बुधवार, 25 दिसंबर 2013

कच्चे प्याज के कुछ स्वास्थ्य लाभ
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एनीमिया ठीक करे-
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प्याज काटते वक्त आंखों से आंसू टपकते हैं,
ऐसा प्याज में मौजूद सल्फर की वजह से होता है
जो नाक के दृारा शरीर में प्रेवश करता है। इस
सल्फर में एक तेल मौजूद होता है
जो कि एनीमिया को ठीक करने में सहायक
होता है। खाना पकाते वक्त यही सल्फर जल
जाता है, तो ऐसे में कच्चा प्याज खाइये।

कब्ज दूर करे-
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इसमें मौजूद रेशा पेट के अंदर के चिपके हुए भोजन
को निकालता है जिससे पेट साफ हो जाता है,
तो यदि आपको कब्ज की शिकायत है
तो कच्चा प्याज खाना शुरु कर दीजिये।

गले की खराश मिटाए-
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यदि आप सर्दी, कफ या खराश से पीडित हैं
तो आप ताजे प्याज का रस पीजिये। इमसें गुड
या फिर शहद मिलाया जा सकता है।

ब्लीडिंग समस्या दूर करे-
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नाक से खून बह रहा हो तो कच्चा प्याज काट
कर सूघ लीजिये। इसके अलावा यदि पाइल्स
की समस्या हो तो सफेद प्याज खाना शुरु कर दें।

मधुमेह करे कंट्रोल-
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यदि प्याज को कच्चा खाया जाए तो यह शरीर
में इंसुलिन उत्पन्न करेगा, तो यदि आप
डायबिटिक हैं तो इसे सलाद में खाना शुरु कर दें।

दिल की सुरक्षा-
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कच्चा प्याज हाई ब्लड प्रेशर को नार्मल करता है
और बंद खून की धमनियों को खोलता है जिससे
दिल की कोई बीमारी नहीं होती।

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करे-
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इसमें मिथाइल सल्फाइड और अमीनो एसिड
होता है जो कि खराब कोलेस्ट्रॉल को घटा कर
अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाता है।

कैंसर सेल की ग्रोथ रोके-
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प्याज में सल्फर तत्व अधिक होते हैं। सल्फर शरीर
को पेट, कोलोन, ब्रेस्ट, फेफडे और प्रोस्टेट कैंसर से
बचाता है। साथ ही यह मूत्र पथ संक्रमण
की समस्या को भी खत्म करता है।

