रविवार, 15 नवंबर 2020

लोक जीवन में गोवर्धन पूजा, विश्वकर्मा दिवस, महावीर स्वामी निर्वाण दिवस, वृश्चिक सक्रांति, अन्नकूट उत्सव धार जिले का एक विशेष वीडियो भी संलग्न

  


#गौवर्धन_अन्नकूट_पूजा.
दीपोत्सव के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है, इसे अन्नकूट पर्व के नाम से भी मनाया जाता है. इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध स्पष्ट दिखाई देता है. हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार गाय उसी प्रकार पवित्र होती जैसे नदियों में मां गंगा को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. गाय को मां लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप कहा गया है, मां लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं, उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से उत्तम स्वास्थ्य रूपी सौभाग्य, आरोग्य, दीर्घायु और धन आदि प्रदान करती हैं और गाय का बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है, इस तरह गौ माता के साथ सम्पूर्ण गौवंश मानव मात्र के लिए वंदनीय, पूजनीय और आदरणीय है. अतः गौमाता के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन गोर्वधन पूजा की जाती हैं. भारत के लोग जीवन में भी आज के दिन गाय के प्रति श्रद्धा और उल्लास का आज सर्वोत्तम उदाहरण आज भीद मिलता है इस वीडियो में आप को दिखाया गया है

मध्य प्रदके धार जिले के दसाई गांव में दीपावली के दूसरे दिन यानि गोवर्धन पूजा के दिन गाय गोहरी पर्व मनाया जाता है। जिसमें मन्नत मांगने वाले लोग औंधे मुंह सोकर अपने उपर से पूरे गांव की गौमाता को गुजरवाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि उन लोगों को कोई चोट नहीं आती बल्कि वे साल भर स्वस्थ रहते हैं। वन्दे गौ मातरम्।

आज का पंचांग - शरद ऋतु, कार्तिक मास, कृष्ण/शुक्ल पक्ष, विशाखा नक्षत्र, अमावस्या/प्रतिपदा तिथि, रविवार, गोवर्धन पूजा, विश्वकर्मा दिवस, महावीर स्वामी निर्वाण दिवस, वृश्चिक सक्रांति, अन्नकूट, अमावस्या पुण्य, देव कार्य एवं स्नान दान की अमावस्या, राहुकाल शाम 4:30 बजे से रात्रि 6:00 बजे तक, दिशाशूल पश्चिम दिशा में, सूर्य दक्षिणायन, युगाब्‍द 5122, सूक्ष्म मान से आनंद और स्थूल मान से प्रमादी नामक विक्रमी संवत 2077 तदानुसार 15 नवंबर सन 2020.

गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है, प्राचीन काल में एक बार देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था, देवराज इन्द्र का अभिमान चूर करने के लिए श्रीकृष्ण जो स्वयं भगवान श्रीविष्णु के अवतार हैं, ने एक लीला रची जिसमें एक दिन उन्होंने देखा कि सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे हैं, श्रीकृष्ण ने मां यशोदा से पूछा मां आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं. मां यशोदा नें बताया कि लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं. श्रीकृष्ण ने पूछा मां हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं ? मां यशोदा ने कहा वह वर्षा करते हैं, जिससे अन्न की पैदावार होती है, उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है. श्रीकृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और देवराज इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं, अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए. लीलाधारी श्रीकृष्ण की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की. देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और बदले में मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी, प्रलय के समान वर्षा देख कर सभी बृजवासी श्रीकृष्ण को कोसने लगे कि सब इन का कहा मानने से हुआ है. तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसके नीचे अपने समस्त गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया. देवराज इन्द्र श्रीकृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी. देवराज इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें, देवराज इन्द्र लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे एहसास हुआ कि उनका मुकाबला करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता, अत: वे प्रजापति ब्रह्मा के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया. प्रजापति ब्रह्मा ने देवराज इन्द्र से कहा कि आप जिस श्रीकृष्ण की बात कर रहे हैं वह तो भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं और पूर्ण पुरूषोत्तम नारायण हैं. प्रजापति ब्रह्मा के श्रीमुंख से यह सुनकर देवराज इन्द्र अत्यंत लज्जित हुए और श्रीकृष्ण से कहा कि हे प्रभु! मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा, आप तो दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल को क्षमा करें तत्पश्चात देवराज इन्द्र ने मुरलीधर श्रीकृष्ण की पूजा आराधना कर उन्हें भोग लगाया. भगवान श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर सभी को हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने को कहा, तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा.

गोवर्धन पूजा के दिन ब्रह्ममुहूर्त जागरण कर दैनिक कार्यों से निवृत्त हो शरीर पर तेल मलकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें. निवास स्थान अथवा देवस्थान के मुख्‍यद्वार के सामने प्रात: गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं, उसे वृक्ष, शाखा एवं पुष्प इत्यादि से श्रृंगारित करें. गोवर्धन पर्वत का अक्षत, पुष्प आदि से विधिवत पूजन करें, पूजन करते समय निम्न प्रार्थना करें -
गौवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक,
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव.

दीपोत्सव की रात्रि को निमंत्रित की हुई गायों को स्नान कराएं, गायों को विभिन्न अलंकारों, मेहंदी आदि से श्रृंगारित करें, उनका गंध, अक्षत, पुष्प से पूजन करें, नैवेद्य अर्पित कर निम्न मंत्र से प्रार्थना करें -
लक्ष्मीर्या लोक पालानाम् धेनुरूपेण संस्थिता,
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु.

सायंकाल पश्चात पूजित गायों से पूजित गोवर्धन पर्वत का मर्दन कराएं, उस गोबर से घर-आंगन में लेपन कर वैदिक परंपरा में इंद्र, वरुण, अग्नि, विष्णु आदि देवताओं की पूजा व हवन का विधान है. गौवर्धन पूजा से पूर्व ॐ श्री कृष्णाय शरणं मम: मंत्र का उच्चारण अवश्य करें.
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने,
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः

ॐ नमः भगवते वासुदेवाय कृष्णाय
क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे हरे.
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे हरे.

अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी आयु तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है, दारिद्रय का नाश होकर मनुष्य जीवन पर्यंत सुखी और समृद्ध रहता है. ऐसा माना जाता है कि यदि इस दिन कोई मनुष्य दुखी रहता है तो वह वर्ष भर दुखी ही रहेगा, इसलिए हर मनुष्य को इस दिन प्रसन्न रहकर भगवान श्रीकृष्‍ण को प्रिय अन्नकूट उत्सव को भक्तिपूर्वक तथा आनंदपूर्वक मनाना चाहिए.
सादर आभार




मंगलवार, 10 नवंबर 2020

क्रिस्चियन मिशनरीयों का खुलेआम जंग का एलान सालवेशन आर्मी के द्वारा






 इन पादरियों के गुनाह कौन माफ करेगा?
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अपने किये गुनाह की माफी के लिए धार्मिक समुदाओं में अलग-अलग रिवाज हैं। ईसाई कहते हैं कि अपने पाप प्रत्येक रविवार को चर्च में जाकर कन्फेन्श करके खत्म कर दो…..
इसके लिए बाकायदा चर्च में एक किनारे पर एक बंद सा केबिन होता है। जिसे कन्फेशन रूम या केबिन कहा जाता है…..
केरल के कोट्टयम के चर्च में एक ईसाई महिला भी अपने गुनाह की माफी मांगने इसी केबिन में गयी थी……
पता नहीं जीसस ने उसकी फरियाद सुनी या नहीं सुनी! लेकिन एक पादरी ने केबिन के अंदर बैठकर उसका कबूलनामा सुना था, वह उल्टा उस औरत को ब्लैकमेल करने लगा। उसने महिला का यौन शोषण किया फिर अन्य पादरी भी इसमें शामिल हो गए……
अब जाकर महिला के पति को ये बात मालूम चली। उसने चर्च को शिकायती चिट्ठी भेजी। जब चर्च के अधिकारियों के लिए इस सच से मुंह मोड़ना मुश्किल हो गया, तो अधिकारियों के पास अपने पंथ की इज्जत बचाने के लिए इसे स्वीकार करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा ताकि चर्च के अनुयायियों को दूसरे लोगों से मुंह छिपाते न फिरना पड़े इस कारण पांचों आरोपी पादरियों को छुट्टी पर भेज दिया है……

अपनी आध्यात्मिक उपलब्धियों का दुरुपयोग, शारीरिक सुख प्राप्त करने की वजह से दुनिया भर के कैथोलिक चर्च आज सैक्स स्कैंडलों की बड़ी बदनामी झेल रहे हैं…..
समूचे यूरोप और अमेरिका सहित अनेक देशों में पादरियों के सैक्स किस्से लोगों की जुबान पर हैं। अगर केवल कल तक में झांक कर देखें तो चर्च के नाम पर भोगविलास में लिप्त इन तथाकथित ईश्वर पुत्रों की सूची आसमान की दूरी तरह लंबी होती चली जाएगी….
बीबीसी की रिपोर्ट में दिया गया था कि आस्ट्रेलिया में एक जांच के दौरान पता चला है कि देश के करीब 40 फीसदी चर्च पर बच्चों के यौन शोषण के आरोप है….

बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों पर नजर रखने वाली रॉयल कमीशन के पास 1980 से 2015 के बीच करीब 4,500 लोगों ने यौन शोषण होने की शिकायत दर्ज कराई थी।

इसके बाद वेटिकन के तमाम प्रयासों के बावजूद पादरियों के कुकर्मों की पोल खुलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पादरियों के यौन दुराचार की बातें उजागर होते देख चर्च को अपनी चूलें हिलती दिख रही हैं इसी वजह से कुछ साल पहले 16 वें पोप बेनेडिक्ट जगह-जगह जाकर प्रार्थना करने के बजाय अपने लंपट पादरियों के कुकर्मों के लिए माफी मांगते नजर आये थे। पीड़ित लोगों से मिल रहे थे और बेहद शर्मिंदगी व दुःख जता रहे हैं कारण सदियों तक जो बात ढ़की रहती थी, अब छिपाए छिप नहीं पा रही और चर्च का यौनसुख अब संकट में है। क्योंकि अब आम जनता के नैतिकता के पैमाने बदल गए हैं…..

हालाँकि चर्चों का ये यौनसुख नया नहीं है काफी समय से चर्च अपने पादरियों की नाजायज संतानों की समस्या को भी झेल रहा है। अमेरिका, यूरोप और आस्ट्रेलिया में कई औरतें पादरियों से गर्भवती होकर उनके अवैध बच्चों को पालने पर मजबूर हैं। कई चर्चों से इन औरतों से समझौते पर साइन करवा कर मुआवजे दे दिए गए हैं......
चर्च के सैक्स स्कैंडलों की बदनामी से वैटिकन सिटी बार-बार मीडिया की आलोचना भी करता रहा है लेकिन वैटिकन इन मामलों को रोक नहीं पा रहा है। चर्चों के सैक्स किस्से घटने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं……
न्यूयार्क टाइम्स की सैक्स स्कैंडलों पर कवरेज के लिए आलोचना की गई थी कारण अखबार ने 200 बहरे बच्चों के साथ एक पादरी की दुराचार की खबरें प्रकाशित की थीं।

अपने देश में ही देखें तो में केरल के कन्नूर जिले में एक कैथलिक पादरी पर एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने का इल्जाम लगा था। आरोप था कि पादरी ने उस लड़की का कन्फेशन सुनकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था। इसी वर्ष पटना में एक पादरी चंद्र कुमार कथित तौर पर कई महिलाओं का धर्म परिवर्तन करा कर उनका यौन शोषण करता था। जिन्हें पिछले 6 महीनों से वह अपनी हवस का शिकार बना रहा था। इसी दौरान त्रिसूर में एक कैथोलिक पादरी को नौ वर्ष की एक लड़की द्वारा लैंगिक शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।

