मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

हम राजीव भाई समर्थको के लिए यह विडियो ही बहुत है केजरीवाल को समर्थन करने का मित्रो मैं आपको उस विडियो का लिंक दे रहा हूँ जो 14-Nov-2010 का है जब राजीव भाई जीवित थे और इसके 15 दिन बाद उनका देहांत हुआ था दिल्ली के जंतर मंतर पर रामदेव जी, अन्ना हजारे और केजरीवाल साथ साथ मंच पर थे पर राजीव भाई नहीं थे, क्यों ? क्योंकि राजीव भाई ने स्वामीजी को छत्तीसगढ़ का प्रवास छोड़ कर केजरीवाल के साथ मंच साँझा करने से मना कर दिया था? क्योंकि उन्हें पता था की आज जो रूप केजरीवाल का है उसको वो पहले से जानते थे अगर राजीव भाई जीवित होते तो केजरीवाल केजरीवाल नहीं होता इसलिए राजीव समर्थक इस भ्रम को दिमाग से निकल दें की राजीव भाई होते तो केजरीवाल उनके साथ होताhttp://www.youtube.com/watch?v=A9oJMewaoMM राजीव भाई ने NGO की व्याख्या कितनी बढ़िया तरीके से की है उनका कहना है जो NGO सरकारी या विदेशी पैसे लेकर काम करते हैं उनपर कभी भरोसा नहीं करना, इसको लेकर कार्यकर्ता भी भ्रमित हो जाते हैं उनको लगता है बहुत बढ़िया देशभक्ति का काम कर रहे हैं ये NGO और फिर उनके एजेंट बन जाते हैं | *अगर कोई NGO विदेशी पैसे लेकर काम करेगा तो वो सिर्फ वोही मुद्दे उठाएगा जो विदेशी हित में हो, ये लोग कभी भी ऐसे मुद्दे नहीं उठाएंगे जिनसे एक आम नागरिक या ग्रामीण किसान स्वावलंबी बन सके, ये लोग ऐसे काम या प्रोजेक्ट ही करेंगे जिनसे आम नागरिक या किसान परावलम्बी बने या आश्रित बने|* हाँ कुछ NGO पर एक बार भरोसा तो कर सकते हैं जो NGO खुद के लोगों के पैसे से अपने काम करते हैं जैसे सहकारी संस्थाएं और उद्योग लगाना | (इसको समझने का एक साधारण उदाहरण - जैसे भिखारी को भीख देने से समस्या कभी हल नहीं हो सकती समस्या का हल उसकी मासिक नियमित आर्थिक आवश्यकता का हल करना है, कोई रोजगार या अन्य काम जिससे आमदनी का स्रोत बना रहे| अब ये विदेशी पैसे पर चलने वाले NGO कभी भी इनके रोजगार के बारे में ना सोचकर, बेमतलब की कोई रैली, दौड़ या कैंडल मार्च (गरीबी हटाने के लिए) का आयोजन करेंगे जिसपर लाखों खर्च किये जायेंगे जिससे की मीडिया में इनकी खबर छपे|) जैसा की अभी धरा 377 को लेकर NGO आन्दोलन कर रहे हैं, पहली बात तो ये हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और ये सारे NGO विदेशी हैं जो अपनी विकृत संस्कृति को हमपर थोपना चाह रहे हैं | शिक्षा, खान-पान, पहनावा, रहन-सहन सबपर विदेशी प्रभाव डाल देने के बाद अब ये ही बाकी रह गया था| देश बचाने से पहले ये तो पता होना चाहिए की देश कैसे बर्बाद किया जा रहा है !

सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...