*गोवंश जनगणना क्यों?*
टारगेट 2050
टारगेट 2050
प्राचीन काल सतयुग से लेकर 1980 तंक, लाखो साल तक गोवंश उत्पाद जैसे दूध , घी,मक्खन, छाछ , खोवा आदि हमारे देश में सबसे अधिक लोकप्रिय आहार रहे है।
अंग्रेजो ने गोउत्पाद का प्रयोग भारत के हर घर में देखा।
अंग्रेजो ने गोउत्पाद का प्रयोग भारत के हर घर में देखा।
अंग्रेज हर उस चीज को तुरंत व्यापारिक नजरिये से ग्रहण कर लेते है जिसको हिन्दू उपयोग करते है। *ताकि उसका बाद में उसको व्यापार कर लाभ कमाया जा सके।* जैसे
टमाटर की चटनी भारत में बहुत खाई जाती थी और है,तो अंग्रेजो ने टोमेटो सास का प्रचलन बाजार में कर दिया।
टमाटर की चटनी भारत में बहुत खाई जाती थी और है,तो अंग्रेजो ने टोमेटो सास का प्रचलन बाजार में कर दिया।
तो
अंग्रेजो ने गाय का दूध ,घी,खोवा आदि की महिमा जानी और ये समझ गए कि *हिन्दू इनके बिना नहीं रह सकते।*
तो
*अंग्रेजो ने 100 वर्षीय व्यापारिक योजना बनाई*
फिर
अंग्रेजो ने गाय का दूध ,घी,खोवा आदि की महिमा जानी और ये समझ गए कि *हिन्दू इनके बिना नहीं रह सकते।*
तो
*अंग्रेजो ने 100 वर्षीय व्यापारिक योजना बनाई*
फिर
1) वर्ष 1991 से देशी गोवंश की जनगणना आरम्भ हुई, ताकि पता लगाया जा सके की भारत्त में जनसंख्या के अनुपात में गाय कितनी है।
*इससे विदेशी कम्पनियो को दूध की कमी मालुम पड़ जाएगी,* यानी नेस्ले दूध पाउडर, क्रीम, आदि का बाजार बढ़ाने हेतु आंकड़े सरकारी सर्वे द्वारा उपलब्ध रहेंगे, कम्पनी का कोई खर्च नही।
*इससे विदेशी कम्पनियो को दूध की कमी मालुम पड़ जाएगी,* यानी नेस्ले दूध पाउडर, क्रीम, आदि का बाजार बढ़ाने हेतु आंकड़े सरकारी सर्वे द्वारा उपलब्ध रहेंगे, कम्पनी का कोई खर्च नही।
2) केवल हिन्दू त्योहारों पर ही नकली खोवा पकड़ने के समाच्चार आते है और भैंस ,कुत्ते तक को ढूंढ लाने वाली पुलिस पिछले 20 सालों में नकली खोवे बनाने वालों को नही पकड़ पा रही, क्योंकि *असली खेल तो केवल नकली खोवे के नाम पर वर्तमान में भयभीत बनाये रखना ही है।* ताकि 2050 में असली का व्यापार किया जा सके।
3) अभी अखबारो में,टीवी पर, और आपके डाक्टर बताते है कि *हिरदय,किडनी ,लकवा से बचना है तो घी मत खाओ।*
तो
आपको मालुम है कि असली गाय, उरुग्वे,ब्राजील में प्राकृतिक धुप, जंगल में पाली जा रही है,बंदूकों की सुरक्षा में ,ताकि 1 भी गोवंश का नुकसान ना हो।
आपको मालुम है कि असली गाय, उरुग्वे,ब्राजील में प्राकृतिक धुप, जंगल में पाली जा रही है,बंदूकों की सुरक्षा में ,ताकि 1 भी गोवंश का नुकसान ना हो।
अब खेल शुरू हो रहा है धीऱे धीऱे, समझिये ठीक से।
2015 में फ्रांस की एक कम्पनी दक्षिण की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध दूध फैक्ट्री को खरीद लेती है।
यानी पहले चरण में *दक्षिण में मिलने वाले ताजे दूध,घी, मक्खन,छाछ के व्यापार पर विदेशी कब्जा आरम्भ हो चुका।*
2015 में फ्रांस की एक कम्पनी दक्षिण की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध दूध फैक्ट्री को खरीद लेती है।