ये तमाम रिपोर्ट किसी को भी शर्मसार करने के लिए काफी है। ये पांचो आरोपी पादरी फादर जॉब मैथ्यू, फादर अब्राहम वर्गीज, फादर जेस के जॉर्ज, फादर जॉनसन वी मैथ्यू और फादर जीजो जे अब्राहम भी कन्फेशन रूम में अपने किये कृत्यों की माफी मांग लें और चर्च की तरफ से मामला रफा-दफा हो जाये पर लोगों के मन में उफन रहे सवाल कैसे रफा-दफा होंगे कि इन पादरियों के गुनाह कौन माफ करेगा?
कौन माफ़ करेगा .... गरीब बच्चों के नाम पर विदेशों से धन इकठ्ठा किया और खुद के यासी में लगाया .....
केरल के बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च पर आयकर विभाग ने कर चोरी करने का दावा करते हुए छापा मारा है। आयकर विभाग ने इस चर्च के मुखिया और इसाई धर्म प्रचारक केपी योहानन के घर और ऑफिस में रेड डाली है। इस चर्च पर आरोप लगा है कि वह चैरिटी फंड का इस्तेमाल धार्मिक और निजी कार्यों के लिए कर रहा है।
आरोप लगाया गया है कि चर्च के मुखिया केपी योहानन ने गरीबों के नाम पर विदेश से धन इकट्ठा किया और उसका इस्तेमाल रियल एस्टेट क्षेत्र में और अपने निजी इन्वेस्टमेंट में किया। इस बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली गई थी जिसके आधार पर यह छापेमारी की कार्रवाई की गई।
बताया जा रहा है कि आईटी विभाग को इस बारे में सूत्रों से कई अहम जानकारी मिली थी। अधिकारियों ने चर्च मुखिया के घर पर खड़ी एक गाड़ी से 57 लाख रुपए और कुछ फोन भी बरामद किए थे।
एक रिपोर्ट के अनुसार छापेमारी अभियान गुरूवार से शुरू हुआ था जो अभी तक केरल समेत देश के कई दूसरे क्षेत्रों में जारी है। अभी तक कई परिसरों से लगभग 8 करोड़ रुपए जब्त किए जा चुके हैं। बताते चले कि 2012 में भी राज्य सरकार ने चर्च मुखिया केपी योहनन के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए थे।
वहीँ, इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों के मुताबिक केरल के 'बीलीवर्स ईस्टर्न चर्च' देशभर में कई पूजास्थलों, विद्यालयों, कॉलेजों तथा केरल में एक मेडिकल कॉलेज और एक अस्पताल को चलाता है। इस चर्च को गरीबों और अनाथों की मदद के लिये विदेश से दान मिलता है, लेकिन असल में इस तरह के टैक्स फ्री फंड का प्रॉपर्टी के में निजी और अन्य अवैध खर्चों के लिये बेहिसाब नकद लेनदेन में इस्तेमाल किया गया था।
अभी भी लोगों को समझ नहीं आये तो क्या किया जाये ...
ध्यान रहे ईसाई तो अपनी बात कर रहे है ... प्रचार कर रहे है .... पर हम अपने विचारों का प्रचार नहीं कर रहे है .....
हमें अपने सनातन विचारों का प्रचार करना ही होगा ....
उससे पहले अपने सनातन धर्म को हमें खुद समझना होगा ..... और पूर्ण आस्था के साथ उसको मानना भी होगा .....
नहीं तो हमारे परिवार के सदस्य उनके विचारों से प्रभावित हो कर उनके पास जायेंगे और वासना के शिकार होंगें ....
सनातन धर्म के मूल्यों को समझे और समझाएं .
https://youtu.be/06N0Bce9zfw

 https://youtu.be/kaUQ6VGD4Lw

 https://youtu.be/2YzX05w1FyU

 



 

सोमवार, 9 नवंबर 2020

मनुष्य को निर्वीज नष्ट भ्रष्ट कर समाप्त करने की तैयारी पशुओं पौधों की परीक्षण पूर्ण इस GM टेक्नोलॉजी से

 


 


 
यह करवा रहे हैं वैज्ञानिक जो कभी इन जानवरों ने भी करना नहीं चाहा, #भगवान बनना चाहता है #इंसान।।
यह सिंह (टाइगर) और बब्बर शेर का वर्ण सङ्कर बच्चा है, इसे #Tigon कहते हैं, यह न शिकार कर सकता है न अपना शरीर संभाल सकता है।
दुनिया के 2 सर्वश्रेष्ठ शिकारियों का वर्ण संकर भी किसी काम का नहीं है।
#प्रकृति के कानूनों में छेड़ छाड़ दुनिया तबाह कर रही है।।
  आईवीएफ नामक व्यापार जो अरबों खरबो का होता जा रहा है। जल्दी ही क्रिकेट को स्पॉन्सर करते हुए दिख गए तो समझ जाना की षड्यंत्र सफल हुआ। जैसे खेतों के लिए अब बीज से बीज नहीं होते वैसे ही अब इंसानो से बच्चे नहीं होंगे। बीज बाज़ार से लाने पड़ते हैं तो बच्चे भी बाज़ार से लाने पड़ेंगे।
कृत्रिम बच्चे।
इन का लक्ष्य है 2050 तक सब बच्चे ऐसे ही पैदा हो। एकता तुषार शाहरुख़ करण इस के सेल्स और मार्केटिंग वाले है। ये सब थोड़ा और मेहनत कर रहे हैं जाति, परिवार ,गोत्र,कुल  सब नष्ट करने की योजना है भारत से परिवार प्रथा ख़त्म करो विवाह प्रथा पर भी कुठाराघात किया जा रहा है। एक तीर दो निशाने भारत की संस्कृति मिटाओ और आईवीएफ़ से पैसा कमाओ। बीज बो रहे हैं ये एक भ्रष्ट समाज और परिवार का।        अब चाहे आपकी पूर्वजों के साथ कितना भी अत्याचार हुआ हो चाहे आपकी कोई भी संस्कृति रही हो या आपके खानदान और उनकी कोई भी मर्यादा रही हो चाहे नीचे दिए गए वीडियो में चाहे कितना भी राजीव दीक्षित कितना भी चिल्लाऐं  अब कोई लड़ने वाला नया नौजवान पैदा ही नहीं होगा अभी बीज ही नष्ट हो जाए उनकी योजना का यह मूल प्रयास है क्योंकि हो सकता है अगर बीज है तो कोई गुरु कोई अब इस बीज बचाने में केवल श्रेष्ठ गुरुकुल ज्ञान गाय और गांव से ही इन षड्यंत्रों से बचा जा सकता है अब एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान
केवल श्रेष्ठ बौद्धिक विचार से युक्त कर्मशील ही संपर्क करें
गुरुकुल की व्यवस्था के लिए whatsapp संपर्क 9336919081 कॉल  7984113987 इसका फोटो स्टेटस में देखें


