करता है।

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

हम राजीव भाई समर्थको के लिए यह विडियो ही बहुत है केजरीवाल को समर्थन करने का मित्रो मैं आपको उस विडियो का लिंक दे रहा हूँ जो 14-Nov-2010 का है जब राजीव भाई जीवित थे और इसके 15 दिन बाद उनका देहांत हुआ था दिल्ली के जंतर मंतर पर रामदेव जी, अन्ना हजारे और केजरीवाल साथ साथ मंच पर थे पर राजीव भाई नहीं थे, क्यों ? क्योंकि राजीव भाई ने स्वामीजी को छत्तीसगढ़ का प्रवास छोड़ कर केजरीवाल के साथ मंच साँझा करने से मना कर दिया था? क्योंकि उन्हें पता था की आज जो रूप केजरीवाल का है उसको वो पहले से जानते थे अगर राजीव भाई जीवित होते तो केजरीवाल केजरीवाल नहीं होता इसलिए राजीव समर्थक इस भ्रम को दिमाग से निकल दें की राजीव भाई होते तो केजरीवाल उनके साथ होताhttp://www.youtube.com/watch?v=A9oJMewaoMM राजीव भाई ने NGO की व्याख्या कितनी बढ़िया तरीके से की है उनका कहना है जो NGO सरकारी या विदेशी पैसे लेकर काम करते हैं उनपर कभी भरोसा नहीं करना, इसको लेकर कार्यकर्ता भी भ्रमित हो जाते हैं उनको लगता है बहुत बढ़िया देशभक्ति का काम कर रहे हैं ये NGO और फिर उनके एजेंट बन जाते हैं | *अगर कोई NGO विदेशी पैसे लेकर काम करेगा तो वो सिर्फ वोही मुद्दे उठाएगा जो विदेशी हित में हो, ये लोग कभी भी ऐसे मुद्दे नहीं उठाएंगे जिनसे एक आम नागरिक या ग्रामीण किसान स्वावलंबी बन सके, ये लोग ऐसे काम या प्रोजेक्ट ही करेंगे जिनसे आम नागरिक या किसान परावलम्बी बने या आश्रित बने|* हाँ कुछ NGO पर एक बार भरोसा तो कर सकते हैं जो NGO खुद के लोगों के पैसे से अपने काम करते हैं जैसे सहकारी संस्थाएं और उद्योग लगाना | (इसको समझने का एक साधारण उदाहरण - जैसे भिखारी को भीख देने से समस्या कभी हल नहीं हो सकती समस्या का हल उसकी मासिक नियमित आर्थिक आवश्यकता का हल करना है, कोई रोजगार या अन्य काम जिससे आमदनी का स्रोत बना रहे| अब ये विदेशी पैसे पर चलने वाले NGO कभी भी इनके रोजगार के बारे में ना सोचकर, बेमतलब की कोई रैली, दौड़ या कैंडल मार्च (गरीबी हटाने के लिए) का आयोजन करेंगे जिसपर लाखों खर्च किये जायेंगे जिससे की मीडिया में इनकी खबर छपे|) जैसा की अभी धरा 377 को लेकर NGO आन्दोलन कर रहे हैं, पहली बात तो ये हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और ये सारे NGO विदेशी हैं जो अपनी विकृत संस्कृति को हमपर थोपना चाह रहे हैं | शिक्षा, खान-पान, पहनावा, रहन-सहन सबपर विदेशी प्रभाव डाल देने के बाद अब ये ही बाकी रह गया था| देश बचाने से पहले ये तो पता होना चाहिए की देश कैसे बर्बाद किया जा रहा है !
हम राजीव भाई समर्थको के लिए यह विडियो ही बहुत है केजरीवाल को समर्थन करने का मित्रो मैं आपको उस विडियो का लिंक दे रहा हूँ जो 14-Nov-2010 का है जब राजीव भाई जीवित थे और इसके 15 दिन बाद उनका देहांत हुआ था दिल्ली के जंतर मंतर पर रामदेव जी, अन्ना हजारे और केजरीवाल साथ साथ मंच पर थे पर राजीव भाई नहीं थे, क्यों ? क्योंकि राजीव भाई ने स्वामीजी को छत्तीसगढ़ का प्रवास छोड़ कर केजरीवाल के साथ मंच साँझा करने से मना कर दिया था? क्योंकि उन्हें पता था की आज जो रूप केजरीवाल का है उसको वो पहले से जानते थे अगर राजीव भाई जीवित होते तो केजरीवाल केजरीवाल नहीं होता इसलिए राजीव समर्थक इस भ्रम को दिमाग से निकल दें की राजीव भाई होते तो केजरीवाल उनके साथ होताhttp://www.youtube.com/watch?v=A9oJMewaoMM राजीव भाई ने NGO की व्याख्या कितनी बढ़िया तरीके से की है उनका कहना है जो NGO सरकारी या विदेशी पैसे लेकर काम करते हैं उनपर कभी भरोसा नहीं करना, इसको लेकर कार्यकर्ता भी भ्रमित हो जाते हैं उनको लगता है बहुत बढ़िया देशभक्ति का काम कर रहे हैं ये NGO और फिर उनके एजेंट बन जाते हैं | *अगर कोई NGO विदेशी पैसे लेकर काम करेगा तो वो सिर्फ वोही मुद्दे उठाएगा जो विदेशी हित में हो, ये लोग कभी भी ऐसे मुद्दे नहीं उठाएंगे जिनसे एक आम नागरिक या
ग्रामीण किसान स्वावलंबी बन सके, ये लोग ऐसे काम या प्रोजेक्ट ही करेंगे जिनसे आम नागरिक या किसान परावलम्बी बने या आश्रित बने|* हाँ कुछ NGO पर एक बार भरोसा तो कर सकते हैं जो NGO खुद के लोगों के पैसे से अपने काम करते हैं जैसे सहकारी संस्थाएं और उद्योग लगाना | (इसको समझने का एक साधारण उदाहरण - जैसे भिखारी को भीख देने से समस्या कभी हल नहीं हो सकती समस्या का हल उसकी मासिक नियमित आर्थिक आवश्यकता का हल करना है, कोई रोजगार या अन्य काम जिससे आमदनी का स्रोत बना रहे| अब ये विदेशी पैसे पर चलने वाले NGO कभी भी इनके रोजगार के बारे में ना सोचकर, बेमतलब की कोई रैली, दौड़ या कैंडल मार्च (गरीबी हटाने के लिए) का आयोजन करेंगे जिसपर लाखों खर्च किये जायेंगे जिससे की मीडिया में इनकी खबर छपे|) जैसा की अभी धरा 377 को लेकर NGO आन्दोलन कर रहे हैं, पहली बात तो ये हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और ये सारे NGO विदेशी हैं जो अपनी विकृत संस्कृति को हमपर थोपना चाह रहे हैं | शिक्षा, खान-पान, पहनावा, रहन-सहन सबपर विदेशी प्रभाव डाल देने के बाद अब ये ही बाकी रह गया था| देश बचाने से पहले ये तो पता होना चाहिए की देश कैसे बर्बाद किया जा रहा है !
पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो यहाँ Click करें : http://www.youtube.com/watch?v=0fo5tDYfMi8

