समाज निर्माण, व्यक्ति निर्माण, राष्ट्र निर्माण, संस्कार निर्माण -- यह तब भारत की भाषा नहीं है।ये सब अंग्रेजी के शब्दों की नकल है जो सर्वथा त्याज्यहै।
व्यक्ति का निर्माण परमेश्वर करता है और वह स्वयं उस जीवात्मा के पूर्व के कर्मों का फल होता है। स्वयं को ईश्वर मानकर व्यक्ति निर्माण का दावा करना तो नास्तिकता है। यद्यपि भारत में भारतीय भाषाओं में यह शब्द अज्ञान के कारण प्रयोग में आता है ,किसी दंभ के कारण नहीं।
संस्कार भी हर व्यक्ति के जन्म जन्मांतर के होते हैं ।
माता पिता और सामाजिक परिवेश तथा शिक्षा उनमें से श्रेष्ठ संस्कारों का पोषण करती है ,,उनको बल देती है ,आगे बढ़ने में सहयोग देती है।बस।
संस्कारों का भी निर्माण नहीं होता। केवल श्रेष्ठ संस्कारों का पोषण और अनुचित संस्कारों पर अंकुश ।
इतना ही हो सकता है ।
संस्कारों का निर्माण मनुष्य के बस का नहीं।
यह 18वीं शताब्दी के अंत और 19वीं शताब्दी के आरंभ में यांत्रिक भौतिकी के द्वारा विकसित शब्दों की समाज विज्ञान के क्षेत्र में की गई नकल है जो अब बासी हो चुकी है और विज्ञान की नई खोज इन सब धारणाओं को निरस्त कर चुकी हैं।
भारत की हिंदू धर्म और सनातन धर्म की तो यह भाषा है ही नहीं।
इसी प्रकार समाज का निर्माण अज्ञान से उपजा ईसाइयों का दम्भ है।
प्रत्येक व्यक्ति और संगठन स्वयं समाज का अंग है ।
वह समाज का निर्माण कैसे कर सकता है?
राष्ट्र का निर्माण तो भयंकर दर्प है।इसी दर्प से राष्ट्रपिता जैसी गंदी धारणा निकली।
हम राष्ट्र समाज और व्यक्ति में धर्म चेतना का धर्म भावना का धर्म बोध का और धर्म संस्कारों का पोषण कर सकते हैं और यह काम विद्या तथा आचरण के द्वारा होता है।
राष्ट्र निर्माण ,समाज निर्माण, व्यक्ति निर्माण ,संस्कार निर्माण आदि अनुचित दावे हैं और इनका भारत की चेतना से ,सनातन धर्म के ज्ञान से कोई संबंध नहीं है।
चाहे हम कांग्रेस और भाजपा या अन्य पार्टियों को धिक्कार कर कितना भी संतोषकर लो पर यह ज्वलंत सच्चाई है चाहे राजस्थान का जीरो पाने वाली लेक्चरर का मामला हो या चाहे BHU का एक मुस्लिम का इनका अपॉइंटमेंट कोई हवा में नहीं हुआ है यह सरकारी फॉर्मेलिटी और उसके मापदंड को पूर्ण करके ही इन्होंने यह पद हासिल किया है एक मुस्लिम, हिंदू धर्मशास्त्र का प्रोफ़ेसर बनकर आपको संध्या बंदन भी सिखाने का चमत्कार इस शिक्षा व्यवस्था से ही संभवहो रहा सब का केंद्र यह अंग्रेजी व्यवस्था ही है जिससे
जो भारत ज्ञान में रत देश आज वही भारत दुनिया का लेबर सप्लायर है और भारत की सबसे बड़ी समस्या प्रतिभा पलायन है आज वह शिक्षा पेट पालने के साधन बन चुकी है
शिक्षा लेकर भिक्षा मांगे की भाव से आज भारत पूरी दुनिया का लेबर सप्लायर बन गया है अब इस व्यवस्था का अंतिम परिणाम भी दिखने लगा है उस देश का पतन निश्चित है जब प्रतिभाओं का हनन होता है और हंस पर कौवा राज करते हैं तो यह बर्बादी का अंतिम चरण होगा अब एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान
अगर आपको पता चले कि जो टीचर आपके बच्चे को पढ़ा रहा है, खुद उसे, उसके अपने ही विषय़ में ज़ीरो नंबर मिला था तो आपको कैसा लगेगा? और अगर आपसे कोई ये कहे कि फिजिक्स जैसे जटिल विषय में भी कोई शून्य नंबर पाकर फिजिक्स का ही लेक्चरार बन सकता है तो आप शायद ही यकीन करें. जब हमने देखा कि तमाम लोग सोशल मीडिया पर ठीक ऐसा ही होने का दावा कर रहे हैं तो हमें भी यकीन नहीं हुआ.
सोशल मीडिया पर ये खबर खूब फैली हुई है कि राजस्थान में सविता मीणा नाम की एक लड़की फिजिक्स में तीन सौ में से 0.68 नंबर, यानि एक से भी कम नंबर लाकर लेक्चरार बन गयी है. यही नहीं, इन खबरों के मुताबिक, सविता सिर्फ फिजिक्स में ही शून्य नंबर नहीं लायी थी, बल्कि जनरल स्टडीज में भी उसे कुल सोलह नंबर आए थे. लोग न सिर्फ इस खबर को खूब शेयर कर रहे हैं, बल्कि इसपर चटखारे भी ले रहे हैं
अगर आपको पता चले कि जो टीचर आपके बच्चे को पढ़ा रहा है, खुद उसे, उसके अपने ही विषय़ में ज़ीरो नंबर मिला था तो आपको कैसा लगेगा? और अगर आपसे कोई ये कहे कि फिजिक्स जैसे जटिल विषय में भी कोई शून्य नंबर पाकर फिजिक्स का ही लेक्चरार बन सकता है तो आप शायद ही यकीन करें. जब हमने देखा कि तमाम लोग सोशल मीडिया पर ठीक ऐसा ही होने का दावा कर रहे हैं तो हमें भी यकीन नहीं हुआ.
सोशल मीडिया पर ये खबर खूब फैली हुई है कि राजस्थान में सविता मीणा नाम की एक लड़की फिजिक्स में तीन सौ में से 0.68 नंबर, यानि एक से भी कम नंबर लाकर लेक्चरार बन गयी है. यही नहीं, इन खबरों के मुताबिक, सविता सिर्फ फिजिक्स में ही शून्य नंबर नहीं लायी थी, बल्कि जनरल स्टडीज में भी उसे कुल सोलह नंबर आए थे. लोग न सिर्फ इस खबर को खूब शेयर कर रहे हैं, बल्कि इसपर चटखारे भी ले रहे हैं
