
*प्रसव पीड़ाकम या दूर करने के लिए उपयोग में आनेवाली पेनकिलर दवाएँ माता व बालक के बीच पय:पान (दुग्धपान) के समय स्नेह संबंध विकसित होने में बाधा पैदा करती है | संशोधकों ने देखा है कि पेनकिलर दवा लेने से माता में तरल मातृत्व हार्मोन ऑक्सिटोसिन स्त्रावित नहीं होता | इससे नवजात शिशु जन्म के समय चेतनाशून्य या स्तम्भ हो जाता है | यही कारण हैं कि वह अपने प्रारम्भिक क्षणों में माता के प्रति आकृष्ट नहीं होता और स्वत: पय:पान करने की कोशिश भी नहीं करता | इसके विपरीत जो माताएँ पेनकिलर दवा का सेवन नहीं करती, उनमें यह हार्मोन स्त्रावित होने से माता और बालक के बीच स्तनपान के हर अवसर पर दोनों और से प्रेम बढ़ता देखा गया हैं |*
*अत: पेनकिलर दवाइयों का सेवन न करके निम्न उपचारों में से किसी भी एक का प्रयोग करें*
*१] स्वच्छ चारा खानेवाली देशी गाय के ताजे गोबर का एक चम्मच (१० मि.ली.) रस आसन्न प्रसवा (जिसकी प्रसूति का समय निकट आ गया हो) को पिलाने से प्रसव सुलभ हो जाता है*
*(इस उपचार से व होमेओपेथी की मदद से पिछले 3 माह में आज 5 अगस्त 2019 ज्योति बहन जबलपुर 9399341299 के मार्गदर्शन में 10 बहनो ने सामान्य प्रसव से स्वस्थ व तंदरुस्त बच्चे को इस ब्रह्मांड में जन्म दी
*२] पीपर (पिप्पली) व वचा चूर्ण जल में पीसकर एरंड तेल के साथ मिला के नाभि में लेप करने से अनेक कष्टों से पीड़ित स्त्री भी सुखपूर्वक प्रसव करती है*
*३] सूर्यमुखी की जड़ को डोरी में बाँधकर प्रसूता के हाथ या सिर पर बाँधने से शीघ्र प्रसव होता है*
*४] प्रसूता के हाथ-पैर के नाख़ून व् नाभि पर थूहर के दूध का लेप करें |*
*5 अगस्त 2019 को मोनिका बहन तारानगर राजस्थान 8233322334 से गर्भधारण से लेकर प्रसव तक मार्गदर्शन में एक बहन ने जिसकी आखरी समय मे बच्चे का गर्दन नाल में फंसा हुआ था बिना शल्य क्रिया के सामान्य प्रसव से इस ब्रह्मांड में आगमन हुआ आज के एलोपैथी चिकित्सा शल्य क्रिया की सलाह दे रहे थे परन्तु गर्भवती बहन के अटल विश्वास ने मोनिका बहन की बात मान पहले जायफल का रस एक चम्मच सेवन कर हॉस्पिटल गयी व शल्य कक्ष में जाने से पहले परिवार वालो से पुनः आधे घण्टे का समय माँग मोनिका बहन के अनुसार एक एक कप गर्म दूध व देशी गाय का घी व स्वादानुसार मिश्री मिलाकर सेवन की और सेवन करने के मात्र 15 मिंट बाद ही सामान्य प्रसव से अपने स्वस्थ तंदरुस्त बच्चे (लड़का) को जन्म दी घरेलू उपचारों के चमत्कार को शत शत नमन व इन दोनों बहन के सेवा व विश्वास को*
*सुखपूर्वक प्रसवकारक मंत्र :*
*१] पहला उपाय :- “एं ह्रीं भगवति भगमालिनि चल चल भ्रामय भ्रामय पुष्पं विकासय विकासय स्वाहा “ इस मंत्र द्वारा अभिमंत्रित दूध गर्भिणी स्त्री को पिलायें तो सुखपूर्वक प्रसव होगा*
*२] दूसरा उपाय :- गर्भिणी स्त्री स्वयं प्रसव के समय ‘जम्भला-जम्भला‘ जप करे*
*३] तीसरा उपाय:- देशी गाय के गोबर का १२ से १५ मि.ली. रस ‘ॐ नमो नारायणाय‘ मंत्र का २१ बार जप करके पीने से भी प्रसव-बाधाएँ दूर होंगी और बिना ऑपरेशन के प्रसव होगा*
*४] प्रसुति के समय अमंगल की आशंका हो तो निम्न मंत्र का जप करें :सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिकेशरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोSस्तुते(दुर्गासप्तशती)*