हिंदुस्तान की न्याय व्यवस्था में काम करने वाले जो एडवोकेट्स मित्र है उनसे माफ़ी मांगते हुए आप सबसे ये पूछता हूँ के क्या आप जानते है यह काला कोट पेहेनके अदालत में क्यों जाते है ? क्या काले को छोड़ के दूसरा रंग नही है भारत में ? सफ़ेद नही है नीला नही है पिला नही है हरा नही है ?? और कोई रंग ही नही है कला ही कोट पहनना है । वो भी उस देश की न्यायपालिका में जहाँ तापमान 45 डिग्री हो। तो 45 तापमान जिस देशमे रहता हो उहाँ के वोकिल काला कोट पेहेनके बहेस करे, तो बहस के समय जो पसीना आता है वो और गर्मी के कारन जो पसीना आता है वो, तरबतर होते जाये और उनके कोट पर पसीने से सफ़ेद सफ़ेद दाग पड़ जाये पीछे कोलार पर और कोट को उतारते ही इतनी बदबू आये की कोई तिन मीटर दूर खिसक जाये लेकिन फिर भी कोट का रंग नही बदलेंगे। क्योंकि ये अंग्रेजो का दिया हुआ है।

आपको मलिम है अंग्रेजो की अदालत में काला कोट पहनके न्यायपालिका के लोग बैठा करते थे। और उनके यहाँ स्वाभाविक है क्योंकि उनके यहाँ नुन्यतम -40 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होता है जो भयंकर ठण्ड है । तो इतनी ठण्ड वाली देश में काला कोट ही पेहेनना पड़ेगा कियोंकि वो गर्मी देता है। ऊष्मा का अच्छा अवशोषक है। अन्दर की गर्मी को बाहर नही निकलने देता और बाहर से गर्मी को खिंच के अन्दर डालता है । इसीलिए ठण्ड वाले देश के लोग काला कोट पेहेनके अदालत में बहस करे तो समझ में आता है पर हिंदुस्तान के गरम देश के लोग काला कोट पेहेनके बहस करे !!!!!! 1947 के पहले होता था समझमे आता है पर 1947 के बाद भी चल रहा है ??? हमारी बार काउन्सिल कोइत्नि समझ नही है क्या? के इस छोटी सी बात को ठीक कर ले बदल ले । सुप्रीम कोर्ट की बार काउन्सिल है हाई कोर्ट की बार काउन्सिल है डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की बार काउन्सिल है सभी बार काउन्सिल मिलके एक मिनट में फैसला कर सकते है की काल से हम ये काला कोर्ट नही पहनेंगे।

वो तो भला हो हिंदुस्तान में कुछ लोगों का हमारे देश पहले अंग्रेज न्यायाधीश हुआ करते थे तो सर पे टोपा पेहेनके बैठते थे, उसमे नकली बाल होते थे। आज़ादी के बाद 40 -५० साल तक टोपा लगा कर यहाँ बहुतसारे जज बैठते रहे है इस देश की अदालत में। अभी यहाँ क्या विचित्रता है के काला कोट पेहेन लिया ऊपर से काला पंट पेहेन लिया, बो लगा लिया सब एकदम टाइट कर दिया हवा अन्दर बिलकुल न जाये फिर मांग करते है के सभी कोट में एयर कंडीशनर होना चाहिए!! ये कोट उतर के फेंक दो न एयर कंडीशन की जरुरत क्या है ? और उसके ऊपर एक गाउन और लाद लेते है वो निचे तक लहंगा फैलता हुआ। ऐसी विचित्रताए इस देश में आज़ादी के ६० साल बाद भी दिखाई दे रहा है।

अंग्रेजो की गुलामी की एक भी निशानी को आज़ादी के 65 साल में हमने मिटाया नही, सबको संभाल के रखा है।

आज मै आप बीती साझा कर रहा हूँ मै जो सफदरजंग से प्रतिमाह 3000 हजार की दवा लाता था 2010 के बाद एक गोली भी नहीं खाई है हमारे यहाँ स्किन के विशेषज्ञ है डॉ महाजन उन्होंने मुझे बराबर दवा खाने के लिए बोला था आज मिलते है तो कहते है यार तुम तो खुद स्किन के विशेषज्ञ हो गए हो मुझे liken plenas और क्रिटिकल alopicia था ldl vldl triglisiride सब गड़बड़ था प्रतिमाह लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट करना पड़ता था और ऐसी खतरनाक दवा ली जिसने पुरे पाचनतंत्र और हार्मॊन को अवैवस्थित कर दिया था बस भगवान् की ऐसी कृपा हो गई की सफदरजंग के dermotology dpt के एक डॉक्टर ने राजीव भाई की स्वास्थ कथा की cd दी और बोले बेटा इसे सुन लेना बस उस दिन मैंने cd ली और घर आकर पूरी रात सोया नहीं रात भर cd सुनता रहा और वो सुबह मेरे जीवन की सबसे सुनहरी सुबह थी मै एक pvt ltd co में था मैंने इतनी दवा खाई थी की मुझे ESI से 37523 रूपये वापस मिले थे मुझे दवा के काले कारोबार में शामिल MR और doctar के सम्बन्ध का भी ज्ञान हुवा । मुझे स्किन की समस्या थी जिसमे बायोप्सी भी हुइ थी जब राजीव भाई से जाना की इस बिमारी का मूल कारण पेट है पहले इसे ठीक करना होगा मैंने अष्टांग हृदयं के नियम का पालन किया और गौमूत्र का प्रतिदिन सेवन किया आज पूर्णतया स्वस्थ हूँ कभी सर्दी जुखाम भी नहीं होता बस राजीव भाई द्वारा बताये गए नियमो का कट्टरता से पालन करता हूँ । बस दुःख इसी बात का है की भारत की उस महान विभूति से कभी मिल नहीं पाया ।और सबसे बड़ा कष्ट ये होता है जब लॊग हजारो लाखो लोगो को हार्टअटैक ब्लडप्रेसर से निजात दिलाने वाले राजीव भाई की मृत्यु का कारण लोग हार्टअटैक बताते है ।ये एक ऐसा सवाल है जो आने वाली पीढ़ी हमसे जरूर पूछेंगी तब शायद ही कोइ इमानदारी से जवाब दे पाए ।अमर शहीद भाई राजीव दीक्षित देशभक्त थे मै गर्व से कहता हूँ मै माँ भारती
के उस लाल का भक्त हूँ । जो उन्हने बोला उसको जीवन में सर्वप्रथम धारण भी किया ।

