गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

जन सामान्य का क रोना का इलाज और बेन्टीलेटर सब फ्री जिन्होंने लूटा है उन्हें लुटवाने दें





🙏🏻 *तथाकथित कोरोना से मुक्त बनाये ये उपाय*
हमारी मजबुत रोग प्रतिरोधक क्षमता हमे कोरोना से बचाती है।  इस काढ़े का सेवन करे व अन्य लोगो से भी साझा करे ।
हल्दी 100 ग्राम
सौंठ 50 ग्राम
कालीमिर्च 10 ग्राम
गीलोय 200 ग्राम
कालमेध   100 ग्राम၊              चिरायता 50 ग्राम      कुटकी 50 ग्राम   पारिजात 50 ग्राम
सभी चीजो को साफ करके चूरन बनां लिजिए आैर मिक्स कर दिजिए  । दो गिलास पानी मे एक चम्मच चूर्ण लेकर धीमी आंच पर काढ़ा बनाए जब आधा गिलास पानी बचे तब ठंडा होने पर खाली पेट सुबह सेवन करे । https://youtu.be/DqMPeeXUJ3E

कृपया इस संकट की घड़ी मे ऐसी जानकारी को  सभी तक पहुंचाने की सेवा जरूर करे ।
अब एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान  
*इस वक्त सिर्फ एक चीज जो आपके घर और हॉस्पिटल में अंतर पैदा कर रही है, वो 'वेंटिलेटर' है..*
बाकी आपके पास दवाइयों की जानकारी/लिस्ट है, होम आइसोलेशन गाइड है, डॉक्टर्स भी किसी ना किसी संपर्क से फोन पर अवेलबल हो जाते होंगे, लेकिन बस वो वेंटिलेटर ही है, जो अभी तक घरों में मौजूद नहीं है।
उस वेंटीलेटर की आपको कभी जरूरत ही नही पड़ेगी अगर आप एक्सटर्नल सेनिटाइजर के साथ-साथ 'इंटर्नल सेनिटाइजर' भी इस्तेमाल करें। ये सेनिटाइजर है 'अजवायन के पानी की भाप' लेना और ये भाप मुहँ से अंदर लेनी है। अजवाइन के पानी की भाप आपके फेफड़ों के लिए सेनिटाइजर का काम करती है। ये भाप ना केवल ऑक्सीजन का लेवल बढ़ाती है बल्कि इससे हमारी बॉडी ब्लॉट भी नहीं करती। इसके अलावा ऑक्सीजन का लेवल बॉडी में बनाये रखने के लिए हमें ठीक मात्रा में पानी भी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर में इसकी कमी नहीं हो।

इसके अतिरिक्त एक चीज और कर लें - हम सबने ABCD पढ़ी ही होगी। कोविड की इस स्ट्रेन में हम उसमें से A हटा दें और सिर्फ BCD का ध्यान रख लें। विटामिन B हरी सब्जियों और मौसमी फल में मिल जाएगा। विटामिन C खट्टी चीजों - नींबू, संतरा, अंगूर, टमाटर में मिल जाएगा और विटामिन D सुबह की धूप में 10 मिनट की एक वॉक से मिल जाएगा।

अब अगर हम एक मौसमी फल, एक नींबू पानी का गिलास, 10 मिनट की छत पर एक वॉक और अजवाइन के पानी की भाप ले रहे हैं तो कोविड हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

हॉस्पिटल और घर के बीच जो वेंटिलेटर आ रहा है उसे ऊपर बताए तरीकों से मार कर हम स्वस्थ्य रह सकते हैं। बाकी मास्क, सेनेटाइजर और वैक्सीन अति-आवश्यक है। उसे तो बिल्कुल भी नहीं भूलना है।