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

हम राजीव भाई समर्थको के लिए यह विडियो ही बहुत है केजरीवाल को समर्थन करने का मित्रो मैं आपको उस विडियो का लिंक दे रहा हूँ जो 14-Nov-2010 का है जब राजीव भाई जीवित थे और इसके 15 दिन बाद उनका देहांत हुआ था दिल्ली के जंतर मंतर पर रामदेव जी, अन्ना हजारे और केजरीवाल साथ साथ मंच पर थे पर राजीव भाई नहीं थे, क्यों ? क्योंकि राजीव भाई ने स्वामीजी को छत्तीसगढ़ का प्रवास छोड़ कर केजरीवाल के साथ मंच साँझा करने से मना कर दिया था? क्योंकि उन्हें पता था की आज जो रूप केजरीवाल का है उसको वो पहले से जानते थे अगर राजीव भाई जीवित होते तो केजरीवाल केजरीवाल नहीं होता इसलिए राजीव समर्थक इस भ्रम को दिमाग से निकल दें की राजीव भाई होते तो केजरीवाल उनके साथ होताhttp://www.youtube.com/watch?v=A9oJMewaoMM राजीव भाई ने NGO की व्याख्या कितनी बढ़िया तरीके से की है उनका कहना है जो NGO सरकारी या विदेशी पैसे लेकर काम करते हैं उनपर कभी भरोसा नहीं करना, इसको लेकर कार्यकर्ता भी भ्रमित हो जाते हैं उनको लगता है बहुत बढ़िया देशभक्ति का काम कर रहे हैं ये NGO और फिर उनके एजेंट बन जाते हैं | *अगर कोई NGO विदेशी पैसे लेकर काम करेगा तो वो सिर्फ वोही मुद्दे उठाएगा जो विदेशी हित में हो, ये लोग कभी भी ऐसे मुद्दे नहीं उठाएंगे जिनसे एक आम नागरिक या ग्रामीण किसान स्वावलंबी बन सके, ये लोग ऐसे काम या प्रोजेक्ट ही करेंगे जिनसे आम नागरिक या किसान परावलम्बी बने या आश्रित बने|* हाँ कुछ NGO पर एक बार भरोसा तो कर सकते हैं जो NGO खुद के लोगों के पैसे से अपने काम करते हैं जैसे सहकारी संस्थाएं और उद्योग लगाना | (इसको समझने का एक साधारण उदाहरण - जैसे भिखारी को भीख देने से समस्या कभी हल नहीं हो सकती समस्या का हल उसकी मासिक नियमित आर्थिक आवश्यकता का हल करना है, कोई रोजगार या अन्य काम जिससे आमदनी का स्रोत बना रहे| अब ये विदेशी पैसे पर चलने वाले NGO कभी भी इनके रोजगार के बारे में ना सोचकर, बेमतलब की कोई रैली, दौड़ या कैंडल मार्च (गरीबी हटाने के लिए) का आयोजन करेंगे जिसपर लाखों खर्च किये जायेंगे जिससे की मीडिया में इनकी खबर छपे|) जैसा की अभी धरा 377 को लेकर NGO आन्दोलन कर रहे हैं, पहली बात तो ये हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और ये सारे NGO विदेशी हैं जो अपनी विकृत संस्कृति को हमपर थोपना चाह रहे हैं | शिक्षा, खान-पान, पहनावा, रहन-सहन सबपर विदेशी प्रभाव डाल देने के बाद अब ये ही बाकी रह गया था| देश बचाने से पहले ये तो पता होना चाहिए की देश कैसे बर्बाद किया जा रहा है !
हम राजीव भाई समर्थको के लिए यह विडियो ही बहुत है केजरीवाल को समर्थन करने का मित्रो मैं आपको उस विडियो का लिंक दे रहा हूँ जो 14-Nov-2010 का है जब राजीव भाई जीवित थे और इसके 15 दिन बाद उनका देहांत हुआ था दिल्ली के जंतर मंतर पर रामदेव जी, अन्ना हजारे और केजरीवाल साथ साथ मंच पर थे पर राजीव भाई नहीं थे, क्यों ? क्योंकि राजीव भाई ने स्वामीजी को छत्तीसगढ़ का प्रवास छोड़ कर केजरीवाल के साथ मंच साँझा करने से मना कर दिया था? क्योंकि उन्हें पता था की आज जो रूप केजरीवाल का है उसको वो पहले से जानते थे अगर राजीव भाई जीवित होते तो केजरीवाल केजरीवाल नहीं होता इसलिए राजीव समर्थक इस भ्रम को दिमाग से निकल दें की राजीव भाई होते तो केजरीवाल उनके साथ होताhttp://www.youtube.com/watch?v=A9oJMewaoMM राजीव भाई ने NGO की व्याख्या कितनी बढ़िया तरीके से की है उनका कहना है जो NGO सरकारी या विदेशी पैसे लेकर काम करते हैं उनपर कभी भरोसा नहीं करना, इसको लेकर कार्यकर्ता भी भ्रमित हो जाते हैं उनको लगता है बहुत बढ़िया देशभक्ति का काम कर रहे हैं ये NGO और फिर उनके एजेंट बन जाते हैं | *अगर कोई NGO विदेशी पैसे लेकर काम करेगा तो वो सिर्फ वोही मुद्दे उठाएगा जो विदेशी हित में हो, ये लोग कभी भी ऐसे मुद्दे नहीं उठाएंगे जिनसे एक आम नागरिक या
ग्रामीण किसान स्वावलंबी बन सके, ये लोग ऐसे काम या प्रोजेक्ट ही करेंगे जिनसे आम नागरिक या किसान परावलम्बी बने या आश्रित बने|* हाँ कुछ NGO पर एक बार भरोसा तो कर सकते हैं जो NGO खुद के लोगों के पैसे से अपने काम करते हैं जैसे सहकारी संस्थाएं और उद्योग लगाना | (इसको समझने का एक साधारण उदाहरण - जैसे भिखारी को भीख देने से समस्या कभी हल नहीं हो सकती समस्या का हल उसकी मासिक नियमित आर्थिक आवश्यकता का हल करना है, कोई रोजगार या अन्य काम जिससे आमदनी का स्रोत बना रहे| अब ये विदेशी पैसे पर चलने वाले NGO कभी भी इनके रोजगार के बारे में ना सोचकर, बेमतलब की कोई रैली, दौड़ या कैंडल मार्च (गरीबी हटाने के लिए) का आयोजन करेंगे जिसपर लाखों खर्च किये जायेंगे जिससे की मीडिया में इनकी खबर छपे|) जैसा की अभी धरा 377 को लेकर NGO आन्दोलन कर रहे हैं, पहली बात तो ये हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और ये सारे NGO विदेशी हैं जो अपनी विकृत संस्कृति को हमपर थोपना चाह रहे हैं | शिक्षा, खान-पान, पहनावा, रहन-सहन सबपर विदेशी प्रभाव डाल देने के बाद अब ये ही बाकी रह गया था| देश बचाने से पहले ये तो पता होना चाहिए की देश कैसे बर्बाद किया जा रहा है !
पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो यहाँ Click करें : http://www.youtube.com/watch?v=0fo5tDYfMi8

