नागेश्वर / नाग केसर -
नागेश्वर एक वनस्पति है इसे हम नाग केसर के नाम से भी जानते है ।
आप यह नाग केसर किसी भी किराने की दूकान से खरीद सकते है ।
लेकिन याद रहे जिस दिन भी आप यह नाग केशर घर ला रहे हो दिन का वह समय शुभ
होना चाहिए ।
नाग केशर को लाकर आप उसे किसी पवित्र स्थान पर रख दें,
एवं 21 सोमवार तक शिव जी का पूजन करे और शिवजी को चन्दन और नाग केसर अर्पण करें एवं पूजन उपरांत शिवजी का मंत्र ॐ नमः शिवाय जप करके मीठे का भोग लगायें।
सोमबार व्रत भी रखें ...
क्रोध एवं अहम् से दूर रहते हुए अपने सामर्थ्य अनुसार पशु पक्षी एवं भिखारी को भोजन प्रदान करें ।
जरुरत मंद लोगो ( भिखारी, संत , महात्मा ) को कुछ पैसों का दान कर सहायता करें।
अंतिम सोमवार के दिन पूजन के उपरांत किसी ब्राह्मीणि माता को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करें एवं यथा संभव उन्हें नए वस्त्र, भोजन, एवं दक्षिणा प्रदान करें ।
तत्पश्चात उन्हें आदर सहित उनके घर तक छोड़कर आवे या विदा करें ।
इस नागकेशर तंत्र से भगवान् शिव प्रसन्न हो साधक को धन, धान्य, सुख, शान्ति एवं संसार के वैभव प्रदान करते है ।
नागकेसर के अन्य प्रयोग -
- पीत वस्त्र में नागकेसर, हल्दी, सुपारी, एक सिक्का, ताँबे का टुकड़ा, चावल पोटली बना लें।
इस पोटली को शिवजी के सम्मुख रखकर, धूप-दीप से पूजन करके सिद्ध कर लें फिर आलमारी, तिजोरी, भण्डार में कहीं भी रख दें।
यह धनदायक प्रयोग है।
इसके अतिरिक्त “नागकेसर” को प्रत्येक प्रयोग में “ॐ नमः शिवाय” से अभिमन्त्रित करना चाहिए।
- कभी-कभी उधार में बहुत-सा पैसा फंस जाता है।
ऐसी स्थिति में यह प्रयोग करके देखें।
किसी भी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रुई धुनने वाले से थोड़ी साफ रुई खरीदकर ले आएँ।
उसकी चार बत्तियाँ बना लें। बत्तियों को जावित्री, नागकेसर तथा काले तिल (तीनों अल्प मात्रा में) थोड़ा-सा गीला करके सान लें।
यह चारों बत्तियाँ किसी चौमुखे दिए में रख लें।
रात्रि को सुविधानुसार किसी भी समय दिए में तिल का तेल डालकर चौराहे पर चुपके से रखकर जला दें।
अपनी मध्यमा अंगुली का साफ पिन से एक बूँद खून निकाल कर दिए पर टपका दें।
मन में सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम, जिनसे कार्य है, तीन बार पुकारें।
मन में विश्वास जमाएं कि परिश्रम से अर्जित आपकी धनराशि आपको अवश्य ही मिलेगी।
इसके बाद बिना पीछे मुड़े चुपचाप घर लौट आएँ।
अगले दिन सर्वप्रथम एक रोटी पर गुड़ रखकर गाय को खिला दें।
यदि गाय न मिल सके तो उसके नाम से निकालकर घर की छत पर रख दें।
- जिस किसी पूर्णिमा को सोमवार हो उस दिन यह प्रयोग करें।
कहीं से नागकेसर के फूल प्राप्त कर, किसी भी मन्दिर में शिवलिंग पर पाँच बिल्वपत्रों के साथ यह फूल भी चढ़ा दीजिए।
इससे पूर्व शिवलिंग को कच्चे दूध, गंगाजल, शहद, दही से धोकर पवित्र कर सकते हैं तो यथाशक्ति करें।
यह क्रिया अगली पूर्णिमा तक निरन्तर करते रहें।
इस पूजा में एक दिन का भी नागा नहीं होना चाहिए।
ऐसा होने पर आपकी पूजा खण्डित हो जायेगी।
आपको फिर किसी पूर्णिमा के दिन पड़नेवाले सोमवार को प्रारम्भ करने तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।
इस एक माह के लगभग जैसी भी श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना बन पड़े, करें।
भगवान को चढ़ाए प्रसाद के ग्रहण करने के उपरान्त ही कुछ खाएँ।
अन्तिम दिन चढ़ाए गये फूल तथा बिल्वपत्रों में से एक अपने साथ श्रद्धाभाव से घर ले आएँ।
इन्हें घर, दुकान, फैक्ट्री कहीं भी पैसे रखने के स्थान में रख दें।
धन-सम्पदा अर्जित कराने में नागकेसर के पुष्प चमत्कारी प्रभाव दिखलाते हैं।
!! ॐ नमः शिवाय !!