चाहे इस विश्व के कण कण में hospital खोल दो , चाहे हर मनुष्य क्या , हर जीव के कोख से Doctor पैदा करवा दो ,
चाहे दवाईयों के पेड़ या फसल ही बोने लग जाओ , तब भी सब बीमारियों से मरते ही रहेंगे ।
क्यों ????
क्योंकि
*काहु न कोउ सुख दुख कर दाता ।*
*निज कृत कर्म भोग सब भ्राता ।।*
जब तक हमारे खान पान की शैली , खाद्य अखाद्य की मर्यादा , नियम संयम की ऐसी तैसी रहेगी तब तक हम लोग मरते रहेंगे ।
इस विश्व के शारीरिक रोग का एकमात्र कारण यह छोटी सी मांसल जीभ है ।
इसी जीभ के स्वाद के लिए लोगों ने भोजन के नियम संयम , आचार , व्यवहार सब खत्म कर दिया और आज hospital में doctors के पैरों पर नाक रगड़कर गिड़गिड़ा रहे हैं।
चिल्ला रहे हैं हॉस्पिटल hospital कर के ।
जब बोला जाता है कि अपने शरीर में कुछ भी कूड़ा कर्कट मत डालो , तो सब गुस्से से सामने वाले को देखते हैं । असंयमित खाना , असंयमित पीना , बाहर का चाटना , घर घर अशुद्धता शुद्धता का विचार किये चाटना , पैकेट बन्द सामग्रियों को खाना , pesticides, insecticides, रासायनिक उर्वरक खा खा कर रक्त, धमनियों और dna तक भरना , पानी को इतना फ़िल्टर कर लेना कि उसमें से सब minerals और essentials nutrients निकाल कर पीना , सुबह सवेरे शाम दोपहर रात जब चाहे तब मुँह चलाना , कोई समय नहीं , कोई नियम नहीं कि कब खाना , क्या खाना , कितना खाना , कैसे खाना , क्यों खाना ।
बस भगवान ने मुँह दे दिया तो उसमें कुछ भी कभी भी कैसे भी डाल लो ।
ठंड़ीयों तक में गधे लोगों को मैंने आम खाते देखा है और Ice Cream खाते देखा है । उनके चेहरे पर दर्प भाव रहता है कि वो ऐसा फल खा रहे हैं जो उपलब्ध नहीं है ।
लेकिन उन मूर्खाधिराजों को यही नहीं पता कि यही दर्प भाव हॉस्पिटल और doctors लाखों का तुमसे लूट कर तुम्हे जीवन भर रोगी बनाकर तोड़ेंगे ।
जब बोला जाता है कि Maid से सब काम करवा लो लेकिन भोजन स्वयं बनाओ तो उसमें नारी सशक्तिकरण घुस कर और आधुनिकता का हवाला देकर hospital में एक bed book करवा लेते हैं।
मर जायेंगे , आह माई आह माई करते रहेंगे लेकिन भोजन maid ही बनाएगी जिसका पता नहीं किस विचार , कौन से तरंगों से , कौन से energy लेवल से , कौन से भावना डालकर , किज शुद्धता से वह भोजन तैयार करेगी या करेगा ।
बस लोलुप जीभ को स्वाद मिलना चाहिए और मोटी चमड़ी को आराम ।
भले ही इससे पूरा परिवार का स्वास्थ्य हाशिये पर ही क्यों न आ जाये ।
Sauce, बंद buiscuits , नमकीन , cold drinks , पिज़्ज़ा , burger , गंदे बासी canned juices सबके घर में पड़े होंगे और लैपटॉप पर काम करते भक्षण चलता रहेगा  लेकिन अजवाईन , हरड़ , सौंफ , मेथी दाना , पीपली , गोंद, इत्यादि शायद ही कोई महीने में खाता हो ।
यह सब खाने में सबकी नानी मर जाती है लेकिन नानी के साथ साथ यह भी जल्दी hospital के bed पर मरे पाए जाते हैं।
ग़लत काम करेंगे सब खुद लेकिन चिल्लायेंगे Hospital और Doctors को।
जिस दिन इस जीभ को संयमित कर लिया तो उसी दिन समझिये कि आप स्वस्थ्य होते चले जायेंगे ।
जिस दिन अपने kitchen या रसोई को शरीर के मंदिर के तौर पर बनाकर उस रसोई घर को घर का एक औषधालय बना लेंगे तो उसी दिन से आप स्वस्थ्य होते जाएंगे ।
जिस दिन आपकी रसोई में आपके घर की स्त्रियों के अलावा किसी अन्य का प्रवेश वर्जित होगा , उसी दिन से आपका Hospitals और Doctors से नाता टूटने लगेगा ।
जिस दिन आपने यह व्रत ले लिया कि मुझे बाहर का नहीं खाना और सबके घर घर का नहीं चाटना , उसी दिन से आपके घर से रोग अपनी गठरी बांधने लगेंगे ।
बहुत ही आवश्यक हो तभी इस व्रत या नियम को तोड़े ।
जिस दिन आपने यह व्रत ले लिया कि मुझे एकमात्र मौसमी फल और सब्जियों का ही सेवन करना है , ठीक उसी दिन से वैभव और लक्ष्मी अपना बोरिया बिस्तर लेकर आपके घर में ठिकाना बनाने आ जाएंगी ।
और एक अन्य महत्वपूर्ण बात
*तन को बली बना लो ऐसा , सह ले सर्दी वर्षा घाम ।*
*मन को बलि बना लो ऐसा , टेक न छाड़े आठों याम ।।*
मन को ऐसा बलिष्ठ बना लो कि कोई तुम्हें अपने नियम से डिगा न सके ।
ऐसा नहीं कि यार दोस्तों ने कहा दिया तो तुम भी अपने घर का संस्कार भुलाकर पीने और मांस सेवन करने लगे ।
मतलब तुम्हारे माँ बाप का संस्कार इतना गिरा था कि अन्य दोस्तों के संस्कार उस पर हावी हो गए ।
तुम इतने कमजोर निकले कि उनकी गलत बातें तुमने ग्रहण कर ली लेकिन अपनी अच्छी बातों या आदतों का प्रभाव तुम उन पर नहीं डाल सके । धिक्कार है तुम्हें ।
तो तुम उनके गुलाम हो।
मैं बार बार कहता रहूँगा कि जिस दिन तुमने अपने रहन सहन , आचार , विचार , खान पान , नियम संयम को संयमित एवं नियमित कर लिया , उसी दिन से सब ठीक हो जाएगा ।
वरना तो हॉस्पिटल और डॉक्टर भले ही कोई अपने दोनों जेब में लेकर घूमो या अपने नौ द्वार स्थान में ही घुसेड़ कर क्यों न रखे , वह मरेगा और रोगों से ही मरेगा । कोरोना ही नहीं कोरोना से भी बड़ी बड़ी बीमारियों से मरेगा ।
फिर एक बार सुन लो समझ लो


सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...