हिंदुस्तान की न्याय व्यवस्था में काम करने वाले जो एडवोकेट्स मित्र है उनसे माफ़ी मांगते हुए आप सबसे ये पूछता हूँ के क्या आप जानते है यह काला कोट पेहेनके अदालत में क्यों जाते है ? क्या काले को छोड़ के दूसरा रंग नही है भारत में ? सफ़ेद नही है नीला नही है पिला नही है हरा नही है ?? और कोई रंग ही नही है कला ही कोट पहनना है । वो भी उस देश की न्यायपालिका में जहाँ तापमान 45 डिग्री हो। तो 45 तापमान जिस देशमे रहता हो उहाँ के वोकिल काला कोट पेहेनके बहेस करे, तो बहस के समय जो पसीना आता है वो और गर्मी के कारन जो पसीना आता है वो, तरबतर होते जाये और उनके कोट पर पसीने से सफ़ेद सफ़ेद दाग पड़ जाये पीछे कोलार पर और कोट को उतारते ही इतनी बदबू आये की कोई तिन मीटर दूर खिसक जाये लेकिन फिर भी कोट का रंग नही बदलेंगे। क्योंकि ये अंग्रेजो का दिया हुआ है।

आपको मलिम है अंग्रेजो की अदालत में काला कोट पहनके न्यायपालिका के लोग बैठा करते थे। और उनके यहाँ स्वाभाविक है क्योंकि उनके यहाँ नुन्यतम -40 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होता है जो भयंकर ठण्ड है । तो इतनी ठण्ड वाली देश में काला कोट ही पेहेनना पड़ेगा कियोंकि वो गर्मी देता है। ऊष्मा का अच्छा अवशोषक है। अन्दर की गर्मी को बाहर नही निकलने देता और बाहर से गर्मी को खिंच के अन्दर डालता है । इसीलिए ठण्ड वाले देश के लोग काला कोट पेहेनके अदालत में बहस करे तो समझ में आता है पर हिंदुस्तान के गरम देश के लोग काला कोट पेहेनके बहस करे !!!!!! 1947 के पहले होता था समझमे आता है पर 1947 के बाद भी चल रहा है ??? हमारी बार काउन्सिल कोइत्नि समझ नही है क्या? के इस छोटी सी बात को ठीक कर ले बदल ले । सुप्रीम कोर्ट की बार काउन्सिल है हाई कोर्ट की बार काउन्सिल है डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की बार काउन्सिल है सभी बार काउन्सिल मिलके एक मिनट में फैसला कर सकते है की काल से हम ये काला कोर्ट नही पहनेंगे।

