"भारत में जिस व्यक्ति के घर में भी मैं कभी गया, तो मैंने देखा की वहाँ सोने के सिक्कों का ढेर ऐसे लगा रहता हैं, जैसे की चने का या गेहूं का ढेर किसानों के घरों में रखा जाता है। भारतवासी इन सिक्को को कभी गिन नहीं पाते क्योंकि गिनने की फुर्सत नही होती है इसलिए वो तराजू में तौलकर रखते हैं। किसी के घर में 100 किलो, इसी के यहा 200 किलो और किसी के यहाँ 500 किलो सोना है, इस तरह भारत के घरों में सोने का भंडार भरा हुआ है।"
-- 'थॉमस बैबिंगटन मैकाले' द्वारा 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद दिया भाषण
ऐसा था हमारा प्यारा भारत..."सोने की चिड़िया".....जो इन गोरे और काले अंग्रेजों ने लूट लिया।
सोचिए जरा !!
जय हिन्द !
-- 'थॉमस बैबिंगटन मैकाले' द्वारा 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद दिया भाषण
ऐसा था हमारा प्यारा भारत..."सोने की चिड़िया".....जो इन गोरे और काले अंग्रेजों ने लूट लिया।
सोचिए जरा !!
जय हिन्द !