*५) मंत्रः ॐ कौंरा देव्यै नमः। ॐ नमो आदेश गुरु का…. कौंरा वीरा का बैठी हात… सब दिराह मज्ञाक साथ…. फिर बसे नाति विरति…. मेरी भक्ति… गुरु की शक्ति…. कौंरा देवी की आज्ञा।*
*प्रसव के समय कष्ट उठा रही स्त्री को इस मंत्र से अभिमंत्रित किया हुआ जल पिलाने से वह स्त्री बिना पीड़ा के बच्चे को जन्म देती है।*
*विशेष : “सुवर्णप्राश टेबलेट ” सुवर्ण भस्म से पुष्य नक्षत्र में बनाई यह पुण्यदायी गोली आयु,शक्ति,मेधा,बुद्धि,कांति व जठराग्निवर्धक तथा ग्रहबाधा निवारक, उत्तम गर्भपोषक है ।गर्भवती स्त्री इसका सेवन करके निरोगी,तेजस्वी ,मेधावी संतती को जन्म दे सकती है*
*आयुर्वेदिक घरेलु उपाय*
*पहला प्रयोगः प्रसूति के समय ताजे गोबर (1-2 घण्टे के भीतर का) को कपड़े में निचोड़कर एक चम्मच रस पिला देने से प्रसूति शीघ्र हो जाती है।*
*दूसरा प्रयोगः तुलसी का 20 से 50 मि.ली. रस पिलाने से प्रसूति सरलता से हो जाती है।*
*तीसरा प्रयोगः पाँच तोला आँवले को 20 तोला पानी में खूब उबालिये। जब पानी 8 तोला रह जाये तब उसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर देने से बिना किसी प्रसव पीड़ा के शिशु का जन्म होता है*
*चौथा प्रयोगः नीम अथवा बिजौरे की जड़ कमर में बाँधने से प्रसव सरलता से हो जाता है। प्रसूति के बाद जड़ छोड़ दें।*
*विशेष : “सुवर्णप्राश टेबलेट ” सुवर्ण भस्म से पुष्य नक्षत्र में बनाई यह पुण्यदायी गोली आयु,शक्ति,मेधा,बुद्धि,कांति व जठराग्निवर्धक तथा ग्रहबाधा निवारक, उत्तम गर्भपोषक है ।गर्भवती स्त्री इसका सेवन करके निरोगी,तेजस्वी ,मेधावी संतती को जन्म दे सकती है*
*औषधियों से उपचार*
*1. एरण्ड: एरण्ड का तेल गर्म दूध में 50 मिलीलीटर की मात्रा में मिलाकर पिलाने से अगर प्रसव में दर्द हो तो दर्द तेज होकर बंद हो जायेगा*
*2. सोंठ: 10 ग्राम सोंठ का चूर्ण लगभग 500 मिलीलीटर दूध में अच्छी तरह पकाकर लेने से 15 मिनट के अन्दर-अन्दर बच्चा बाहर आ जायेगा*
*3. केला:> केले की जड़ लाकर प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) के बांयी जांघ पर बांधे। इससे जल्द लाभ होग*
*> केले के ऊपर कपूर का चूर्ण डालकर खाने से प्रसव यानी डिलीवरी में दर्द नहीं होता है*
*4. पीपल लता: पीपल लता की गांठदार जड़ को पीपला मूल कहते हैं। कुछ पंसारी लोग पीपल लता की मोटी शाखाओं के टुकड़े कर बेचते हैं। अत: सावधानी से ही लें। प्रसव में ज्यादा देर होने पर पीपलामूल, ईश्वर मूल और हींग, पान के साथ खिलाने से प्रसव यानी डिलीवरी का दर्द बढ़कर प्रसव हो जाता है। प्रसव के तुरन्त बाद इसके बारीक चूर्ण का घोल देने से लाभ होता है*
*5. लोध्र: लोध्र का लेप करने से प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को प्रसव के समय हुए योनिक्षत पर लगाने से लाभ होता है*
*6. जायफल: प्रसव यानी डिलीवरी के समय होने वाले कमर दर्द में जायफल घिसकर लेप करने व सेवन करने से लाभ होता है*
*7. पीपरामूल: प्रसव के समय पीपरा मूल, दालचीनी का चूर्ण लगभग 1.20 ग्राम में थोड़ी सी भांग के साथ प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को पिलाने से प्रसव यानी बच्चे का जन्म आराम से होता है*