वो तो भला हो हिंदुस्तान में कुछ लोगों का हमारे देश पहले अंग्रेज न्यायाधीश हुआ करते थे तो सर पे टोपा पेहेनके बैठते थे, उसमे नकली बाल होते थे। आज़ादी के बाद 40 -५० साल तक टोपा लगा कर यहाँ बहुतसारे जज बैठते रहे है इस देश की अदालत में। अभी यहाँ क्या विचित्रता है के काला कोट पेहेन लिया ऊपर से काला पंट पेहेन लिया, बो लगा लिया सब एकदम टाइट कर दिया हवा अन्दर बिलकुल न जाये फिर मांग करते है के सभी कोट में एयर कंडीशनर होना चाहिए!! ये कोट उतर के फेंक दो न एयर कंडीशन की जरुरत क्या है ? और उसके ऊपर एक गाउन और लाद लेते है वो निचे तक लहंगा फैलता हुआ। ऐसी विचित्रताए इस देश में आज़ादी के ६० साल बाद भी दिखाई दे रहा है।

अंग्रेजो की गुलामी की एक भी निशानी को आज़ादी के 65 साल में हमने मिटाया नही, सबको संभाल के रखा है।

आज मै आप बीती साझा कर रहा हूँ मै जो सफदरजंग से प्रतिमाह 3000 हजार की दवा लाता था 2010 के बाद एक गोली भी नहीं खाई है हमारे यहाँ स्किन के विशेषज्ञ है डॉ महाजन उन्होंने मुझे बराबर दवा खाने के लिए बोला था आज मिलते है तो कहते है यार तुम तो खुद स्किन के विशेषज्ञ हो गए हो मुझे liken plenas और क्रिटिकल alopicia था ldl vldl triglisiride सब गड़बड़ था प्रतिमाह लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट करना पड़ता था और ऐसी खतरनाक दवा ली जिसने पुरे पाचनतंत्र और हार्मॊन को अवैवस्थित कर दिया था बस भगवान् की ऐसी कृपा हो गई की सफदरजंग के dermotology dpt के एक डॉक्टर ने राजीव भाई की स्वास्थ कथा की cd दी और बोले बेटा इसे सुन लेना बस उस दिन मैंने cd ली और घर आकर पूरी रात सोया नहीं रात भर cd सुनता रहा और वो सुबह मेरे जीवन की सबसे सुनहरी सुबह थी मै एक pvt ltd co में था मैंने इतनी दवा खाई थी की मुझे ESI से 37523 रूपये वापस मिले थे मुझे दवा के काले कारोबार में शामिल MR और doctar के सम्बन्ध का भी ज्ञान हुवा । मुझे स्किन की समस्या थी जिसमे बायोप्सी भी हुइ थी जब राजीव भाई से जाना की इस बिमारी का मूल कारण पेट है पहले इसे ठीक करना होगा मैंने अष्टांग हृदयं के नियम का पालन किया और गौमूत्र का प्रतिदिन सेवन किया आज पूर्णतया स्वस्थ हूँ कभी सर्दी जुखाम भी नहीं होता बस राजीव भाई द्वारा बताये गए नियमो का कट्टरता से पालन करता हूँ । बस दुःख इसी बात का है की भारत की उस महान विभूति से कभी मिल नहीं पाया ।और सबसे बड़ा कष्ट ये होता है जब लॊग हजारो लाखो लोगो को हार्टअटैक ब्लडप्रेसर से निजात दिलाने वाले राजीव भाई की मृत्यु का कारण लोग हार्टअटैक बताते है ।ये एक ऐसा सवाल है जो आने वाली पीढ़ी हमसे जरूर पूछेंगी तब शायद ही कोइ इमानदारी से जवाब दे पाए ।अमर शहीद भाई राजीव दीक्षित देशभक्त थे मै गर्व से कहता हूँ मै माँ भारती
के उस लाल का भक्त हूँ । जो उन्हने बोला उसको जीवन में सर्वप्रथम धारण भी किया ।

