सोमवार, 13 जून 2022

किडनी में स्टोन केल्सियम से एक भ्रांति

  




एक हैं मलिक साहब। हमारे साथ पढ़ते थे पंतनगर विश्वविद्यालय में। अविभाजित उत्तर प्रदेश के सबसे खूबसूरत शहर से थे, जहाँ कालान्तर में हमने अपनी ज़िन्दगी के 8 साल 8 महीने और 18 दिन बड़ी शान से गुजारे। जी हाँ, दून वैली। पहाड़ों की रानी मसूरी से मात्र 35 किलोमीटर दूर।
उनकी बस एक ही समस्या थी। भाई पथरी हो गी रे।
अरे मलिक साहब कैसे हो गई?
भाई वो देहरादून का पाणी है ना, बोहोत हार्ड है, ससुरे में कैल्शियम बोहोत है। जिब पाणी मै कैल्शियम जादै हो तो पथरी हो जा।
कम-ओ-बेश यही ख़यालात ज्यादातर लोगों के होते हैं। तो ऐसी ग़लतफ़हमी पाले सभी भाई-बहन आज ही यह ग़लतफ़हमी दिमाग से निकाल दें कि पानी के कैल्शियम का आपके किड़नी में बनने वाली पथरी से कोई सम्बन्ध है।
कोई सम्बन्ध नहीं है। अगर ऐसा होता तो सारे गढ़वालियों और कुमाउनियों और हिमाचलियों और कश्मीरियों को गुर्दे की पथरी हो चुकी होती। ऐसा है क्या?
नहीं है।
वास्तव में पानी का कैल्शियम इसके लिए जिम्मेदार है ही नहीं। जिम्मेदार हैं आप स्वयं। जो पानी पीते ही नहीं। अगर आप दिन में 10 गिलास अर्थात साढ़े तीन लीटर से कम पानी पीयेंगे तो आपको प्रसाद में पत्थर ही मिलेंगे। फिर घूमते रहना किडनी हॉस्पिटल के चक्कर काटते।
किडनी स्टोन के लिए मूलतः जिम्मेदार है पानी का कम पीया जाना। सोने में सुहागा तब हो जाता है जब आप प्रोटीन खाते हैं ज्यादा और पानी पीते हैं कम। तो यूरिक एसिड बनता है खूब और पानी ना पीने के कारण बाहर वह निकल नहीं पाता और निर्माण करता है किडनी स्टोन का।
किडनी में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होने से किडनी के वातावरण की पीएच हो जाती है कम और पीएच कम होते ही किडनी स्टोन बनने लगते हैं।
अब बात करते हैं दूसरे सगूफ़े की।
डॉक्टर के पास जाओ, हर दूसरे तीसरे मरीज को बोलेगा कि खून में कैल्शियम और विटामिन डी की जाँच कराओ और ज्यादातर लैब रिपोर्ट में कैल्शियम और विटामिन डी बताया जाता है कि कम है।
अब डॉक्टर लिख देता है कि कैल्शियम की गोली खाओ और विटामिन डी के कैप्सूल खाओ या ज्यादातर केस में कहता है कि विटामिन डी का टीका लगवाओ। और बस खेल चालू।
कैल्शियम की गोली खिलवाने लगता है और जोर देता है कि विटामिन डी का टीका लिया जाए। सात हज़ार रूपये का आता है। खुले बाजार में भी नहीं बिकता। कुछ खास कंपनियों के रिप्रेजेंटेटिव से ही खरीदना पड़ता है। बस डॉ साहब के मोबाइल की क़िस्त का तो इंतज़ाम हो गया। अब साल भर तक क़िस्त आप भरना डॉ साहब के मोबाइल की।
फिर साल भर बाद किडनी हस्पताल के डॉक्टर की नई गाड़ी की क़िस्त आप ही भरेंगे। उस पट्ठे ने अपना भी जुगाड़ कर लिया और अपने दोस्त का भी।
एक दिन में 800 इंटरनेशनल यूनिट विटामिन डी और 800 से 1200 मिलीग्राम कैल्शियम से ज्यादा खाओगे तो मोबाइल और गाड़ी दोनों की क़िस्तें आप ही भरेंगे।
