संपूर्ण जगत में मानव निर्मित व्यवस्था को सुचारु संचालन के लिए दो रास्ते एक धर्म सता एक राजसत्ता आज पूरी दुनिया के हजारों साल की उस राज सत्ता की व्यवस्था करीब-करीब अंतिम सांसे ले रही हैं और धर्म सत्ता पर भी खतरे की घंटी बज रही है हजारों सालों से मूल धर्म सनातन (ब्राहमिक उपासक संस्कृति) को तहस नहस करने का के लिए कई बौद्धिक षड्यंत्र आज के नर पिशाचों (अब्राहमिक) यहूदी इस्लाम और इसाईयों द्वारा चलाये जा रहे हैं
15 September,2020 को US President Donald Trump, Israeli PM Benjamin Netanyahu, Bahrain Foreign Minister Abdullatif al-Zayani और UAE Foreign Minister Abdullah bin Zayed Al-Nahyan ने White House में Abraham Accords पर हस्ताक्षर किए थे।
■ इस संधि का नाम Abraham – अब्रह्म क्यों है?
वास्तव में अब्रह्म- Abraham को यहूदी,ईसाईयत और इस्लाम इन तीनों पंथों के जन्मदाता के रूप में देखा जाता है। इन तीनों ही पंथों की जड़ें अब्रह्म से जुड़ी है। इन तीनो पंथों में बहुत सारी वैचारिक समानताएँ है। इस संधि को अब्रह्मिक पंथों के बीच एकता स्थापित करने के लिए बनाया था अतः इसे Abraham Accords नाम दिया गया है।
आईये अब हम इस संधि पर विस्तृत अध्ययन करते हैं। इस संधि को करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? संधि से किसे लाभ होगा? किसे हानि होगी? इस संधि से भारत और विश्व पर क्या प्रभाव पड़ेंगे इत्यादि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा आरंभ करते हैं।
■ Arabs-Israel के बीच Normalization की आवश्यकता क्यों पड़ी?
ऐसे तो अरब और इज़राइल के बीच Normalization के ढेरों कारण है।
★ The Iran  Factor
● आपने वह कहावत सुनी होगी “दुश्मन का दुश्मन,दोस्त होता है” यह कहावत दो पुराने दुश्मन अरब और इज़रायल को करीब लेकर आई है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में Iran की महत्वाकांक्षाएँ काफी बढ़ रही है। ईरान Saudi Arabia को हटाकर स्वंय Islamic World का Leader बनना चाहता है। इसके लिए वो Middle East में Proxy Wars करवा रहा है, कभी Arab विरोधी आतंकी गुटों को समर्थन कर रहा है।
● पिछले वर्ष Iran ने सऊदी अरब के सबसे बड़े Oil Plant Abqaiq-Khurais में Drones के जरिए हमला किया था। इस हमले ने अरब देशों की सैन्य शक्ति और Technological Matters में पिछड़ेपन को Expose कर दिया था। अरब देशों को समझ में आ गया है कि अपनी संप्रभुता बनाए रखने और ईरान से लड़ने के लिए उन्हें एक मजबूत साथी की आवश्यकता है, और उन्हें साथी के तौर पर Israel मिल गया। इज़राइल Defence, Arms and Technology के मामलो में विश्व मे शीर्ष देशो में गिना जाता है।
★ Fear of Arab Spring 2.0
● Middle East-North Africa में सन 2011 में हुए Arab Spring के आंदोलनों ने पूरे Arab World को हिलाकर रख दिया था। लोकतंत्र और मानव अधिकारों को लेकर शुरू हुए Arab Spring की वजह से Tunisia, Egypt में सत्ता परिवर्तन हुआ तो वही Syria अंतहीन गृहयुद्ध की चपेट में आ गया। उस समय सऊदी अरब, बहरीन,क़तर,UAE में मानव अधिकारो और लोकतंत्र के लिए हिंसक प्रदर्शन हुए थे लेकिन इन देशों ने इन प्रदर्शनों को अमेरिका के आशीर्वाद से बल प्रयोग करके दबा दिया था और अपनी बादशाहत को बचाने में सफल हुए थे।