सोमवार, 23 दिसंबर 2013

मुलेठी----------
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पहचान-
मुलेठी का वैज्ञानिक नाम ग्‍लीसीर्रहीजा ग्लाब्र (Glycyrrhiza glabra ) कहते है। संस्‍कृत में मधुयष्‍टी:, बंगला में जष्टिमधु, मलयालम में इरत्तिमधुरम, तथा तमिल में अतिमधुरम कहते है। एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसमें गुलाबी और जामुनी रंग के फूल होते है। इसके फल लम्‍बे चपटे तथा कांटे होते है। इसकी पत्तियॉं सयुक्‍त होती है। मूल
जड़ों से छोटी-छोटी जडे निकलती है। इसकी खेती पूरे भारतवर्ष में होती है।
अनेक रोगों की दवा मुलेठी

मुलेठी के प्रयोग से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर और छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी लाभ होता है। मुलेठी एक वनौषधि है जिसका एक से छह फुट का पौधा होता है। इसका काण्ड और मूल मधुर होने से इसे यष्टिमधु भी कहा जाता है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। ताजी जड़ मधुर होती है। यह सूखने पर कुछ तिक्त एवं अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण बना रहता है। इसका औषधि के रूप में अति प्राचीन काल से ही उपयोग किया जाता रहा है। सुश्रुत, अष्टांगह्वदय, चरक संहिता जैसे ग्रन्थों में इसके प्रयोग द्वारा चेतना लाने (मूच्र्छा दूर करने), उदर रोग, श्वास रोग, स्तन रोग, योनिगत रोगों को दूर करने की अनेक विधियां दी गई हैं। ईरानी चिकित्सक तो आज भी çस्त्रयों की सेक्स संबंधी बीमारियों में इसका प्रयोग कर रहे हैं। ताजा मुलेठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है। ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है।

पेट के घाव
वैज्ञानिकों ने अनेक प्रयोगों द्वारा इस बात को सिद्ध कर दिया है कि मुलेठी की जड़ का चूर्ण पेट के घावों पर लाभकारी प्रभाव डालता है और घाव जल्दी भरने लगता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम दिनकर का कहना है कि मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित रूप से सेवन करके स्त्रियाँ अपने स्तन, योनि, सेक्स की भावना, सुन्दरता आदि को लंबे समय तक बनाए रख सकती हैं । डॉ. डी.आर. लॉरेन्स की क्लीनिकल फार्मोकॉलॉजी के अनुसार मुलेठी में ग्लाइकोसाइड के अतिरिक्त ट्राइटर्पी नामक अम्ल भी होता है, जिसे कार्बेनोक्लोजीन के नाम से एलोपैथी में प्रयोग किया जाता है। यह पदार्थ आमाशय में श्लेष्मा की मात्रा बढ़ा देता है। यह प्रभाव अन्य अम्ल निरोधक एण्टासिड्स से कहीं अधिक होता है।

अल्सर मिटाए
मुलेठी न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन् छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह से प्रभावशाली है। इण्डियन मेडिकल गजट के अनुसार ड्यूओडनल अल्सर के रोगियों पर जब मुलेठी का चूर्ण दिया जाता है, तो यह चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी इतनी तेज गति से भरता है, जितना अन्य औषधि नहीं भर पाते।

आंतों की टीबी
डॉ. बी.डी. अग्रवाल के अनुसार आज लोग आंतों की टीबी के शिकार होते जा रहे हैं। आंतों की टीबी में लगातार उल्टियां होती हैं, तीव्र पेट दर्द की शिकायत रहती है, पखाने के रास्ते खून बहता रहता है, ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। इस स्थिति में मुलेठी का प्रयोग लाभदायक देखा गया है। आमाशय के रोगों में मुलेठी चूर्ण, क्वाथ या स्वरस रूप में पांच मिलीलीटर से दस मिली. तक दिन में तीन बार तक दिया जाता है। तृष्णा एवं उदरशूल में भी यह शीघ्र लाभ देता है। आमाशयिक व्रणों में विशेष लाभकारी होता है। अम्लाधिक्य एवं अम्लपित्त को भी शांत
रखता है।

खून की उल्टी
खून की उल्टियां होने पर दूध के साथ मुलेठी का चूर्ण एक से चार माशे की मात्रा में अथवा मधु के साथ देने पर लाभ होता है। हिचकी होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से लाभ होता है।