  जितेंद्र को जानते हो?
वो ही ताकि ताकि ........ताकिताकि ताकि रे जब से तू आँख में झाँकी रे। बहुत ही हारामी चीज है। इस की ममेरी बहन ने इस पर बलटकार का आरोप लगाया । बलटकार 1971 में हुआ था और FIR 2018 में करी। असल में बलटकार हुआ ही नहीं था ये तो metoo की स्क्रिप्ट थी। चुनाव नहीं आते तो अब तक क़ानून बन गया होता। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी फूल मूड में थी जनसुनवाई की, कमेटी और क़ानून बनाने की तैयारी थी। कोई नहीं चुनाव के बाद हो जाएगा। जितेंद्र की ममेरी बहन को पैसा मिला होगा अच्छा ख़ासा बलटकार की कहानी के लिए। पैसा बड़ी चीज़ है।
जितेंद्र का एक बेटा है तुषार कपूर ए ओ आई ओ मा अ अ चो..... ऐसी औलाद को जन्म भर बैठ कर खिलाना पड़ता है।
ऐसी ही एक बेटी है एकता कपूर, जैसा भाई वैसी बहन। अब जीने के लिए पैसा तो चाहिए ही। जितेंद्र को भी उस के बेटे और बेटी को भी।
यहाँ ये बिक गए। काम मिला भारत को बर्बाद करने का। भारत माता को बेचने का। एकता निर्माता बनी सास बहु सीरियल की। कम्पनी का नाम रखा बालाजी टेली फ़िल्म। बाला जी मतलब आप जानते ही हो। ये सब से ज़्यादा वेतन लेने वाली CEO भी बनी, इस की कम्पनी से जितेंद्र को भी 5 करोड़ वेतन मिलता था तो इतना ही इस की माँ को भी भाई को भी। उस के अलावा मुनाफ़ा अलग से। हज़ार करोड़ की कम्पनी बन गयी।
ज़्यादा तो नहीं पता मगर विस्तारवादी नीति के तहत इस ने बहुत से प्रोडक्सन हाउस ख़रीदे बहुत से मतलब बहुत से। सास भी कभी बहु थी के समय से जनता हूँ मैं इस के अलावा कुछ नहीं देखा। स्टार टीवी पर आता था और स्टार टीवी जिस के साथ उस को नाम शौहरत दौलत की क्या कमी। होते होते इस ने स्टार टीवी के शेयर भी ख़रीद लिए। बहुत जल्दी सफलता मिलती गयी। 2017 में रीलाइंस ने इस से हाथ मिलाया डील हुयी कुछ 400-500 करोड़ में।
तुषार कपूर ने शादी नहीं की, फिर भी जितेंद्र और उस की बीवी शोभा दादा दादी बन गए। तुषार का बेटा हुआ था। उस का अपना ख़ून। किराए की कोख से। घर में बच्चे की किलकारियाँ गूँज उठी।
27 जनवरी को जितेंद्र और उस की बीवी शोभा नाना नानी बन गए। बिना दामाद के। किराए की कोख भी ली और विकी डोनर से स्पर्म भी लिए। घर में फिर बच्चे की किलकारियाँ गूँज उठी।

ये है “कहानी घर घर की” । (थोड़े दिन पहले ये सब हिजड़े मोदी जी से मिले थे।)
ऐसा ही शाहरुख़ खान ने किया तो करण जौहर ने भी किया। उस ही कड़ी में तुषार और एकता भी जुड़े।

रवीना टंडन ने 2 लड़कियाँ गोद ली। वहीं सुष्मिता सेन ने शादी नहीं की उस ने भी 2 लड़कियाँ गोद ली। सलमान खान की माँ हेलन ने एक लड़की गोद ली। सुभाष घई ने तो मिथुन ने भी एक बच्ची गोद ली। पहले ये चलता था। तब अनाथ बच्चों को गोद लेते थे।

मगर ये नया ट्रेंड चल पड़ा। किराए का गर्भ या स्पर्म ख़रीद का लड़का पैदा करो। जल्दी ही ये आम हो जाएगा। आज कल की भाग दौड़ भरी लाइफ़, काम का, कैरियर का लोड, स्ट्रेस ........जिस कारण अब दंपत्तियों के बच्चे नहीं हो रहे। इलाज करवाते हैं कम से कम 2 से 3 साल इलाज चलता है। असल में इलाज नहीं चलता ये ब्लाकिज किया जाता है। 4 - 5 लाख का ख़र्चा हो जाता है। फिर बोला जाता है की कनसिव नहीं हो रहा। आपको कृत्रिम प्रक्रिया करवानी होगी। ख़र्चा 4 से 5 लाख। तब दवाइयाँ बंद।

