बुधवार, 4 अप्रैल 2018

पुरी शंकराचार्य, अजय कर्मयोगी के अलावा संदीप माहेश्वरी, विवेक बिंद्रा और कैरी minati जैसे सनातन संस्कृति द्रोही धन पशु और मां बहन को गालियां देने वाले 100 करोड़ से ऊपर देखने वाले क्यों

मैं अभी 20 वर्ष का हूँ। पुरी शंकराचार्य जी को मात्र डेढ़ वर्ष से सुन रहा हूँ।
सोचता हूँ कि यदि 2010-2012 में ही यूट्यूब और अथाह इंटरनेट आज जितना सामान्य होता और पुरी शंकराचार्य जी भी यूट्यूब पर होते, तो हो सकता है कम से कम मैं सनातन धर्म का एक छोटा सा वैचारिक सैनिक तो बन ही जाता। बचपन से आचरण भी शुद्ध स्मार्त द्विज वाला होता।
आज जो बच्चे हैं, उनके लिए यह सब अत्यंत सुलभ है। परन्तु स्वयं को हिन्दू कहने वाले कितने लोग अपने बच्चों को पुरी शंकराचार्य जी के उपदेश सुनाते हैं?
संदीप माहेश्वरी, संस्कृत का मजाक उड़ाने वाले पाखण्डी, के चैनल पर 101 करोड़ से अधिक Views हैं। विवेक बिंद्रा, जो लोगों को धनपशु पूँजीवादी बनाकर छोड़ेगा, के चैनल पर 85 करोड़ से अधिक Views हैं। यही नहीं, माँ-बहन की गालियाँ देने वाले Carry Minati के 187 करोड़ Views हैं।
लेकिन Govardhan Math, Puri नामक चैनल के कुल Views हैं मात्र 2 करोड़ 56 लाख। Views मतलब चैनल के सभी वीडियो के Views का योग।

(गोवर्द्धन मठ, पुरी के चैनल की लिंक – https://www.youtube.com/c/GovardhanMathPuri )
 वहीं श्री अजय कर्मयोगी जी योगी जी जो धर्म संस्कृति गाय गांव गुरुकुल और अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र को सामने लाने का कार्य जान की बाजी लगा कर एक अद्वितिय अनुपम कार्य कर रहे हैं इस चैनल को कोई रैंकिंग ही नहीं है
https://m.youtube.com/c/9336919081gurukulam/featured
  इस देश में 100 करोड़ से भी ऊपर हिंदू हैं। 74 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं, जिसमें 39 करोड़ के पास Jio है। और, श्री विष्णु, ब्रह्माजी इत्यादि से भी अधिक कट्टर "हिंदूवादी" पार्टी BJP के 18 करोड़ सदस्य हैं।

कितने लोग "शंकराचार्य" शब्द को गूगल करते हैं? कितनों को सब मठों और आचार्यों के नाम याद है? आदि शंकराचार्य जी का जन्म कब हुआ यह पता है?
 कितने लोगों को पता है कि कश्मीर में शारदा सर्वज्ञ पीठ भी है
Google Trends पर देख लीजिए भारत में "Porn" और "Shankaracharya" दोनों कितना सर्च होता है।

देखिये, सीधा सा सूत्र है– जानाति इच्छति अथ करोति।

व्यक्ति पहले विषय का ज्ञान लेता है, फिर उसे उस विषय को प्राप्त करने की इच्छा होती है, उस इच्छा को पूर्ण करने के लिए वह व्यक्ति कर्म करता है।
जिसे धन ही धन का ज्ञान दिया जायेगा, वह धन के लिए अपने पिता की भी हत्या कर देगा। जिसे स्वर्ग के बारे में सिखाया जाएगा, वह स्वर्ग के लिए कठोर तपस्या भी कर लेगा। जन्नत और हूर की तालीम वाले बम बांधकर स्वयं को उड़ा लेते हैं, जबकि वे भी ऋषियों, राजर्षियों के ही वंशज हैं।
सोचिये! वे बम बांधकर उड़ने के लिए तैयार हैं।
लेकिन हम तो कहते हैं कि हमें नागरिकों से कोई युद्ध, कोई संघर्ष, कोई क्रांति, कोई आंदोलन नहीं चाहिए। कारण है कि यह सनातन धर्म की विधि नहीं कि प्रजा को संघर्ष में झोंके। इसके लिए शुद्ध वैदिक-स्मार्त आचरण वाले लोगों में भी जो श्रेष्ठ हैं, वे योद्धा पृथक् से होते हैं।
आप केवल वैचारिक रूप से धार्मिक अर्थात् धर्मनिष्ठ, शास्त्रनिष्ठ, परम्परावादी बनिये, इतना ही अपेक्षित है। यदि इतना भी ना कर सकें, तो स्वयं पतित मत होइए और दूसरों को भ्रमित मत कीजिये।
इसके लिए कम से कम मूलभूत जानकारी तो प्राप्त कीजिये। यदि आप अयोग्य हैं, तो अब अपने बच्चों को जानकारी के स्रोत और सनातन परम्परा से जोड़िए।
हर हर महादेव।
साभार : क्षितिज सोमानी
 
सच्चे संत-महात्मा वासना, कामना, ममता, आसक्ति एवं दर्प-अभिमानसे सर्वथा रहित होते हैं, इससे न तो उन्हें स्वयं अपने संतपनका स्मरण रहता है और न वे दूसरोंको ही इसकी स्मृति दिलाते हैं । अतः उनके द्वारा ऐसा कुछ कार्य होता ही नहीं, जिसमें संत कहलानेकी उनकी छिपी वासना भी हो । कहलाना वही चाहते हैं, जो हैं नहीं, जो हैं, वे तो हैं ही । अतएव इन सच्चे संत-महात्माओंका आदर्श सामने रखकर तुम सच्चे संत-महात्मा बनो ।

(‘कल्याण’ पत्रिका; वर्ष – ६६, संख्या – ६ : गीताप्रेस, गोरखपुर)
साभार ईश्वर त्रिपाठी जी


सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...