भारत के ऋषि मुनियो ने लाखो - लाखो वर्ष एक -एक वृक्ष और पौधे पर गहन अनुसंधान किया और फिर उस पर धार्मिक और वैज्ञानिकता की मौहर लगा कर आम भारतीयो और पृथ्वी वासियो को उसके गुणो का लाभ दिलाया ऐसे ही पवित्र और वैज्ञानिक गुणो वाला एक
वृक्ष है "आवला "
आवले के वृक्ष मे दैवीय शक्तियों का वास होता है

रोगो से लड़ने की अनुपम शक्ति के कारण ही इस वृक्ष को अमर फल का नाम भी प्रदान किया गया

चिक्तिसा परामर्श हेतु हमसे संपर्क करने वालो में सर्वाधिक संख्या उन रोगियों की होती है जो उदर रोगों से पीड़ित होते है - जैसे अपच,भूख न लगना, गैस, एसिडिटी और सबसे मुख्य रोग कब्ज़ |
अनियमित दिनचर्या और अनुचित आहार-विहार के अलावा मानसिक तनाव, नाना प्रकार के कारणवश होने वाली चिंता का सीधा प्रभाव नींद और पाचन संस्थान पर पड़ता है और व्यक्ति अनिद्रा तथा अपच का शिकार हो जाता है और इस स्थिति का निश्चित परिणाम होता है कब्ज़ होना | कब्ज़ कई व्याधियों की जड़ होती है जिसमे बवासीर, वात प्रकोप, एसिडिटी, गैस और जोड़ों का दर्द आदि व्याधियां कब्ज़ के ही देन होती है |

तो आज मैं चर्चा करने जा रहे है जिसमे सारे रोगों को दूर करने की शक्ति है,जो की ठंढी प्रकृति का है तथा इसकी विशेषता यह है की सूखने पर भी इसके गुण नष्ट नहीं होते | इसे आप हरा या सुखा किसी भी रूप में खाकर इसके सामान गुण का लाभ उठा सकते है | जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ आयुर्वेद में मशहूर बनौषधि जिसका नाम है " आँवला"

संस्कृत में आँवले को अमरफल, आदिफल, आमलकी , धात्री फल आदि नामों से पहचाना जाता है | लेतीं नाम :- एम्ब्लिका ओफिसिनेलिस( Emblica officinalis )

आँवला सर्दी की ऋतू में ताजा मिलता है | नवम्बर से मार्च तक अवाला ताजा मिलता रहता है | जनवरी-फ़रवरी में आवला अपने पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है |

जो आंवला आकर में बड़ा होता हो, गुदे में रेशा नहीं हो, बेदाग और हलकी-सी लाली लिए हुए हो, वह आँवला सबसे उत्तम होता है | वैसे सर्दियों में ही इसका मुरब्बा, अचार, जैम आदि बनाए |


आँवले में विटामिन- सी ( "C") पाया जाता है | एक आँवले में विटामिन- सी की मात्रा चार नारंगी और आठ टमाटर या चार केले के बराबर मिलता है | इसलिए यह शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति में महत्वपूर्ण है | विटामिन-सी की गोलियों की अपेक्षा आँवले का विटामिन-सी सरलता से पच जाता है |

आँवले में पाए जाने वाले कार्बोहायड्रेटस में मुख्य है रेशेदार 'पेक्टिन' | यह रक्तवाहिनियों के विकारों को नष्ट करने में सक्षम है | यह फल मधुरता और शीतलता के कारण पित को शान्त करता है |यह फल पितनाश्क होने के कारण पित-प्रधान रोगों की प्रधान औषधि है |


आँवले में ५८ मि .ग्रा. कैलोरी, ०.५ मि .ग्रा. प्रोटीन, ५० मि .ग्रा. कैल्सियम, १.२ मि .ग्रा. लोहा, ९ मि .ग्रा. विटामिन , ०.०३ मि .ग्रा. थायोमिन, ०.०१ मि .ग्रा. रिबोफ्लोविन, ०.२ मि .ग्रा. नियासिन, ६०० मि .ग्रा. विटामिन-सी |