फिर किसी और के अंडाशय से अंडे तो किसी और के शुक्राणुओं को मिला कर तैयार किया जाता है मोटा ताज़ा लड़का।
ये है आईवीएफ नामक व्यापार जो अरबों खरबो का होता जा रहा है। जल्दी ही क्रिकेट को स्पॉन्सर करते हुए दिख गए तो समझ जाना की षड्यंत्र सफल हुआ। जैसे खेतों के लिए अब बीज से बीज नहीं होते वैसे ही अब इंसानो से बच्चे नहीं होंगे। बीज बाज़ार से लाने पड़ते हैं तो बच्चे भी बाज़ार से लाने पड़ेंगे।
कृत्रिम बच्चे।
इन का लक्ष्य है 2050 तक सब बच्चे ऐसे ही पैदा हो। एकता तुषार शाहरुख़ करण इस के सेल्स और मार्केटिंग वाले है। ये सब थोड़ा और मेहनत कर रहे हैं भारत से परिवार प्रथा ख़त्म करो विवाह प्रथा पर भी कुठाराघात किया जा रहा है। एक तीर दो निशाने भारत की संस्कृति मिटाओ और आईवीएफ़ से पैसा कमाओ। बीज बो रहे हैं ये एक भ्रष्ट समाज और परिवार का।        अब चाहे आपकी पूर्वजों के साथ कितना भी अत्याचार हुआ हो चाहे आपकी कोई भी संस्कृति रही हो या आपके खानदान और उनकी कोई भी मर्यादा रही हो चाहे नीचे दिए गए वीडियो में चाहे कितना भी राजीव दीक्षित कितना भी चिल्लाऐं  अब कोई लड़ने वाला नया नौजवान पैदा ही नहीं होगा अभी बीज ही नष्ट हो जाए उनकी योजना का यह मूल प्रयास है क्योंकि हो सकता है अगर बीज है तो कोई गुरु कोई गुरुकुल उनमें भाव पैदा कर सकता है अब जब भेज ही नहीं होगा तो कोई भी गुरुकुल कोई भी गुरु कोई भी श्रेष्ठ महा मानव का कोई प्रभाव नहीं होगा आप चिल्लपों मचाते रहिए बचाओ बचाओ करते रहिए

 


शनिवार, 7 नवंबर 2020

गौरक्षा के प्रश्न पर मात्र 50 साल के बाद इतना सन्नाटा क्यों

 


अंग्रेजो द्वारा किया गया नरसंहार जलियॉवाला बाग कांड से भी भयंकर रक्तपात आजाद भारत में चुने हुए सरकारों के द्वारा किया गया । वही इतने बड़े नरसंहार को और इतने बड़े आंदोलन को लीपापोती व हजम करके पचा दिया गया और आज के नोजवान पीढ़ी को भनक भी नहीं लगने पा रही है। इस आधुनिक शिक्षा और  बिकाऊ,बनावटी पालतू इतिहासकार और पत्तल कारों के द्वारा इतना संगठित और श्रेष्ठ आंदोलन ना भूतो न भविष्यति को इस संगठित गिरोह के द्वारा मटियामेट कर दिया गया।इतना बड़ा आंदोलन मात्र 50 साल में सन्नाटा बिरानी छाई हुई है वहीं पार्टियों के सभाएं इस करो़ना काल में भी गुलजार हो रही हैं और गौ हत्या प्रतिबंध का कानून आज तक नहीं बन पाया कई सरकारें आई और गई धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के दिए गए श्राप से गांधी खानदान के कई लोगों के चिथड़े उड़ चुके हैं और कई की सरकार भी चली गई और कई pm घिसटते घिसटते जिंदगी के नरक भोग कर मर  गए पर यह गौरक्षा का यक्ष प्रश्न आज भी हमारे सामने एक चुनौती बनकर के खड़ा है आने वाली सरकारों को भी यह एक विशेष चुनौती है
७ नवंबर की कहानी – आचार्य रामरंग (एक प्रत्यक्षदर्शी) की जुबानी     आज भी याद है वो मंजर जब गौरक्षा के लिए सुबह से ही संसद के बाहर लोग जुटने लगे थे। 7 नवम्बर 1966 को सुबह आठ बजे से ही लोग जुटना शुरू हो गए थे। गोरक्षा महाभियान समिति के संचालक व सनातनी करपात्री जी महाराज ने चांदनी चौक स्थित आर्य समाज मंदिर से अपना सत्याग्रह आरंभ किया। पूरी घटना के गवाह आचार्य सोहनलाल रामरंग के अनुसार, ”यह हिंदू समाज के लिए सबसे बड़ा ऐतिहासिक दिन था। नई दिल्ली का पूरा इलाका लोगों की भीड़ से भरा था। संसद गेट से लेकर चांदनी चैक तक सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। कम से कम 10 लाख लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसमें 10 से 20 हजार तो केवल महिलाएं ही शामिल थीं। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के लोग गोहत्या बंद कराने के लिए कानून बनाने की मांग लेकर संसद के समक्ष जुटे थे। गौहत्या रोकने के लिए इंदिरा सरकार केवल आश्वासन ही दे रही थी, ठोस कदम कुछ भी नहीं उठा रही थी। सरकार के झूठे वादे से तंग आकर संत समाज ने संसद के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था।”
रामरंग जी के अनुसार, ”दोपहर एक बजे जुलूस संसद भवन पर पहुंच गया और संत समाज के संबोधन का सिलसिला शुरू हुआ। करीब तीन बजे  https://ajaykarmyogi1.blogspot.com/2020/11/50.html?m=1