*8. कलिहारी: सुख से प्रसव के लिए कलिहारी करी जड़ पीसकर नाभि के नीचे लगाने से लाभ होता है*
*9. कपास: डिलीवरी के बाद में कपास की छाल का काढ़ा प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को पिलाने से गर्भाशय जल्दी ही ठीक हो जाता है*
*10. सरपत: प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) आसपास वातावरण साफ करने के लिये सरपत की धूनी जला कर धुंआ करें*
*11. कंगुनी: प्रसव पीड़ा को कम करने के लिये कंगुनी के चूर्ण को दूध में बुझाकर, मिश्री को मिलाकर खाने से लाभ होता है। अगर पहले से ही लिया जाये तो दर्द कम रहता है*
*12. काफी: शरीर में स्फूर्ति पैदा करने के लिए काफी के बीज भूनकर, अच्छी तरह से पीसकर पानी में उबालकर पीने से लाभ होता है।*
*13. अजाझाड़े: अजाझाड़े की जड़ कमर में बांधने से प्रसव सुखपूर्वक होता है।*
*14. बादाम :आखिरी महीने में प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को 2 बादाम और 10-15 मुनक्का के दाने पानी में भिगोकर पीसकर खिलाने से लाभ होग*
*15. तुलसी: महिला को प्रसव (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) के समय 2 चम्मच तुलसी का रस पिलाने से प्रसव का दर्द कम हो जाता है*
*16. बथुए: बथुए के 20 ग्राम बीजों को पानी में उबालकर, छानकर बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री को पिलाने से पीड़ा कम होगी*
*17. हल्दी: बच्चा होने के आखिरी माह में एक चम्मच पिसी हुई हल्दी गर्म दूध के साथ सुबह-शाम पिलाएं*
*18. नींबू: गर्भ के आखिरी महीने में पानी में नींबू का रस डालकर रोज पीने से लाभ होता है*
*19. लौकी: लौकी को बिना पानी के साथ उबालकर उसका रस 30 ग्राम की मात्रा में निकालकर प्रसूता (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) को पिला देने से दर्द में आराम मिलता है।*
*20. हींग: चुटकी भर हींग लेकर, 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर खाकर, ऊपर से आधा कप पानी या गाय का दूध पियें*
*21. अंजीर: प्रसव के समय में 15-20 दिन तक रोज दो अंजीर दूध के साथ खाने से लाभ होता है*
*22. लालघुंघची: लाल घुंघची के दाने लेकर इसे बारीक पीस लें, फिर इसे पुराने गुड़ के साथ खायें इससे प्रसव के समय दर्द नहीं होता है।*
*23. जंगली पुदीना: जंगली पुदीना और हंसराज दोनों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। फिर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से दर्द में लाभ होता है।*
*24. कलिहारी: कलिहारी की जड़ हाथ-पैरों में थोड़ी-थोड़ी बांध लें। कुछ देर बाद प्रसव के समय स्त्री को बिना अधिक पीड़ा के डिलीवरी हो जायेगी*
*25. पोई: पोई की जड़ लेकर उसका काढ़ा बनाकर 4-5 चम्मच में 2 चम्मच तिल्ली का तेल मिलाकर स्त्री के पेट पर धीरे-धीरे लेप करने से प्रसव (बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री) शीघ्र और बिना दर्द के हो जाता है।*
*26. बिजौरा: बिजौरा की जड़ 10 ग्राम और महुआ 10 ग्राम दोनों को घी में पीस लें, फिर उसमें 2 चम्मच लेकर हर 1 घंटे बाद पिलाते रहें। इससे प्रसव यानी डिलिवरी में तकलीफ कम होती है।*