नागेश्वर एक वनस्पति है इसे हम नाग केसर के नाम से भी जानते है ।
आप यह नाग केसर किसी भी किराने की दूकान से खरीद सकते है ।
लेकिन याद रहे जिस दिन भी आप यह नाग केशर घर ला रहे हो दिन का वह समय शुभ
होना चाहिए ।
नाग केशर को लाकर आप उसे किसी पवित्र स्थान पर रख दें,
एवं 21 सोमवार तक शिव जी का पूजन करे और शिवजी को चन्दन और नाग केसर अर्पण करें एवं पूजन उपरांत शिवजी का मंत्र ॐ नमः शिवाय जप करके मीठे का भोग लगायें।
सोमबार व्रत भी रखें ...
क्रोध एवं अहम् से दूर रहते हुए अपने सामर्थ्य अनुसार पशु पक्षी एवं भिखारी को भोजन प्रदान करें ।
जरुरत मंद लोगो ( भिखारी, संत , महात्मा ) को कुछ पैसों का दान कर सहायता करें।
अंतिम सोमवार के दिन पूजन के उपरांत किसी ब्राह्मीणि माता को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करें एवं यथा संभव उन्हें नए वस्त्र, भोजन, एवं दक्षिणा प्रदान करें ।
तत्पश्चात उन्हें आदर सहित उनके घर तक छोड़कर आवे या विदा करें ।
इस नागकेशर तंत्र से भगवान् शिव प्रसन्न हो साधक को धन, धान्य, सुख, शान्ति एवं संसार के वैभव प्रदान करते है ।
नागकेसर के अन्य प्रयोग -
- पीत वस्त्र में नागकेसर, हल्दी, सुपारी, एक सिक्का, ताँबे का टुकड़ा, चावल पोटली बना लें।
इस पोटली को शिवजी के सम्मुख रखकर, धूप-दीप से पूजन करके सिद्ध कर लें फिर आलमारी, तिजोरी, भण्डार में कहीं भी रख दें।
यह धनदायक प्रयोग है।
इसके अतिरिक्त “नागकेसर” को प्रत्येक प्रयोग में “ॐ नमः शिवाय” से अभिमन्त्रित करना चाहिए।
- कभी-कभी उधार में बहुत-सा पैसा फंस जाता है।
ऐसी स्थिति में यह प्रयोग करके देखें।
किसी भी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रुई धुनने वाले से थोड़ी साफ रुई खरीदकर ले आएँ।
उसकी चार बत्तियाँ बना लें। बत्तियों को जावित्री, नागकेसर तथा काले तिल (तीनों अल्प मात्रा में) थोड़ा-सा गीला करके सान लें।
यह चारों बत्तियाँ किसी चौमुखे दिए में रख लें।
रात्रि को सुविधानुसार किसी भी समय दिए में तिल का तेल डालकर चौराहे पर चुपके से रखकर जला दें।
अपनी मध्यमा अंगुली का साफ पिन से एक बूँद खून निकाल कर दिए पर टपका दें।
मन में सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम, जिनसे कार्य है, तीन बार पुकारें।
मन में विश्वास जमाएं कि परिश्रम से अर्जित आपकी धनराशि आपको अवश्य ही मिलेगी।
इसके बाद बिना पीछे मुड़े चुपचाप घर लौट आएँ।
अगले दिन सर्वप्रथम एक रोटी पर गुड़ रखकर गाय को खिला दें।
यदि गाय न मिल सके तो उसके नाम से निकालकर घर की छत पर रख दें।
- जिस किसी पूर्णिमा को सोमवार हो उस दिन यह प्रयोग करें।
कहीं से नागकेसर के फूल प्राप्त कर, किसी भी मन्दिर में शिवलिंग पर पाँच बिल्वपत्रों के साथ यह फूल भी चढ़ा दीजिए।
इससे पूर्व शिवलिंग को कच्चे दूध, गंगाजल, शहद, दही से धोकर पवित्र कर सकते हैं तो यथाशक्ति करें।
यह क्रिया अगली पूर्णिमा तक निरन्तर करते रहें।
इस पूजा में एक दिन का भी नागा नहीं होना चाहिए।
ऐसा होने पर आपकी पूजा खण्डित हो जायेगी।
आपको फिर किसी पूर्णिमा के दिन पड़नेवाले सोमवार को प्रारम्भ करने तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।
इस एक माह के लगभग जैसी भी श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना बन पड़े, करें।
भगवान को चढ़ाए प्रसाद के ग्रहण करने के उपरान्त ही कुछ खाएँ।
अन्तिम दिन चढ़ाए गये फूल तथा बिल्वपत्रों में से एक अपने साथ श्रद्धाभाव से घर ले आएँ।
इन्हें घर, दुकान, फैक्ट्री कहीं भी पैसे रखने के स्थान में रख दें।
धन-सम्पदा अर्जित कराने में नागकेसर के पुष्प चमत्कारी प्रभाव दिखलाते हैं।
!! ॐ नमः शिवाय !!