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 करीब तीन बजे का समय होगा, जब आर्य समाज के स्वामी रामेश्वरानंद भाषण देने के लिए खड़े हुए। स्वामी रामेश्वरानंद ने कहा, ‘यह सरकार बहरी है। यह गो हत्या को रोकने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाएगी। इसे झकझोरना होगा। मैं यहां उपस्थित सभी लोगों से आह्वान करता हूं कि सभी संसद के अंदर घुस जाओ और सारे सांसदों को खींच-खींच कर बाहर ले आओ, तभी गो हत्या बंदी कानून बन सकेगा।’
    ”इतना सुनना था कि नौजवान संसद भवन की दीवार फांद-फांद कर अंदर घुसने लगे। लोगों ने संसद भवन को घेर लिया और दरवाजा तोड़ने के लिए आगे बढ़े। पुलिसकर्मी पहले से ही लाठी-बंदूक के साथ तैनात थे। पुलिस ने लाठी और अश्रुगैस चलाना शुरू कर दिया। भीड़ और आक्रामक हो गई। इतने में अंदर से गोली चलाने का आदेश हुआ और पुलिस ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। संसद के सामने की पूरी सड़क खून से लाल हो गई। लोग मर रहे थे, एक-दूसरे के शरीर पर गिर रहे थे और पुलिस की गोलीबारी जारी थी। नहीं भी तो कम से कम, पांच हजार लोग उस गोलीबारी में मारे गए थे।”
    ”बड़ी त्रासदी हो गई थी और सरकार के लिए इसे दबाना जरूरी था। ट्रक बुलाकर मृत, घायल, जिंदा-सभी को उसमें ठूंसा जाने लगा। जिन घायलों के बचने की संभावना थी, उनकी भी ट्रक में लाशों के नीचे दबकर मौत हो गई। हमें आखिरी समय तक पता ही नहीं चला कि सरकार ने उन लाशों को कहां ले जाकर फूंक डाला या जमीन में दबा डाला। पूरे शहर में कफ्र्यू लागू कर दिया गया और संतों को तिहाड़ जेल में ठूंस दिया गया। केवल शंकराचार्य को छोड़ कर अन्य सभी संतों को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया। करपात्री जी महाराज ने जेल से ही सत्याग्रह शुरू कर दिया। जेल उनके ओजस्वी भाषणों से गूंजने लगा। उस समय जेल में करीब 50 हजार लोगों को ठूंसा गया था।”
रामरंग जी के अनुसार, ”शहर की टेलिफोन लाइन काट दी गई। 8 नवंबर की रात मुझे भी घर से उठा कर तिहाड़ जेल पहुंचा दिया गया। नागा साधु छत के नीचे नहीं रहते, इसलिए उन्होंने तिहाड़ जेल के अदंर रहने की जगह आंगन में ही रहने की जिद की, लेकिन ठंड बहुत थी। नागा साधुओं ने जेल का गेट, फर्निचर आदि को तोड़ कर जलाना शुरू किया। उधर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गुलजारीलाल नंदा पर इस पूरे गोलीकांड की जिम्मेवारी डालते हुए उनका इस्तीफा ले लिया। गुलजारीलाल नंदा उस वक्त गृहमंत्री के पद पर आसीन थे।
    गुलजारीलाल नंदा गौहत्या क़ानून के पक्ष में थे जिसके बाद उन्हें उनके पद से निष्कासित कर दिया और मंत्रिमंडल में कहीं भी जगह नहीं दी गयी, तत्कालीन महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व चीन से हार के बाद देश के रक्षा मंत्री बने यशवंत राव बलवतंराव चैहान को गृहमंत्री बना दिया गया। तिहाड़ जेल में नागा साधुओं के उत्पाद की खबर सुनकर गृहमंत्री यशवंत राव बलवतंराव चैहान खुद जेल आए और उन्होंने नागा साधुओं को आश्वासन दिया कि उनके अलाव के लिए लकड़ी का इंतजाम किया जा रहा है। लकड़ी से भरे ट्रक जेल के अंदर पहुंचने और अलाव की व्यवस्था होने पर ही नागा साधु शांत हुए।” बाद में सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को एक तरह से दबा दिया ।


शुक्रवार, 6 नवंबर 2020

कोटिल्य के 10 सूत्र से श्रेष्ठ और सुखी भारत की संकल्पना साकार हो सकती है जिसे बद्री प्रसाद टुलधरिया के देशिक शास्त्र भी प्रमाणित करता है

 