● Middle East के देशों को डर है अपने देशो में राजशाही व्यवस्था को चुनौती देने के लिए कि कहीं फिर से Arab Spring जैसा कोई आंदोलन खड़ा न हो जाए। Human Rights Violations में Middle East के देश अव्वल नंबर पर आते है बावजूद इसके EU और US स्थित एक भी Human Rights Organization Middle East के देशों के खिलाफ नही बोलता क्योंकि Arab देशो को America और European Union का भारी समर्थन प्राप्त है। अतः अरब देशों को अपनी Monarchies को बचाने के लिए USA-Israel के करीब आना पड़ रहा है। ये उनकी मजबूरी भी है। ये बात जगजाहिर है कि अरब देशों की बादशाहत अमेरिका के आशीर्वाद के कारण ही बची हुई है। अगर अरब देश अमेरिका के विरूद्ध जाते हैं तो Mossad-CIA FALSE FLAG OPERATIONS के जरिए अरब देशों में आसानी से तख़्तापलट करवाकर , वहाँ अपनी Puppet Government Establish कर सकते हैं। ये सीधे तौर पर BLACKMAILING है। अब्रह्म सन्धि के पीछे यह भी एक बड़ा कारण है।
★ Diversification of Economy
● Middle East के लगभग सभी देश अपनी आय के लिए सिर्फ Petroleum Oil and Natural Gas से होंनेवाली Income पर ही आधारित है। Corona Pandemic के कारण दुनिया भर में Oil-Gas की Demand में भारी गिरावट आई है। जिससे अरब देशों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। अरब देशों ने अपने देशों में Human Resources,Education, Science and Technology, Engineering को Develop करने में किसी भी प्रकार का निवेश नहीं किया। अरब देश टेक्नोलॉजी के लिए US-EU और Labours के लिए India-Pakistan-Bangladesh पर निर्भर रहे। अरब देशों के राजाओं ने अपनी स्थानीय जनता को तेल गेस की कमाई से आलसी, कामचोर,हवसी, अय्याश बनाया और खुद भी Luxurious Lifestyle जीते रहे। लेकिन कोरोना वायरस ने अरब देशों की हेकड़ी निकालकर रख दी है।
● Arabs को अब समझ में आ गया है कि अर्थव्यवस्था सिर्फ Oil-Gas से मिलनेवाली Revenues के भरोसे नही चल सकती। इसके लिए अर्थव्यवस्था का वैविध्यपूर्ण/ Diversify करना आवश्यक है अन्यथा अरब देश भिखारी बन जाएंगे। छोटा सा देश होने के बावजूद Israel विश्व में Science and Technology, Agriculture Technology, Medical Treatment, Defence System, Arms and Weapons,Tourism के क्षेत्रों ने शीर्ष स्थान रखता है। अरब देशों को अपने Survival के लिए Israeli Technology, Knowledge, Assistant की अत्यंत आवश्यकता है इसीलिए अरब देश अर्थव्यवस्था को Diversify करने के लिए भी Arabs-Israel एक साथ आ गए हैं।द
■ Abraham Accords से Arabs को होनेवाले लाभ
i) अरब देशों को Oil-Gas पर अपनी निर्भरता कम करनी है। इसके लिए उन्हें Science and Technology, Agriculture,Tourism, Health Sector में एक विशेषज्ञ की आवश्यकता है। Israel उपरोक्त सभी मामलों में विशेषज्ञता रखता है। अतः Arabs-Israel के साथ आने से Arabs अपनी Economies Diversify कर पाएँगे।ग
ii) अमेरिका भी खुलकर Arabs का साथ देगा क्योंकि फ़िलहाल Arabs देशों का Boycott US को रास नही आ रहा था। इस संधि से US-Israel-Arab Nexus बनेगा जिससे Turkey और Iran जैसे देशों को स्पष्ट संदेश जाएगा।
■ Abraham Accords से Israel को होनेवाले लाभ