आँवले के गुद्दे में जल ८१.२ प्रतिशत, कार्बोहाईड्रेट १४.१ प्रतिश, खनिज लवण ०.7 प्रतिशत, रेशा ३.४ प्रतिशत, वसा ०.१ प्रतिशत और फास्फोरस ०.०२ प्रतिशत होता है | आँवले में कई विटामिन होते है , जिनमे प्रमुख है - विटामिन -सी, यानि स्कार्बिक एसिड | आँवले में गेलिक एसिड, टैनिन और आल्ब्युमिन भी मौजूद होते है |


कब्ज़ में आँवला रात को एक चम्मच पिसा हुआ पानी या दूध के साथ लेने से सुबह शौच साफ़ आता है , कब्ज़ नहीं रहती | इससे आंते और पेट हलकी और साफ़ रहता है |

आंतरिक शक्ति बढ़ने वाली औषधियों का प्रधान घटक आँवला ही है | आँवले में एक रसायन होता है, जिसका नाम सकसीनिक अम्ल है | सकसीनिक अम्ल बुढ़ापे को रोकता है और इसमें पुनः यौवन प्रदान करने की शक्ति भी होती है | इसमें विद्यमान विभिन्न रसायन बीमार और जीर्ण कोशिकाओं के पुनर्निर्माण में अपना अच्छा योगदान देते है |


आँवले के नियमित सेवन से नेत्रज्योति और स्मरणशक्ति बढती है | यह गर्भवती महिला के लिए हितकर है | इससे ह्रदय की बेचैनी, धड़कन, मेदा, रक्तचाप,दाद आदि में लाभदायक है |

मधुमेह के रोगीओं के लिए :- सूखे आँवले और जामुन की गुठली समान मात्रा में पिस ले | इसकी दो चम्मच नित्य प्रातः भूखे पेट पानी के साथ फंकी लें | मधुमेह में निश्चित तौर पर फायद होगा | मधुमेह रोगीओं के लिए आँवले का ताजा रस लाभप्रद होता है | इसके सेवन से रक्त में शक्कर बनाना कम हो जाता है | आँवला पाउडर १ चम्मच दो बार पानी या दूध के साथ लेने से मधुमेह में लाभ होता है |

वैसे तो आंवले शरीर के सम्बंधित अधिकांश रोगों से लड़ने में कारगर है , परन्तु मैं यहाँ कुछ रोग जो वर्तमान में ज्यादा लोग ग्रसित है उसके बारे में बताते है :-

उच्च रक्तचाप :- आँवले में सोडियम को कम करने की क्षमता होती है | इसलिए रक्तचाप के रोगी के लिए आँवले का उपयोग लाभदायक है | यह रक्त बढाने और साफ़ करने में सहायक है तथा इससे शरीर को आवश्यक रेशा मिलता है |

ह्रदय एवं मस्तिस्क की निर्बलता :- आधा भोजन करने के पश्चात् हरे आंवलों का रस ३५ ग्राम पानी में मिलकर पी लें, फिर आधा भ्जोजन करें | इस पारकर २१ दिन सेवन करने से ह्रदय एवं मस्तिस्क की दुर्बलता दूर होकर स्वास्थ्य सुधर जाता है | स्मरण-शक्ति बढती है |

कोलेस्ट्रोल , ह्रदय रोग से बचाव :- एक चम्मच आँवले की फंकी नित्य लेने से ह्रदय रोग होने से बचाव होता है | कच्चे हरे आँवले का रस चौथाई कप, अध कप पानी, स्वादानुसार मिश्री मिलकर पीते रहने से कोलेस्ट्रोल कम होकर सामान्य हो जाता है , जिससे ह्रदय रोग से बचाव होता है |

सुन्दर संतान :- नित्य एक आँवले का मुरब्बा गर्भावस्था में सेवन करते रहने से मान स्वस्थ्य रहती हुई सुन्दर, गौरवर्ण संतान को जन्म देगी |

नेत्र-ज्योतिवर्धक :- एक कांच का गिलास पानी से भरकर नित्य रात को उसमे एक चम्मच पिसा हुआ आँवला दल दें | प्रातः बिना हिलाए आधा पानी छानकर उससे नेत्रों को धोये तथा बचा हुआ आधा पानी आँवले सहित पियें | इस तरह लगातार चार महीने सेवन करने से नेत्र ज्योति बढ़ जाएगी 

सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...