कितने डॉक्टर हैं जो कैल्शियम और विटामिन डी चालू करने के बाद समय समय पर इन दोनों की आपके खून में जाँच करवाते हैं?
अगर कोई भला डॉक्टर करने की सिफारिश करता भी है तो आप सुपर डॉक्टर बन जाते हैं और सोचते हैं कि अभी तो जाँच करवाई थी। बार बार क्या करवाना!! ये डॉक्टर तो जाँच वाचं लिखते ही रहते हैं।
अरे भाई अगर खून में कैल्सियम का स्तर बढ़ गया तो किडनी स्टोन हो जायेगा। चलो कोई बात नहीं। तुड़वा लेना पत्थर......डॉक्टर से। डॉक्टर को भी जीने का अधिकार है कि नहीं!!!!
इसके अलावा दो हॉर्मोन और हैं। एक है कैल्सीटोनिन और दूसरा है पैराथाइरॉइड हॉर्मोन। इन दोनों में से कोई भी रूठ जाये तो बस खामियाज़ा आपको भुगतना पड़ता है। इन दोनों का काम है ब्लड प्लाज्मा में कैल्शियम के संतुलन को बनाए रखना।
जैसे ही खून में आयोनाइज़्ड कैल्शियम का स्तर एक निश्चित बिंदु से ऊपर जाता है तो थाइरोइड ग्रंथि से कैल्सीटोनिन आकर उसे नार्मल कर देता है और अगर यह स्तर नीचे गिर जाए तो पैराथाइरॉइड ग्रंथि से पैराथाइरॉइड हॉर्मोन आकर इसे बढ़ा देता है।
अगर थाइरोइड ग्रंथि या पैराथाइरॉइड ग्रंथि ठीक से काम ना कर रही हों तो आप समझ सकते है कि कैल्सीटोनिन और पैराथाइरॉइड हॉर्मोन की उपलब्धता प्रभावित होगी जो फाइनली किड़नी स्टोन को जन्म दे सकती है।
आप सोच रहे होंगे कि पैराथाइरॉइड हॉर्मोन कोई जादुगर है। ब्लड प्लाज्मा में आयोनाइज़्ड कैल्शियम कम हुआ तो ये पैराथाइरॉइड हॉर्मोन जादू की छड़ी घुमाएगा और कैल्शियम पैदा।
नहीं ऐसा नहीं है। है वैसे जादू ही, भगवान् का जादू।
कैसे?
यह पैराथाइरॉइड हॉर्मोन आँतों से कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ा देता है। बहुत लंबी प्रक्रिया है इसकी। किसी और पोस्ट में बताऊंगा। आप बस अभी इतना समझ लो कि अगर थाइरोइड ग्रंथि से कैल्सीटोनिन ना आये तो ब्लड प्लाज्मा में कैल्शियम का स्तर खतरनाक तऱीके से बढ़ जाता है। जो किड़नी स्टोन को जन्म देता है।
और अगर पैराथाइरॉइड ग्रंथि से ज्यादा पैराथाइरॉइड हॉर्मोन आ जाये तो?
तो भी वही होगा। ब्लड प्लाज्मा में आयोनाइज़्ड कैल्शियम बढ़ जायेगा। जो किड़नी स्टोन को जन्म देगा।
पैराथाइरॉइड हॉर्मोन कब ज्यादा आएगा?
अगर पैराथाइरॉइड ग्रंथि किसी ट्यूमर आदि की वजह से हायपरएक्टिव हो गई है तो पैराथाइरॉइड हॉर्मोन का उत्पादन ज्यादा होगा।
कैल्शियम मेटाबोलिज्म इतना आसान नहीं है बाबु मोशाय!!!!
और हाँ.......आर ओ वार ओ का चक्कर छोड़ो, मस्त होकर पानी पीयो, पानी में कैल्शियम ज्यादा हो या कम। टेंशन नक्को। हार्ड वाटर से पथरी नहीं होगी। होगी तो वाटर ना पीने से। बस रंगीन् पानी से बचो। रंगीन पानी बोले तो वही पोंटी चड्ढा और विजय माल्या वाला। किड़नी स्टोन हो ही जाये तो मुझसे संपर्क कर लेना।    

सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...