सोमवार, 23 दिसंबर 2013

मुलेठी----------
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पहचान-
मुलेठी का वैज्ञानिक नाम ग्‍लीसीर्रहीजा ग्लाब्र (Glycyrrhiza glabra ) कहते है। संस्‍कृत में मधुयष्‍टी:, बंगला में जष्टिमधु, मलयालम में इरत्तिमधुरम, तथा तमिल में अतिमधुरम कहते है। एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसमें गुलाबी और जामुनी रंग के फूल होते है। इसके फल लम्‍बे चपटे तथा कांटे होते है। इसकी पत्तियॉं सयुक्‍त होती है। मूल
जड़ों से छोटी-छोटी जडे निकलती है। इसकी खेती पूरे भारतवर्ष में होती है।
अनेक रोगों की दवा मुलेठी

मुलेठी के प्रयोग से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर और छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी लाभ होता है। मुलेठी एक वनौषधि है जिसका एक से छह फुट का पौधा होता है। इसका काण्ड और मूल मधुर होने से इसे यष्टिमधु भी कहा जाता है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। ताजी जड़ मधुर होती है। यह सूखने पर कुछ तिक्त एवं अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण बना रहता है। इसका औषधि के रूप में अति प्राचीन काल से ही उपयोग किया जाता रहा है। सुश्रुत, अष्टांगह्वदय, चरक संहिता जैसे ग्रन्थों में इसके प्रयोग द्वारा चेतना लाने (मूच्र्छा दूर करने), उदर रोग, श्वास रोग, स्तन रोग, योनिगत रोगों को दूर करने की अनेक विधियां दी गई हैं। ईरानी चिकित्सक तो आज भी çस्त्रयों की सेक्स संबंधी बीमारियों में इसका प्रयोग कर रहे हैं। ताजा मुलेठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है। ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है।

पेट के घाव
वैज्ञानिकों ने अनेक प्रयोगों द्वारा इस बात को सिद्ध कर दिया है कि मुलेठी की जड़ का चूर्ण पेट के घावों पर लाभकारी प्रभाव डालता है और घाव जल्दी भरने लगता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम दिनकर का कहना है कि मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित रूप से सेवन करके स्त्रियाँ अपने स्तन, योनि, सेक्स की भावना, सुन्दरता आदि को लंबे समय तक बनाए रख सकती हैं । डॉ. डी.आर. लॉरेन्स की क्लीनिकल फार्मोकॉलॉजी के अनुसार मुलेठी में ग्लाइकोसाइड के अतिरिक्त ट्राइटर्पी नामक अम्ल भी होता है, जिसे कार्बेनोक्लोजीन के नाम से एलोपैथी में प्रयोग किया जाता है। यह पदार्थ आमाशय में श्लेष्मा की मात्रा बढ़ा देता है। यह प्रभाव अन्य अम्ल निरोधक एण्टासिड्स से कहीं अधिक होता है।

अल्सर मिटाए
मुलेठी न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन् छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह से प्रभावशाली है। इण्डियन मेडिकल गजट के अनुसार ड्यूओडनल अल्सर के रोगियों पर जब मुलेठी का चूर्ण दिया जाता है, तो यह चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी इतनी तेज गति से भरता है, जितना अन्य औषधि नहीं भर पाते।

आंतों की टीबी
डॉ. बी.डी. अग्रवाल के अनुसार आज लोग आंतों की टीबी के शिकार होते जा रहे हैं। आंतों की टीबी में लगातार उल्टियां होती हैं, तीव्र पेट दर्द की शिकायत रहती है, पखाने के रास्ते खून बहता रहता है, ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। इस स्थिति में मुलेठी का प्रयोग लाभदायक देखा गया है। आमाशय के रोगों में मुलेठी चूर्ण, क्वाथ या स्वरस रूप में पांच मिलीलीटर से दस मिली. तक दिन में तीन बार तक दिया जाता है। तृष्णा एवं उदरशूल में भी यह शीघ्र लाभ देता है। आमाशयिक व्रणों में विशेष लाभकारी होता है। अम्लाधिक्य एवं अम्लपित्त को भी शांत
रखता है।

खून की उल्टी
खून की उल्टियां होने पर दूध के साथ मुलेठी का चूर्ण एक से चार माशे की मात्रा में अथवा मधु के साथ देने पर लाभ होता है। हिचकी होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से लाभ होता है।

भारत के ऋषि मुनियो ने लाखो - लाखो वर्ष एक -एक वृक्ष और पौधे पर गहन अनुसंधान किया और फिर उस पर धार्मिक और वैज्ञानिकता की मौहर लगा कर आम भारतीयो और पृथ्वी वासियो को उसके गुणो का लाभ दिलाया ऐसे ही पवित्र और वैज्ञानिक गुणो वाला एक
वृक्ष है "आवला "
आवले के वृक्ष मे दैवीय शक्तियों का वास होता है