*27. अपामार्ग: अपामार्ग की जड़ और कलिहारी की जड़ को लेकर एक पोटली में रखें। फिर स्त्री की कमर से पोटली को बांधने प्रसव यानी डिलीवरी आसानी से हो जाती है।*
*28. हींग: हींग और बाजरे को गुड़ में रखकर निगल जाएं। दो घूंट से ज्यादा पानी न पियें। यह करने से बच्चा देने के समय दर्द नहीं होगा।*
*29. कपूर: पके केले में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग कपूर मिलाकर खाने से बच्चे का जन्म (चाइल्ड बर्थ) आराम से होता है*
*30. पान: पान को योनि में रखने तथा पान का सेंक व लेप करने से सूजन नष्ट हो जाती है और औरत का दूध साफ होकर निकलता है।*
*31. कसौंदी: कसौंदी के पत्तों का रस देने से प्रसव (चाइल्ड बर्थ) जल्दी होता है।*
*32. कुचला: कुचला की मज्जा (बीच के हिस्से) को पानी में घिसकर नाभि पर लगायें।*
*33. तेजपात: तेजपत्ते के पत्तों की धूनी देने से बच्चा सुख से उत्पन्न हो जाता है।*
*34. प्रसव में देरी होने पर या गर्भ में पल रहे है बच्चे का आडा या उल्टा होने की सबसे अच्छी दवाई है जब डॉक्टर कितना भी चिल्लाये अॉपेशन करवाओ तब आप अपने मरीज को घर ले आओ या ऐसे किसी डॉक्टर के पास मरीज को लेकर ही मत जाइए. गाय के गोबर और गोमूत्र एक ऐसी विशिष्ट दवा हैं जो इस प्रकार के आपात अवस्था मे देने पर फौरन अपना प्रभाव उत्पन्न करती हैं चाहे डॉक्टर कितना ही चिल्लाये आप किसी देशी बछडी का गोमूत्र और गोबर लेकर आपस में मिलाइये और उसका रस निकल कर माँ को चार चार घंटे के अंतर में 3 बार पिला दीजिये पेट के आदत उल्टा बच्चा भी सीधा हो जाता है और बिना किसी दर्द बच्चा बाहर आ जाता है लेकिन ये दवा 9 महीना पूरा होने के बाद होने वाले प्रसव में ही काम आती है उससे पहले ये अगर बच्चा 7-8 महीने में होता है तो ये दवा इतना काम नही आती है ये रुकी हुई प्रसव पीडा को पुन: प्रारंभ करती हैं, शिशु जन्म को सरल बनती हैं तथा गर्भ में शिशु की स्थिति को भी पुन: सही कर देती है।*
*35. जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चुना रोज खाना चाहिए क्योकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा काल्सियम की जरुरत होती है और चुना कैल्सियम का सबसे बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चुना खिलाना चाहिए अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चुना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाकर रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फाईदे होंगे - पहला फाईदा होगा के माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नोर्मलmk डेलीभरी होगा, दूसरा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हस्त-पुष्ट और तंदरुस्त होगा, तीसरा फायदा वो बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चुना खाया, और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होसियार होता है बहुत Intelligent और ठतपससपंदज होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है ।*
*36. एक गिलास देशी गाय के दूध में एक चम्मच देशी गाय का नियमित सेवन करना ही चाहिए*
*होमओपैथी