i) वैश्विक स्तर पर Israel की स्वीकृति बढ़ेंगी क्योंकि अब तक Israel अपने ही पड़ोस में तिरस्कृत था, उसकी कोई स्वीकृति नही थी। कई मुस्लिम देश अपने पासपोर्ट पर “This passport is valid for all countries of the world except Israel.” लिखा करते थे। जिससे इज़राइल की छवि धूमिल होती थी लेकिन इस संधि से इजराइल की छवि में सकारात्मक सुधार होगा। जिससे उसे काफी लाभ होगा।
ii) Israel की Defence, Science & Technology, Arms- Weapons Industry, Healthcare, Tourism, Agriculture Technology अरबो डॉलर्स की है। इस संधि के बाद से अरब देशों और इज़राइल के नागरिकों के बीच व्यापारिक संबंध स्थापित होंगे। जिससे इज़रायली अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही में Israel अरब देशों को अपनी टेक्नोलॉजी बेचकर भारी भरकम मुनाफ़ा कमा सकता है। इसी के साथ वर्षो से इज़राइल के खिलाफ चला रहा BDS Movement भी समाप्त होगा।
■ Palestinians को Abraham Accords से होनेवाले नुकसान
● इस संधि से फिलिस्तीन को कोई लाभ नही होगा अपितु उसे केवल नुकसान ही होगा। इस Deal से Arabs की Israel पर निर्भरता बढ़ेगी और अरब अपनी मजबूरियों के चलते खुलकर Anti Israel Stand नही ले पाएंगे। अतः Arabs की तरफ से फिलिस्तीनियों को कोई विशेष सहायता या समर्थन अब नही मिलेगा।
● Hamas-Turkey-Iran-Hezbollah ने Abraham Accords का विरोध किया है और Arabs – Israelis को इस Deal के लिए नुकसान उठाने की भी धमकी दी है अतः अब Israel और Arab देशो में Iran backed Proxies के हमले बढ़ेंगे लेकिन इससे Iran और उसकी Proxies को ही नुकसान होगा।
● इजराइल और पैलेस्टाइन का Two State Solution फ़िलहाल का मुद्दा फिलहाल चर्चा में रहेगा लेकिन समय के साथ Israel धीरे धीरे Palestine को Annex कर ही लेगा। अरब देश भी कुछ नहीं कर पाएंगे।
■ ये कथित Peace Deal कहीं Middle East और Arab World के लिए Piece Deal तो नहीं?
● Divide and Rule, Use and Throw, Back Stabbing करने में Israel- USA काफी बदनाम रहे हैं। MENA Affairs में गहराई से देखें तो लगता है कि ये समझौता लंबे अंतराल में अरब देशों में आपसी फूट डलवाकर उनका Balkanization ही करवाएगा। Israeli कभी ये नही चाहेंगे कि Arabs सशक्त बने क्योंकि ऐसा होने पर Israel को ही नुकसान होगा। अरब देशों के लिए ये एक प्रकार से Trojan Horse वाली परिस्थिति होगी। अपने लाभ के लिए Israel-US अरबो के बीच आपसी मतभेदों को बढ़ाकर उनमे फूट डलवा सकते है, Muslim World में Shia vs Sunni करवाकर Islamic World को Control करने की कोशिश कर सकते हैं। क्योंकि Arab-Israeli स्वार्थ के कारण एकदूसरे के साथ आ रहे है जिस दिन स्वार्थ और आवश्यकता खत्म हो जाएगी उस दिन इनकी दोस्ती भी दम तोड़ देगी। ध्यान से देखने पर पता चलता है कि यह Abraham Accords Plan Yinon और Ralph Peters के Plan का अमलीकरण ही है। अनेवाले समय मे आपको Middle East में कई अलगववादी आंदोलन देखने को मिल सकते है जैसे कि Kurdistan, South Yemen,Iranian Balochistan और अन्य
■ Abraham Accords से Turkey और Iran को होंनेवाले नुकसान