रोगो से लड़ने की अनुपम शक्ति के कारण ही इस वृक्ष को अमर फल का नाम भी प्रदान किया गया

चिक्तिसा परामर्श हेतु हमसे संपर्क करने वालो में सर्वाधिक संख्या उन रोगियों की होती है जो उदर रोगों से पीड़ित होते है - जैसे अपच,भूख न लगना, गैस, एसिडिटी और सबसे मुख्य रोग कब्ज़ |
अनियमित दिनचर्या और अनुचित आहार-विहार के अलावा मानसिक तनाव, नाना प्रकार के कारणवश होने वाली चिंता का सीधा प्रभाव नींद और पाचन संस्थान पर पड़ता है और व्यक्ति अनिद्रा तथा अपच का शिकार हो जाता है और इस स्थिति का निश्चित परिणाम होता है कब्ज़ होना | कब्ज़ कई व्याधियों की जड़ होती है जिसमे बवासीर, वात प्रकोप, एसिडिटी, गैस और जोड़ों का दर्द आदि व्याधियां कब्ज़ के ही देन होती है |

तो आज मैं चर्चा करने जा रहे है जिसमे सारे रोगों को दूर करने की शक्ति है,जो की ठंढी प्रकृति का है तथा इसकी विशेषता यह है की सूखने पर भी इसके गुण नष्ट नहीं होते | इसे आप हरा या सुखा किसी भी रूप में खाकर इसके सामान गुण का लाभ उठा सकते है | जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ आयुर्वेद में मशहूर बनौषधि जिसका नाम है " आँवला"

संस्कृत में आँवले को अमरफल, आदिफल, आमलकी , धात्री फल आदि नामों से पहचाना जाता है | लेतीं नाम :- एम्ब्लिका ओफिसिनेलिस( Emblica officinalis )

आँवला सर्दी की ऋतू में ताजा मिलता है | नवम्बर से मार्च तक अवाला ताजा मिलता रहता है | जनवरी-फ़रवरी में आवला अपने पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है |

जो आंवला आकर में बड़ा होता हो, गुदे में रेशा नहीं हो, बेदाग और हलकी-सी लाली लिए हुए हो, वह आँवला सबसे उत्तम होता है | वैसे सर्दियों में ही इसका मुरब्बा, अचार, जैम आदि बनाए |


आँवले में विटामिन- सी ( "C") पाया जाता है | एक आँवले में विटामिन- सी की मात्रा चार नारंगी और आठ टमाटर या चार केले के बराबर मिलता है | इसलिए यह शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति में महत्वपूर्ण है | विटामिन-सी की गोलियों की अपेक्षा आँवले का विटामिन-सी सरलता से पच जाता है |

आँवले में पाए जाने वाले कार्बोहायड्रेटस में मुख्य है रेशेदार 'पेक्टिन' | यह रक्तवाहिनियों के विकारों को नष्ट करने में सक्षम है | यह फल मधुरता और शीतलता के कारण पित को शान्त करता है |यह फल पितनाश्क होने के कारण पित-प्रधान रोगों की प्रधान औषधि है |


आँवले में ५८ मि .ग्रा. कैलोरी, ०.५ मि .ग्रा. प्रोटीन, ५० मि .ग्रा. कैल्सियम, १.२ मि .ग्रा. लोहा, ९ मि .ग्रा. विटामिन , ०.०३ मि .ग्रा. थायोमिन, ०.०१ मि .ग्रा. रिबोफ्लोविन, ०.२ मि .ग्रा. नियासिन, ६०० मि .ग्रा. विटामिन-सी |

आँवले के गुद्दे में जल ८१.२ प्रतिशत, कार्बोहाईड्रेट १४.१ प्रतिश, खनिज लवण ०.7 प्रतिशत, रेशा ३.४ प्रतिशत, वसा ०.१ प्रतिशत और फास्फोरस ०.०२ प्रतिशत होता है | आँवले में कई विटामिन होते है , जिनमे प्रमुख है - विटामिन -सी, यानि स्कार्बिक एसिड | आँवले में गेलिक एसिड, टैनिन और आल्ब्युमिन भी मौजूद होते है |


कब्ज़ में आँवला रात को एक चम्मच पिसा हुआ पानी या दूध के साथ लेने से सुबह शौच साफ़ आता है , कब्ज़ नहीं रहती | इससे आंते और पेट हलकी और साफ़ रहता है |

आंतरिक शक्ति बढ़ने वाली औषधियों का प्रधान घटक आँवला ही है | आँवले में एक रसायन होता है, जिसका नाम सकसीनिक अम्ल है | सकसीनिक अम्ल बुढ़ापे को रोकता है और इसमें पुनः यौवन प्रदान करने की शक्ति भी होती है | इसमें विद्यमान विभिन्न रसायन बीमार और जीर्ण कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में अपना अच्छा योगदान देते है |


आँवले के नियमित सेवन से नेत्रज्योति और स्मरणशक्ति बढती है | यह गर्भवती महिला के लिए हितकर है | इससे ह्रदय की बेचैनी, धड़कन, मेदा, रक्तचाप,दाद आदि में लाभदायक है |

मधुमेह के रोगीओं के लिए :- सूखे आँवले और जामुन की गुठली समान मात्रा में पिस ले | इसकी दो चम्मच नित्य प्रातः भूखे पेट पानी के साथ फंकी लें | मधुमेह में निश्चित तौर पर फायद होगा | मधुमेह रोगीओं के लिए आँवले का ताजा रस लाभप्रद होता है | इसके सेवन से रक्त में शक्कर बनाना कम हो जाता है | आँवला पाउडर १ चम्मच दो बार पानी या दूध के साथ लेने से मधुमेह में लाभ होता है |

वैसे तो आंवले शरीर के सम्बंधित अधिकांश रोगों से लड़ने में कारगर है , परन्तु मैं यहाँ कुछ रोग जो वर्तमान में ज्यादा लोग ग्रसित है उसके बारे में बताते है :-

उच्च रक्तचाप :- आँवले में सोडियम को कम करने की क्षमता होती है | इसलिए रक्तचाप के रोगी के लिए आँवले का उपयोग लाभदायक है | यह रक्त बढाने और साफ़ करने में सहायक है तथा इससे शरीर को आवश्यक रेशा मिलता है |