भाई राजीव दीक्षित जी के ज्ञान से प्रोत्साहित हो प्राप्त आत्मविश्वास से इस दवा के मात्र एक दो ज्यादा से ज्यादा तीन खुराक में पिछले 3 सालों में सैकड़ो बहन का सामान्य प्रसव सम्भव हो पाया है*
*जब पल्साटिला से फायदा न हो - (गौसिपियम Q)*
*जब दर्द काफी समय तक रहने के बाद कम हो जाए - (कॉलोफाइलम 30 या 200)*
*दुर्बल या रक्तहीन औरतों में जब प्रसव पीड़ा बंद हो जाए या कम हो जाए - (सीकेल कोर 200)*
*जब चिड़चिड़ी औरत प्रसव वेदना सहन न कर चिल्लाए - (कैमोमिला 200 या 1M)*
*जब दर्द के साथ पेशाब और पाखाने की हाज़त हो - (नक्स वोमिका 200)*
*जब तेज प्रसव दर्द अचानक आए, जाए, चेहरा व आंखे लाल, जरा सा झटका लगते ही तकलीफ बढ़े - (बेलाडोना 200)*
*जब दर्द के साथ तेज मितली रहे - (इपिकैक 30 या 200)*
*जब दर्द बंद होकर रोगिणी पसीने से तर होकर बर्फ की तरह ठंडी हो जाए मगर फिर भी कपड़ा ओढ़ना पसंद न करे - (कैम्फर 30 या 200)*
*बायोकैमिक औषधि - (काली फॉस 6X)*
*प्रसव सरल करने के लिए गर्भ के अंतिम माह में 15 दिन तक कॉलोफाइलम 30, रोज एक खुराक दें।*
*निरोगी रहने हेतु महामन्त्र*
*मन्त्र 1 :-*
*• भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें*
*• रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें*
*• विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)*
*• वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)*
*• एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)*
*• मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें*
*• भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें*
*मन्त्र 2 :-*
*• पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)*
*• भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)*
*• सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये*
*• ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें*
*• पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये*
*• बार बार भोजन न करें आर्थत एक भोजन पूणतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें*
*भाई राजीव दीक्षित जी के सपने स्वस्थ भारत समृद्ध भारत और स्वदेशी भारत स्वावलंबी भारत स्वाभिमानी भारत के निर्माण में एक पहल आप सब भी अपने जीवन मे भाई राजीव दीक्षित जी को अवश्य सुनें*
*स्वदेशीमय भारत ही हमारा अंतिम लक्ष्य है :- भाई राजीव दीक्षित जी*
*मैं भारत को भारतीयता के मान्यता के आधार पर फिर से खड़ा करना चाहता हूँ उस काम मे लगा हुआ हूँ*
*उनके बताए आयुर्वेद के पानी के सूत्रों का कट्टर अनुयायी व क्षमता व परिस्थिति अनुसार आयुर्वेद के यम नियम का पालनकर्ता।*
*उनके व हमसब के सपने स्वस्थ भारत समृद्ध भारत निर्माण हेतु (मोक्ष प्राप्ति हेतु अपने व औरो के त्रैहिक (दैहिक दैविक व भौतिक)दुःखो को दूर करने का प्रयासरत्त आदरणीय के मार्गदर्शन के सहयोग से*
*आयुर्वेद, घरेलू,पंचगव्य व होमेओपेथी के अध्ययन व भाई राजीवदीक्षित के विचार ज्ञान से ज्ञानित हो ज्ञान को निस्वार्थ भाव से ज्ञान का प्रचार प्रसार हेतु अब एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान के सहयोगी वन श्रेष्ठ उन्नत भारत के योगदान हेतू 9336919081 पर whatsapp संपर्क
*वन्देमातरम*