इस देश के एक मुख सन्यासी और संत चिंतक विचारक हिमालय वासी श्री बद्री प्रसाद टूलधरिया नी एक शास्त्र की रचना की जो भारत की श्रेष्ठ और सुखी भारत की संकल्पना साकार हो सकती है उसका नाम देशिक शास्त्र है इसमें समग्र चिंतन निहित है जिसे
 कौटिल्य ने मात्र 10 सूत्रों में सुखी राज्य के मूलमंत्र को वर्णित किया है।
लोग कहते आये हैं कि भारत केवल धर्म प्रधान देश था – उसका अर्थ इतिहासकारों समाजशास्त्रियों और अंग्रेजी काल में  उत्पन्न नकली धार्मिक समाजों ने पूजा पाठ और आत्म साक्षात्कार तक सीमित कर दिया।
जबकि धर्म का अर्थ था कर्तव्य - एकाउंटेबिलिटी, जिसकी डिमांड सदैव किसी विभीषिका के समय होती है।
स्वतंत्र भारत अधिकार प्रधान व्यवस्था को अपनाने को क्यो बाध्य हुआ ये भी विश्लेषण की विषय वस्तु है। अब यह बात चिंतकों विचारको समझ जानी चाहिए कि भारत ना केवल धर्म प्रधान बल्कि कर्म प्रधान भी था
दूसरी बात कौटिल्य सदैव राज्य को और उसके समस्त नागरिकों के सुख वैभव और कर्तव्य की बात करते हैं। व्यक्तिगत सुख उसी सामूहिक सुख का एक अंग मात्र था।
तीसरी बात निम्नलिखित मंत्र यद्यपि समस्त नागरिक समुदाय के लिए है, लेकिन राजा और राज्य कर्मचारियो के लिए अनिवार्य आवश्यकता थी।
10 मंत्र :
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कौटिल्य अर्थशास्त्र :
सुखस्य मूलं धर्म:
धर्मस्य मूलं अर्थः
अर्थस्य मूलं राज्यम्
राज्यस्य मूलं इन्द्रिय जयः
इन्द्रिय जयस्य मूलं विनयः
विनयस्य मूलं वृद्धोपसेवा
वृद्धोपसेवाया विज्ञानम्
विज्ञानेन आत्मनम् सम्पादयेत
संपादित आत्मा जितात्मा भवति
जितात्मा सर्व अर्थ इह संयुज्येत ।।
भावार्थ :
1- सुखस्य मूलं धर्म: : राज्य और प्रजा के सुख का मूल धर्म ( नीति या मानवोचित कर्तव्य) होता है।
2- धर्मश्य मूलं अर्थः : धर्म अर्थात नीतिमत्ता को सुरक्षित रखने में राज्यश्री का महत्वपूर्ण स्थान है। राजकोष भरा पूरा होना चाहिए।
3- अर्थस्य मूलं राज्यम् : : राज्य की स्थिरता और राज कर्मचारियों के कर्तव्य ही अर्थ का मूल है।
अर्थात् राज्यश्री तभी तक सुरक्षित रहेगी जब तक राजा और उसके अधिकारी कर्तव्यच्युत न हों।
4- राज्यस्य मूलं इन्द्रीयजय: : राज्य के मूल में इन्द्रिय निग्रह है। अर्थात् राज्य के राज्याधिकारियों की स्वेच्छाचारिता, विषय लोलुपता और स्वार्थ परायणता राज्य के लिए विष का कार्य करती है।
इंद्रियों पर विजय न पाने वाले राज्याधिकारी जनता को राज्य का शत्रु बना लेते है।
5- इंद्रियजयस्य मूलं विनयः : विनय ही इन्द्रिय जय का मुख्य साधन है।
अहंकार का परित्याग कर विनयी लोगों की संगति में सत्य असत्य का ज्ञान प्राप्त करने का विवेक उतपन्न होता है।
पात्र अपात्र परिचय, व्यवहार कुशलता, उचितज्ञता, न्याय अन्याय बोध, कार्य अकार्य विवेक (आनवीक्षकी) आदि सब विनय के व्यवहारिक रूप है।
विनयी मनुष्यो की इंद्रियाँ सदैव उसके वश में रहती हैं।
6- विनयस्य मूलं वृद्धोपसेवा: : ज्ञान वृद्धों की सेवा ही विनय का मूल है । मनुषय विद्या तपस्या और अनुभव से ही ज्ञान वृद्ध बनता है।
इन ज्ञान वृद्धों की योग्य परिचर्या करते हुए जिज्ञासु बने रहना वृद्ध सेवा कहलाती है।
विनय अर्थात् नैतिकता, नम्रता, उचितज्ञता, शासन कुशलता आदि गुणों को ज्ञान वृद्धों से राजा सीख सकता है, और राजा से यह विनय जनता सीख सकती है।
7- वृद्ध सेवाया विज्ञानम्: : विजिज्ञासु मनुष्य वृद्धों की सेवा से विवेक का ज्ञान होता है, अर्थात् कर्तव्य अकर्तव्य और व्यवहार कुशलता का भान होता है -
"न सा सभा यत्र न संति वृद्धा।
न ते वृद्धा ये न वदन्ति धर्मम।।
ना सौ धर्मो यत्र न सत्यं अस्ति।
न तत सत्यं यत छलेन अभ्युपेतम ।।
अर्थात् : वह सभा कोई सभा नही है जिसमे कोई अनुभवी ज्ञान वृद्ध न हो। वह वृद्ध वृद्ध नही है जो धर्म की बात न करे।।
वह धर्म धर्म नही है जो सत्यता की बात न करे।
और वह सत्य सत्य नही है जिसमे छल का मिश्रण होता है।
8- विज्ञानेन आत्मानम् सम्पादयेत: : राज्याधिकारी लोग विवेक से अपनी आत्मा को आलोकित कर अपने को योग्य शासक बनाएं।
9- संपादित आत्मा जितात्मा भवति: : नीति और विवेक से युक्त मनुष्य को संपादित आत्मा कहा गया है।
जितात्मा अर्थात् सुपरिष्कृत मन और इंद्रियों वाला व्यक्ति।
ऐसा व्यक्ति आत्म संयमित होता है।
10 -जितात्मा सर्व अर्थ इह संयुज्येत।।
जितात्मा नीतिवान लोग समस्त संपत्तियों से सम्पन्न होकर रहें।।
नोट - देखिए भारत का शेयर कौटिल्य के राजनीति के दर्शन से पिछले 2000 वर्ष की विश्व जीडीपी में 0 AD से तब तक लगभग एक तिहाई हिस्सेदारी बनी रही जब तक कि तुर्क मोघल डकैत नही आये थे।
0 AD से 1500 AD तक भारत का विश्व जीडीपी में 33 % हिस्सा।
अकबर महान के आने के बाद ये गिरकर 23% आ गया।
फिर आये आज के भारत के दलितों के माई बाप्स - गोरे ईसाई डकैत। उनके आने पर भारत विश्व की 23% जीडीपी का हिस्सेदार बचा था जो कि उनके जाते 1900 AD तक गिरकर मात्र 2% बची।
1809 - 13 में बिहार के गंगेटिक इलाके - भागलपुर , पटना-गया, पूर्णिया और और शाहाबाद की हैमिलटन बुचनन के अध्ययन और आकलन के आँकड़ों से, और 1901 की जनगणना के आँकड़ो के अध्ययन से पता चलता है क़ि मात्र एक शताब्दी में #प्रोडक्शन_इंडस्ट्री पर आधारित लोगों की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी आई ।
अर्थात् 50 प्रतिशत लोग मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री से बाहर हो कर बेरोजगार हो गए ।
1809-13 के बीच कुल मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर आधारित जनसँख्या का, 62.3% जनसंख्या स्पिनिंग और वीविंग करती थी , जिसकी संख्या 1901 में घटकर मात्र 15.1% बची।
(बाकी सब बेरोजगार हो गए )
- अमिय कुमार बागची पेज 61 -63 ।
और मात्र डेढ़ शताब्दी पूर्व जो भारत विश्व के 25% जीडीपी का हिस्सेदार था, (जबाकि इंग्लैंड और अमेरिका विश्व जीडीपी के मात्र 2% के मालिक थे) 1900 आते आते भारत मात्र 2% जीडीपी का हिस्सेदार बचा।
कौन थे इस जीडीपी के निर्माता , और क्या हुअा उनका डेढ़ शताब्दियों में?
#पंडीजी तुम लोगों ने बहुत अत्याचार किया #ग्रन्थ लिख लिख कर ।
न तुम ग्रन्थ लिखते न ये लोग बेरोजगार होते।
1875 के आस पास भारत की जनसँख्या लगभग 22 करोड़ थी।
1875 -1900 के बीच करीब 2.5 से 5 करोड़ भारतीय अन्न न खरीद पाने के कारण भूख से मर गए।
अन्न कौन खरीदता है - जो पैदा नहीं करता है - Industrialist या मैन्युफैक्चरिंग करने वाले ही अन्न खरीदते हैं -किसान नही 