ह्रदय एवं मस्तिस्क की निर्बलता :- आधा भोजन करने के पश्चात् हरे आंवलों का रस ३५ ग्राम पानी में मिलकर पी लें, फिर आधा भ्जोजन करें | इस पारकर २१ दिन सेवन करने से ह्रदय एवं मस्तिस्क की दुर्बलता दूर होकर स्वास्थ्य सुधर जाता है | स्मरण-शक्ति बढती है |

कोलेस्ट्रोल , ह्रदय रोग से बचाव :- एक चम्मच आँवले की फंकी नित्य लेने से ह्रदय रोग होने से बचाव होता है | कच्चे हरे आँवले का रस चौथाई कप, अध कप पानी, स्वादानुसार मिश्री मिलकर पीते रहने से कोलेस्ट्रोल कम होकर सामान्य हो जाता है , जिससे ह्रदय रोग से बचाव होता है |

सुन्दर संतान :- नित्य एक आँवले का मुरब्बा गर्भावस्था में सेवन करते रहने से मान स्वस्थ्य रहती हुई सुन्दर, गौरवर्ण संतान को जन्म देगी |

नेत्र-ज्योतिवर्धक :- एक कांच का गिलास पानी से भरकर नित्य रात को उसमे एक चम्मच पिसा हुआ आँवला दल दें | प्रातः बिना हिलाए आधा पानी छानकर उससे नेत्रों को धोये तथा बचा हुआ आधा पानी आँवले सहित पियें | इस तरह लगातार चार महीने सेवन करने से नेत्र ज्योति बढ़ जाएगी 

हरा धनिया मसाले के रूप में व भोजन को सजाने या सुंदरता बढ़ाने के साथ ही चटनी के रूप में भी खाया जाता है। हमारे बड़े-बुजूर्ग इसके औषधिय गुणों को जानते थे इसीलिए प्राचीन समय से ही धनिए का उपयोग भारतीय भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया
जाता रहा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं हरे धनिए के कुछ ऐसे ही औषधिय गुणों के बारे में...
- इसके एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है इसीलिए अगर चेह
रे पर मुंहासे हो तो धनिए की हरी पत्तियों को पीसकर उसमें चुटकीभर हल्दी पाउडर मिलाकर लगाने से लाभ होता है। यह त्वचा की विभिन्न समस्याओं जैसे एक्जीमा, सुखापन और एलर्जी से राहत दिलवाता है।
- आयरन से भरपूर होने के कारण यह एनिमिया को दूर करने में मददगार होता है। एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन ए, सी और कई मिनरलों से भरपूर धनिया कैंसर से बचाव करता है।
- हरा धनिया की चटनी बनाकर खाई जाती है क्योंकि जो हमाइसको खाने से नींद भी अच्छी आती है। डायबिटीज से पीडि़त व्यक्ति के लिए तो यह वरदान है। यह इंसुलिन बढ़ाता है और रक्त का ग्लूकोज स्तर कम करने में मदद करता है।
- धनिया की पत्तियों में एंटी टय़ुमेटिक और एंटी अर्थराइटिस के गुण होते हैं। यह सूजन कम करने में बहुत मददगार होता है, इसलिए जोड़ों के दर्द में राहत देता है।
- हरा धनिया वातनाशक होने के साथ-साथ पाचनशक्ति भी बढ़ाता है। धनिया की हरी पत्तियां पित्तनाशक होती हैं। पित्त या कफ की शिकायत होने पर दो चम्मच धनिया की हरी-पत्तियों का रस सेवन करना चाहिए।

गोंद के औषधीय गुण -------
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किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने पर भूरा और कडा हो जाता है उसे गोंद कहते है .यह शीतल और पौष्टिक होता है . उसमे उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते है . आयुर्वेदिक दवाइयों में गोली या वटी बनाने के लिए भी पावडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है .
- कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है .
- नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है - पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है।
- आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है।
- सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है।
- बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है।
- हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है । हींग दो किस्म की होती है - एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं । इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है । हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती
- गुग्गुल एक बहुवर्षी झाड़ीनुमा वृक्ष है जिसके तने व शाखाओं से गोंद निकलता है, जो सगंध, गाढ़ा तथा अनेक वर्ण वाला होता है. यह जोड़ों के दर्द के निवारण और धुप अगरबत्ती आदि में इस्तेमाल होता है .
- प्रपोलीश- यह पौधों द्धारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियॉं पौधों से इकट्ठा करती है इसका उपयोग डेन्डानसैम्बू बनाने में तथा पराबैंगनी किरणों से बचने के रूप में किया जाता है।
- ग्वार फली के बीज में ग्लैक्टोमेनन नामक गोंद होता है .ग्वार से प्राप्त गम का उपयोग दूध से बने पदार्थों जैसे आइसक्रीम , पनीर आदि में किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई व्यंजनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है.ग्वार के बीजों से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधीय उपयोग के साथ ही अनेक उद्योगों में भी काम आता है।
- इसके अलावा सहजन , बेर , पीपल , अर्जुन आदि पेड़ों के गोंद में उसके औषधीय गुण मौजूद होते 

