मंगलवार, 23 अप्रैल 2019

मनु महाराज का चित्र जो ईसाइयत को चुनौती देता हुआ फिलीपींस के नेशनल असेंबली के सामने


फिलीपींस , जिसको पन्द्रहवीं सदी में स्पेन और पोप ने नरसंहार का खेल खेलकर पूरा इसाई बना दिया था उसने भी अपने नेशनल असेंबली में मनु महराज की विशालकाय चित्र लगाया है । और स्पेन के मुँह पर जूता मारते हुए लिखा है कि मानवता को पहला न्याय दिलाने वाला महापुरूष ।

When the Philippines drafted its Constitution, it placed the statue of Manu (the progenitor and lawgiver of the human race) in the National Assembly Hall with this inscription on its base:

“The first, the greatest and the wisest law-giver of mankind.”

“मनु धर्म और न्याय के परमपिता है “

फ़िलीपींस तक मनु का सम्मान कर रहा है जो कि इसाई बन चुका हैं ।

क्यो ?

यह सवाल मैने एक फ़िलीपींस की महिला इतिहासकार से पूछा । वह कहती है कि उनके वहाँ मनु स्मृति को लेकर कोई दुराव 500 वर्ष बाद भी नहीं था । क्योकि फ़िलीपींस छोटा था और स्पेन को क़त्लेआम मचाने के लिए मूर्ति पूजकों का ही बस गला काटना था । मूर्तियाँ तोड़नी थी । मनुस्मृति विकृत नही कर पाए ।

मनु स्मृति का सम्मान आज भी उन सभी देशों ( वियतनाम फ़िलीपींस )में जहाँ अंग्रेज़ पूरी कॉलोनी नही बना पाए । आपके सामने तथ्य आ रहे हैं । मनु स्मृति की विकृति अंग्रेज़ों की देन है ।

मैं वियतनाम और फ़िलिपींस की जनता को साधुवाद देता हूँ जो आज भी मनु को सम्मान दे रही है । और उनपर थूकता हूँ जो मनु के अपमान पर चुप बैठे हुए हैं ।

सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...