यानी पहले चरण में *दक्षिण में मिलने वाले ताजे दूध,घी, मक्खन,छाछ के व्यापार पर विदेशी कब्जा आरम्भ हो चुका।*
तो *आइये वर्ष 2050 में,* जब पुरे देश में जर्सी गाय या भैंस का इंजेक्शन वाला दूध ही उपलब्ध है, और *इस दूध आदि की भरपूर निंदा* 2050 के भारतीय डाक्टर कर रहे है और उसका उपयोग ना करने की सलाह दे रहे है और *आंकड़े बताये जा रहे है कि 2000 से 2050 तंक किंतने लोग गम्भीर रोगों से ग्रस्त होकर मरे इस जर्सी गाय के दूध के कारण।*
फिर 2050 में टीवी पर नेस्ले कम्पनी का विज्ञापन आता है,
*हम आपके स्वास्थ्य की चिंता करते है, हिन्दू धर्म का सम्मान करते है, इसलिये हम लाये है असली देशी गाय का दूध, घी आदि (ब्राजील ,उरुग्वे वाली ), जोकि सूर्य की रौशनी से विटामिन डी युक्त है, विषनाशक, रोगनाशक है।*
*हम आपके स्वास्थ्य की चिंता करते है, हिन्दू धर्म का सम्मान करते है, इसलिये हम लाये है असली देशी गाय का दूध, घी आदि (ब्राजील ,उरुग्वे वाली ), जोकि सूर्य की रौशनी से विटामिन डी युक्त है, विषनाशक, रोगनाशक है।*
और जो डाक्टर *1980 से 2050 तंक आपको घी खाने से मना कर रहे थे,* वो अब तुरंत विदेशी कम्पनी की भाषा बोलने लगेंगे और कहेंगे कि *देशी गाय का दूध , घी भरपूर खाओ, ये शरीर के लिये अमृत है क्योंकि देशी गाय का है और 50 साल की रिसर्च द्वारा प्रमाणित हैै कि इससे गम्भीर रोग नही होते।*
और
इस घी की कीमत उस समय होगी 10 हजार रूपये किलो आदि, ठीक उसी तरह जैसे मुफ्त के गवारपठे को एलोवेरा बनाकर विदेशी कम्पनियो ने 1000 रूपये किलो तंक बेचा है, योग को योगा बनाकर बेचा, लहसुन को गार्लिक पर्ल्स बनाकर बेचा, इत्र को आदमी औरत को आकर्षित करने वाला परफ्यूम बनाकर बेचा।
और
इस घी की कीमत उस समय होगी 10 हजार रूपये किलो आदि, ठीक उसी तरह जैसे मुफ्त के गवारपठे को एलोवेरा बनाकर विदेशी कम्पनियो ने 1000 रूपये किलो तंक बेचा है, योग को योगा बनाकर बेचा, लहसुन को गार्लिक पर्ल्स बनाकर बेचा, इत्र को आदमी औरत को आकर्षित करने वाला परफ्यूम बनाकर बेचा।
तो 2050 में देशी गाय का दुध, घी, खोवा ,मिठाईयां भरपूर बिकेंगी, डाक्टर आगे बढ़कर इनका सेवन करने को कहेंगे, केवल विदेशी कम्पनिया ही बेचेगी क्योंकि सरकार क़ानून बनाकर 2050 में जर्सी गाय, भैंस के दूध को प्रतिबंधित कर् देगी ( ढेले वाले नमक की तरह ), और देश में दूध, मिठाई,खोवा पर एकछत्र अधिकार होगा विदेशी कम्पनियो का।( जैसे आयुर्वेद को बदनाम करके या ख़त्म करते हुए, दवाइयों के बाजार पर 80% विदेशी कम्पनियो कब्जा है )
तो
2050 में
सोना संस्ता होगा और देशी गाय का दुध, घी, महंगा होगा ,एकछत्र व्यापारी केवल यूरोप होगा,जैसे अभी कम्प्यूटर मोबाइल पर कब्जा है उनका।
सोना संस्ता होगा और देशी गाय का दुध, घी, महंगा होगा ,एकछत्र व्यापारी केवल यूरोप होगा,जैसे अभी कम्प्यूटर मोबाइल पर कब्जा है उनका।
भारतीय विवश होंन्गे खरीदने को ।
ये है वर्तमान नकली खोवे के मौसमी समाच्चार, आक्सीटोसिज इंजेक्शन,जर्सी गाय को पूरे देश में फैलाये रखने की योजना का योजनाबद्ध इल्लू गीरोह का षड्यंत्र।
अजय कर्मयोगी