बुधवार, 18 दिसंबर 2013

सर्दियों में सरसों के तेल का उपयोग खाने में करें या दवा के रूप में यह बहुत फायदेमंद साबित होता है। सरसों तेल में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो ऐसे पोषक तत्व हैं जो हमारी सेहत, बाल और त्वचा आदि पर जादुई असर छोड़ते हैं। इसलिए सरसों के तेल का उपयोग प्राचीन समय से ही खाने व शरीर पर लगाने में भी किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सरसों का तेल बहुत ही अच्छे पेनकिलर की तरह भी काम करता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सरसों के तेल के कुछ ऐसे ही नुस्खों के बारे में जो बहुत उपयोगी व रामबाण माने जाते हैं..... - सरसों के तेल में दर्दनाशक गुण हैं, यदि कान का दर्द सताए तो दो बूंद गुनगुना सरसों का तेल कान में टपकाएं, चाहे तो इसमें दो चार कलियां लहसुन की भी मिला सकते हैं। - सरसों का तेल सौंदर्यवर्धक भी है, रूप सौंदर्य निखारने के लिए गौरा रंग चाहने वाले बेसन पीसी हल्दी में सरसो का तेल डालकर लगाएं। -सरसों का तेल दिल को चुस्त-दुरुस्त रखता है, कुछ समय पूर्व एम्स, हावर्ड स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस तथा सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज में एक साथ शोध की गई जिससे पता चला कि सरसों का तेल खाने वाले 71 प्रतिशत लोगों को दिल की बीमारी नहीं हुई। - यदि गठिया से परेशान हों तो सरसों के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से दर्द में राहत मिलती है। - यदि कमर दर्द हो तो सरसों के तेल में थोड़ी हींग, अजवाइन और लहसुन मिलाकर गर्म कर लें और उसे कमर पर लगाएं, पिंडलियों का दर्द हो तो सरसो के तेल को गुनगुना करके मालिश करना चाहिए। - नवजात शिशु और प्रसूता दोनों की मालिश करने के लिए सरसों का तेल सबसे अच्छा रहता है। सरसों के तेल से मालिश करने के बाद नहाने से शिशु को सर्दी होने का खतरा नहीं रहता, अपितु यदि बच्चे का सर्दी लग गई हो तो सरसों के तेल से मालिश करने से दूर हो जाती है। - चर्मरोगों में भी सरसों का तेल लाभदाक है इसके तेल में आक पत्तों का रस और थोड़ी सी पीसी हल्दी मिलाकर गर्म करके ठंडा होने पर लगाने से दाद, खाज, खुजली आदि नाश होता है। सरसों का तेल पाइरिया मिटाने वाला है। इसमें सेंधा नमक मिलाकर दांतों और मसूड़ों पर लगाना चाहिए। - यदि चेहरे पर कील मुंहासे, झाइयां, झुर्रियां हो तो सरसों का तेल बड़े काम की चीज है सरसों के तेल से मालिश करने से शरीर पर झुर्रियां नहीं पड़ती। - सरसों के तेल में थोड़ा हिना पाउडर मिलाकर कुछ देर उबालकर छानकर बालों में लगाने से बाल झडऩा कम हो जाते हैं। - सरसों के तेल से मालिश करने पर खून बढ़ता है। शरीर में चुस्ती-स्फूर्ति आती है। इससे शारीरिक थकान भी दूर होती है। रिफार्इन्ड, डबल रिफार्इन्ड और सोयाबीन तेल का प्रयोग भोजन में करना हानिकारक है उसके स्थान पर मूंगफली, तिल, सरसों आदि का घानी (कोल्हू) वाला तेल ही प्रयोग करें।
गहरी नींद के आसान उपाय*** * रात्रि भोजन करने के बाद पन्द्रह से बीस मिनट धीमी चाल से सैर कर लेने के बाद ही बिस्तर पर जाने की आदत बना लेनी चाहिए। इससे अच्छी नींद के अलावा पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है। * अगर तनाव की वजह से नींद नहीं आ रही हो या फिर मन में घबराहट सी हो तब अपना मन पसंद संगीत सुनें या फिर अच्छा साहित्य या स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तकें पढ़ें, ऐसा करने से मन में शांति का भाव आएगा, जो गहरी नींद में काफी सहायक होता है। * अनिद्रा के रोगी को अपने हाथ-पैर मुँह स्वच्छ जल से धोकर बिस्तर पर जाना जाहिए। इससे नींद आने में कठिनाई नहीं होगी। एक खास बात यह कि बाजार में मिलने वाले सुगंधित तेलों का प्रयोग नींद लाने के लिए नहीं करें, नहीं तो यह आपकी आदत में शामिल हो जाएगा। * सोते समय दिनभर का घटनाक्रम भूल जाएँ। अगले दिन के कार्यक्रम के बारे में भी कुछ न सोचें। सारी बातें सुबह तक के लिए छोड़ दें। दिनचर्या के बारे में सोचने से मस्तिष्क में तनाव भर जाता है, जिस कारण नींद नहीं आती। * अपना पलंग मन-मुताबिक ही चुनें और जिस मुद्रा में आपको सोने में आराम महसूस होता हो, उसी मुद्रा में पहले सोने की कोशिश करें। अनचाही मुद्रा में सोने से शरीर की थकावट बनी रहती है, जो नींद में बाधा उत्पन्न करती है। * अगर अनिद्रा की समस्या पुरानी और गंभीर है, नींद की गोलियाँ खाने की आदत बनी हुई है तो किसी योग चिकित्सक की सलाह लेकर शवासन का अभ्यास करें और रात को सोते वक्त शवासन करें। इससे पूरे शरीर की माँसपेशियों का तनाव निकल जाता है और मस्तिष्क को आराम मिलता है, जिस कारण आसानी से नींद आ जाती है। * अच्छी नींद के लिए कमरे का हवादार होना भी जरूरी है। अगर मौसम बाहर सोने के अनुकूल है तो छत पर या बाहर सोने को प्राथमिकता दें। कमरे में कूलर-पँखा या फिर एयर कंडीशनर का शोर ज्यादा रहता है, तो इनकी भी मरम्मत करवा लेनी चाहिए, क्योंकि शोर से मस्तिष्क उत्तेजित रहता है, जिस कारण निद्रा में बाधा पड़ जाती है। * सोने से पहले चाय-कॉफी या अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करें। इससे मस्तिष्क की शिराएँ उत्तेजित हो जाती हैं, जो कि गहरी नींद आने में बाधक होती हैं।

क्या है अमृत ...? .