● Turkey- Iran दोनों ने अब्रह्म संधि का खुलकर कड़े शब्दों में विरोध किया था। दोनो ही देश अति महत्वाकांक्षी बन रहे हैं। दोनो को ही Muslim World का नेता बनना है। लेकिन दोनों देशों का यह Aggression ही उनके लिए नुकसानदेह साबित होगा। Iran- Turkey दोनो ही Proxies के जरिए Middle East North Africa में अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं। इसके लिए वे आतंकी संगठनों को हथियार, पैसा और Logistics उपलब्ध करवा रहे हैं।
● तुर्की के Anti US, Anti NATO, Anti Israel Stand को रोकने के लिए अमेरिका जब चाहे तब Turkey को FATF में Black List करवा सकता है, World Bank, IMF से तुर्की को मिलनेवाली सहायता रुकवा सकता है। Turkey-Iran से अलगववादी Kurdistan आंदोलन को हवा दे सकता है। Economic Sanctions, Embargo का उपयोग करके Turkey और Iran दोनो की अर्थव्यवस्थाओ को तबाह कर सकता है। बहरहाल Iran पहले से ही FATF में BLACK LISTED है और उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। अतः Turkey-Iran के Aggression से चिंता की कोई बात नहीं है। ये देश अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं।
■ Abraham Accords से Muslim Ummah (उम्मत-ए-मुस्लिमा) में विभाजन
● इस संधि से Islam को भारी नुकसान होगा। अब्रह्म सन्धि से इस्लाम कमजोर होगा। अब्रह्म संधि से Islamic Ummah की डींगे हाँकनेवालो की पोल खुल गई है। ये बात साबित हो चुकी है कि Ummat जैसा कुछ भी नहीं होता। इस Deal की वजह से Shia- Sunni में पहले से मौजूद दरार और बढ़ेगी। Muslim World में Shia Bloc और Sunni Bloc बनेंगे। MENA Region में Sectarian Violence बढ़ेगा। वहाँ पर Sects के नाम पर अलग देशो की मांगे उठेंगी। यही Israeli-US नीति है Divide and Rule.
■ Abraham Deal से भारत को होनेवाले लाभ
● इस Peace Deal से भारत को Directly कोई लाभ नहीं होंगे। लेकिन भारतवर्ष को Indirectly बहुत लाभ होंगे। सही मायनों में Israel-US के बाद सर्वाधिक लाभ भारत को ही होगा। भारत लंबे समय से Islamic Terrorism, Islamic Extremism से जूझ रहा है। इसकी जड़ें Middle East, ईरान और तुर्की से जुड़ी है। अतः जब स्वयं मिडल ईस्ट के देश अस्थिर होंगे। इनमे फूट पड़ेगी, इनका Balkanization होगा तब उनके द्वारा भारत मे Islamic Terrorism को होंनेवाली Funding कम होने लगेगी। Islamic Extremism भी समय के साथ कम होने लगेगा। वैसे भी अरब इज़राइल की दोस्ती से Muslims के बीच Identity Crisis खुलकर सामने आ गया है। इसका Long Term में गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ेगा।
सोमवार, 28 सितंबर 2020
USA के ह्वाइट हाउस मे अब्रह्मिक पंथों के बीच एकता स्थापित करने के Abraham Accords संधि
सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...
-
यह करवा रहे हैं वैज्ञानिक जो कभी इन जानवरों ने भी करना नहीं चाहा, #भगवान बनना चाहता है #इंसान।। यह सिंह (टाइगर) और बब्बर शेर का वर्ण स...
-
गलती होने पर कान क्यों पकड़ते हैं गौतम, वसिष्ठ, आपस्तंब धर्मसूत्रों और पाराशर स्मृति सहित अन्य ग्रंथों में ज्ञान की कई बातें बताई गई हैं। इन ...
-
शिष्य गुरु का चयन नहीं करता अपितु गुरु शिष्य का चयन स्वयं करता हैं। शिष्य अपने अंदर स्वार्थ लेकर गुरु ढूंढेगा तो उसे केवल कालनेमि गुरु म...