yog guru: क्या है अमृत ...? Jay Gomata jay Gopal गाय का दूध,...: क्या है अमृत ...? Jay Gomata jay Gopal गाय का दूध, धृत, मक्खन, छांछ के स्वास्थ्य चिकित्सकीय पहलुओं की जानकारी सामने लायी जाना चाहिए। आधुनिक...
क्या है अमृत ...? Jay Gomata jay Gopal गाय का दूध, धृत, मक्खन, छांछ के स्वास्थ्य चिकित्सकीय पहलुओं की जानकारी सामने लायी जाना चाहिए। आधुनिक शोध ने गौमूत्र केसेवन से रक्तचाप ठीक होने, भूख बढ़ने, किडनी के रोग ठीक होने की बात सिध्द कर दी है। अमेरिका का चिकित्सक क्राकोड हेमिल्टन ने इसका प्रयोग कर सिध्द कर दिया है कि गौमूत्र के उपयोग से हृदय रोग को ठीक किया जा सकता है। डॉ.सीमर्स ने गौमूत्र से रक्त बहने वाली नलियों को अनपेक्षित कीटाणुओं से मुक्त करने की बात उजागर की है। गोमूत्र अर्क से कैंसर का इलाज करने का नुस्खा अमेरिका में पेंटेट किया गया है। इसकी पेंटेट संख्या 6410056 है। गोमूत्र और गोमय (गोबर) से आयुर्वेद की औषधियां, रसायन, टाइल्स, डिस्टेंपर, कीटाणु नाशक चूर्ण, दंत मंजन, हवन सामग्री का औद्योगिक उत्पादन कई शहरों में आरंभ हो चुका है। इससे गौमूत्र 5 रु. लीटर और गोबर 5 रु. किलो खरीदे जाने का सिलसिला आरंभ हो चुका है। गौमूत्र, गोबर से बनने वाले उत्पाद कुटीर उद्योग का रुप लेते जा रहे हैं। इससे रोजगार के नये अवसर पैदा हो रहे हैं। पंचगव्य भारतीय समाज में सनातन काल से चला आ रहा है। इसका प्रतीकात्मक उपयोग देखते आ रहे हैं। इसके चिकित्सकीय गुणों का आकलन कर जन-जन के सामने लाने का वक्त आ गया है। पंच गव्य, देह, मन, बुध्दि को शुध्द करता है। Pls Download this application Download Jay Gomata-Cow News application from


हत्यारे और बलात्कारी अंग्रेजो के नाम पर रखे हुए हैं भारत के शहरों के नाम

आज भी कई शहरो के नाम अंग्रेजो के क्रूर अधिकारीयों के नाम रखे हुए है
जिन्होंने भारत के माँ बहनों के साथ बलात्कार किये ,किसानो को बेघर किया ,हमारी संस्कृति को कमजोर किया , हमारी संपदा को लूटा जैसे लेंड्स डान (उतराखंड ) मक्लीयोड़ गंज ,डलहोजी(हिमाचाल प्रदेश ) और वास्को डा गामा (गोवा )

आश्चर्य की बात है की जो पार्टी अपने आप को रास्ट्रवादी पार्टी कहती है उसका
शाशन भी इन राज्यों में रहा है उसने भी इन नामो को बदला नहीं हैं .अब आप ही बताइए हम किसी का भरोसा करें हमारी लड़ाई तो इस देश में कोई नहीं लड़ रहा है हम तो अकेले है पड़ गए हैं .आजकल जो अकेले रह गए हैं वो ही सनातनी कहलाते हैं

नोट : फोटो में डलहोजी और मेक्लिओद गंज हिमाचल प्रदेश में हैं

जो राष्ट्र आजादी के बाद अपने अस्तित्व और स्वाभिमान के लड़ाई नहीं लडेगा वो
किसी भी शेत्र में सफल नहीं हो सकता है : महामना राजीव जी
"भारत में जिस व्यक्ति के घर में भी मैं कभी गया, तो मैंने देखा की वहाँ सोने के सिक्कों का ढेर ऐसे लगा रहता हैं, जैसे की चने का या गेहूं का ढेर किसानों के घरों में रखा जाता है। भारतवासी इन सिक्को को कभी गिन नहीं पाते क्योंकि गिनने की फुर्सत नही होती है इसलिए वो तराजू में तौलकर रखते हैं। किसी के घर में 100 किलो, इसी के यहा 200 किलो और किसी के यहाँ 500 किलो सोना है, इस तरह भारत के घरों में सोने का भंडार भरा हुआ है।"

-- 'थॉमस बैबिंगटन मैकाले' द्वारा 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद दिया भाषण

ऐसा था हमारा प्यारा भारत..."सोने की चिड़िया".....जो इन गोरे और काले अंग्रेजों ने लूट लिया।

सोचिए जरा !!
जय हिन्द !
मुद्राओं के अभ्यास से गंभीर से गंभीर रोग समाप्त होने के साथ सिद्धि भी मिलती है और शोक मिटकर जीवन में सुख शांति आती है । अपने सारे ज्ञात अज्ञात पाप, दोष, गलतियों को गुरु यंत्र के नीचे समर्पित करने के उपरांत ॐ तत्सवितुर्वरेणियम सर्व दोष पापान निवृत्तय धियो योनः प्रचोदयात ,मन्त्र से समर्पित करें साधना से पूर्व और साधना के बाद मूल मंत्र का उच्चारण करते हुए 5 साफल्य मुद्राएँ प्रदर्शित करनी चाहिए। एक एक मुद्रा को आप 10 सेकंड से लेकर 2 मिनट तक भी प्रदर्शित करें तो पर्याप्त हैं, जैसी आपकी अनुकूलता हो। ये 5 साफल्य मुद्राएँ हैं.... मत्स्य, दंड, शंख, अभय और हृदय। इनसे ऊर्जा स्रोत को जाग्रत करने के लिए मुद्रओं का अभ्यास सहायक सिद्धि होता है। इससे अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों की प्राप्ति संभव है। यह संपूर्ण योग का सार स्वरूप है। यौगिक और तांत्रिक दृष्टि योग मुद्राओं में योनि मुद्रा को खास महत्व मिला हुआ है। योग में यह मुद्रा प्राणवायु के लिए उत्तम मानी गई है और बड़ी चमत्कारी मुद्रा है पहले किसी भी सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं। फिर दोनों हाथों की अंगुलियों का उपयोग करते हुए सबसे पहले दोनों कनिष्ठा अंगुलियों को आपस में मिलाएं और दोनों अंगूठे के प्रथम पोर को कनिष्ठा के अंतिम पोर से स्पर्श करें। फिर कनिष्ठा अंगुलियों के नीचे दोनों मध्यमा अंगुलियों को रखते हुए उनके प्रथम पोर को आपस में मिलाएं। मध्यमा अंगुलियों के नीचे अनामिका अंगुलियों को एक-दूसरे के विपरीत रखें और उनके दोनों नाखुनों को तर्जनी अंगुली के प्रथम पोर से दबाएं। इसका आध्यात्मिक लाभ : योनि मुद्रा बनाकर और पूर्व मूलबंध की स्थिति में सम्यक् भाव से स्थित होकर प्राण-अपान को मिलाने की प्रबल भावना के साथ मूलाधार स्थान पर यौगिक संयम करने से कई प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं भौतिक लाभ : अंगूठा शरीर के भीतर की अग्नि को कंट्रोल करता है। तर्जनी अंगुली से वायु तत्व कंट्रोल में होता है। मध्यनमा और अनामिका शरीर के पृथ्वी तत्व को कंट्रोल करती है। कनिष्ठा अंगुली से जल तत्व कंट्रोल में रहता है। इसके निरंतर अभ्यास से जहां सभी तत्वों को लाभ मिलता है वहीं इससे इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की शक्ति बढ़ती है। इससे मन को एकाग्र करने की योग्यता का विकास भी होता है। यह शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकारात्मक का विकास करती है। इससे हाथों की मांसपेशियों पर अच्छा खासा दबाव बनता है जिसके कारण मस्तिष्क, हृदय और फेंफड़े स्वस्थ बनते हैं

मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

जो लोग इस घातक भ्रम मेँ हैँ भारत की समस्याओँ का समाधान "सत्ता परिवर्तन" मात्र से हो जाएगा वो थोड़ा इतिहास का ठीस से अध्ययन कर लेँ क्योँकि देश का भला सत्ता परिवर्तन से नहीँ होगा, "व्यवस्था परिवर्तन" से होगा और हाँ, ये बात मैँ नहीँ कह रहा हूँ । ये दर्शनोपदेश तो अवधनरेश मर्यादापुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र ने विभीषण को लंका मेँ रावणवधोपरान्त दिया था । विस्तारपूर्वक जानने के लिये यूट्यूब पर राजीव दीक्षित रामकथा सुनेँ ।
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रामराज्य
http://m.youtube.com/watch?gl=US&hl=en-GB&client=mv-google&v=qUl_PRhLnA0
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संपूर्ण रामकथा ।
http://m.youtube.com/watch?gl=US&hl=en-GB&client=mv-google&v=xUAd8lmEmvg
यूरोप के सभी बड़े दार्शनिक मानते है की शरीर का आनंद ही चरम आनंद है और भारतवासी मानते है की इश्वर प्राप्ति का आनंद ही चरम आनंद है | इसीलिए यूरोप में जो भी किया जाता है वो शरीर के सुख के लिए किया जाता है और भारत में सब काम इश्वर प्राप्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है | यूरोप और अमेरिका वाले सिर्फ शरीर का सुख चाहते है और शरीर का सुख एक तरीके से लेने के बाद उसमे उब हो जाती है फिर दुसरे तरीके से लेते है फिर उसमे उब होने के बाद तीसरे तरीके से ...इसी तरह चलता है क्योंकि शरीर का सुख ही सबकुछ है और वो ही जीवन का अंतिम लक्ष है | उनका मानना है के ये शरीर एक बार ही मिला है और आगे मिलेगा की नही पता नही क्योंकि न ही वो पुनर्जनम को मानते है न ही पुर्वजनम को इसीलिए शरीर का जितना सुख लेना है ले लो जितना भोग करना है कर लो उसके लिए समलैंगिकता में जाना पड़े तो जाओ किसी और काम में जाना पड़े तो चले जाओ | ये सब कुछ प्राप्ति है शरीर के माध्यम से इसीलिए पश्चिम में समलैंगिकता एक बहुत बड़ा प्रश्न है | पश्चिम के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को समलैंगिकता के प्रश्न पर चुनाव से पहले वादा करना पड़ता है, बाद में कानून भी बनाना पड़ता है उन लोगो के लिए |
भारत के लोग पुर्वजनम और पुनर्जनम दोनों को मानते है और शरीर के सुख को कभी अंतिम सुख नही माना है तो भारत में प्रश्न अलग है, मान्यता अलग है, उसके हिसाब से व्यवस्था भी अलग है इसलिए भारत में समलैंगिकता कोई बिषय नही है |

लेकिन पश्चिम की और पश्चिम की पैसो से पोषित मीडिया ने भारत में समलैंगिकता का विषय बनना चाहिए, इसपर बहस होनी चाहिए, समाज में बटवारा होना चाहिए उसकी पूरी ताकत लगाकर कौशिश कर रहे है | अगर भारतमे ये विषय चल पड़ा और भारत के लोगो द्वारा स्वीकृत हो गया तोह कितना बड़ा बाज़ार उनको भारत में मिल जायेगा समलैंगिक लोगो के बस्तुयों के बिक्री के लिए | उनको सिर्फ भारत का बाज़ार दिखाई देता है और भारत के मूल बिषय को बदलने के लिए इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया के जरिये कौशिश कर रहे है |

http://www.youtube.com/watch?v=PMC-WGwDG3Q

राजीव भाई ने बताया था कि इन 63 सालों में 80 करोड गायों को मौत के घाट उतारा जा चुका है..............सरकार की अनुमति से 35,000 कतलखाने चल रहे हैं ...............एक एक गाय करोड रुप्ये का फ़ायदा देने वाली है ऒर माता कहने वाले लोग चुप बैठे उसे कटते देख रहे है

VADIK SAMADHAN GURUKUL

भारत जैसे गोपालक देश को गोनाशक बनाने की तैयारी

अमेरिकी कृषि विभाग हमारा मखौल उड़ाते हुए पूछ रहा है की

"यह जानना रुचिकर है की जो देश गाय को पवित्र मान कर पूजा करता है वो देश दुनिया का 

सबसे बड़ा गोमांस निर्यातक देश लगभग बन चुका है"

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी आज की एक रिपोर्ट के बहुत सी बातो पर प्रकाश डालती है ज़रूर पढ़े

और राजीव भाई को सुनकर ज़रूर बताएं की गोमाता को बचाने के लिए आपने व्यक्तिगत स्तर पर क्या किया?

http://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/In-the-land-of-the-holy-cow-fury-over-beef-exports/articleshow/27235745.cms
 — with Amit Yadav and 54 others.

Vishwa Bandhu Gupta exposed Fake Currency Scam of Congress Government an...

सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...