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

चंद्रमा करते हैं अमृत की बरसात आज शरद पूर्णिमा की रात व इन ऋतुओं में खाए जानेवालेे खाद्यान्न का प्रभाव


शरदपूर्णिमाा पर सभी को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं ~~~
इस बार शरद पूर्णिमा कई दुर्लभ संयोगों एवं महत्‍वपूर्ण योग के साथ आ रही है। इस वर्ष शुक्रवार प्रदोष काल में निशा काल ( मध्य रात्रि) मे पूर्ण पूर्णिमा तिथि व्यापत होने से शरद पूर्णिमा का पर्व होगा। शनिवार को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि है पर पर्व शुक्रवार को होगा। धर्माचार्यों के अनुसार इस बार शरद पूर्णिमा के योग में महालक्ष्मी जी का पूजन वैभवता का योग है। शुक्रवार को ही राजराजेश्वरी महालक्ष्मी जी का व इंद्र देव की पूजा करके रात्रि जागरण किया जाता है। इसे ही कोजागरी व्रत कहा जाता है।

जो लोग स्थिर लक्ष्मी व सुख समृद्धि वैभव की कामना करते हैं उन्हें शरद पूर्णिमा को महा लक्ष्मी जी का पूजन व इंद्र देव की पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त क्रिया से करना चाहिए। सभी मनोकामनाएं को पूर्ण करने  हैतु
प्रदोष काल में पूजा करें। रात भर जागरण करें, पूजा पाठ अभिषेक अर्चना आरती करें। लक्ष्मी जी रात्रि मे पृथ्वी पर भ्रमण करती है जो जागरण करता है उसे स्थिर लक्ष्मी , सुख समृद्धि सौभाग्य संतान सुख का आशीर्वाद देती हैं।

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण जी गीता में कहते हैं ---
‘पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।
अर्थात रसस्वरूप अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं।
रात्रि में चंद देव अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत वर्षा करते हैं। वह वर्षा अमृत के रूप मे आपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर रोशनी से करते हैं।
शरद पूर्णिमा पर ~  मंदिर में ~ देवालयों मे ~ तीर्थ मे ~ पवित्र नदी के तटों पर ~ गोशाला में  घी या तिल तेल के 108  दीपक  जलाने चाहिए ।
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ‘शरद पूर्णिमा’ बोलते हैं । शरद पूर्णिमा की रात्रि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है। इस रात्रि में चंद्रमा का ओज सबसे तेजवान और ऊर्जावान होता है। पृथ्वी पर शीतलता, पोषक शक्ति एवं शांतिरूपी अमृतवर्षा करता है । इस साल 30 अक्टूबर की रात में खीर बनाकर खानी है व 31 अक्टूबर को व्रत-पूजन करना है।
इस दिन रास-उत्सव और कोजागर व्रत किया जाता है । गोप बासीयों को शरद पूर्णिमा की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण ने  ईश्वरीय अमृत का पान कराया था ।
यूं तो हर माह में पूर्णिमा आती है, लेकिन शरद पूर्णिमा का महत्व उन सभी से कहीं अधिक है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भी इस पूर्णिमा को विशेष बताया गया है।
 शरद पूर्णिमा से जुड़ी बातें....
ईस दिन चंद्रमा की किरणें विशेष अमृतमयी गुणों से युक्त रहती हैं, जो कई बीमारियों का नाश कर देती हैं। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग अपने घरों की छतों पर खीर रखते हैं, जिससे चंद्रमा की किरणें उस खीर के संपर्क में आती है, इसके बाद उसे खाया जाता है।
 नारद पुराण के अनुसार शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर अपने कर-कमलों में वर और अभय लिए निशिद काल में पृथ्वी पर भ्रमण करती है। माता यह देखती है कि कौन जाग रहा है?
यानी अपने कर्तव्‍यों को लेकर कौन जागृत है? जो इस रात में जागकर मां लक्ष्मी की उपासना करते हैं, मां उन पर असीम कृपा करती है।
वैज्ञानिक भी मानते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात स्वास्थ्य व सकारात्मकता देने वाली मानी जाती है क्योंकि चंद्रमा धरती के बहुत समीप होता है। शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा की किरणों में खास तरह के लवण व विटामिन आ जाते हैं। पृथ्वी के पास होने पर इसकी किरणें सीधे जब खाद्य पदार्थों पर पड़ती हैं तो उनकी क्वालिटी में बढ़ोतरी हो जाती है।
 शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सुबह उठकर व्रत करके अपने इष्ट देव का पूजन करना चाहिए। इन्द्र और महालक्ष्मी जी का पूजन करके घी का दीपक जलाकर, गंध पुष्प आदि से पूजन करना चाहिए। ब्राह्मणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा प्रदान करनी चाहिए।
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रूप से किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन जागरण करने वाले की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
 शरद पूनम की रात को क्या करें, क्या न करें ?
 अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं । जो भी इन्द्रियाँ शिथिल हो गयी हों, उनको पुष्ट करने के लिए चन्द्रमा की चाँदनी में खीर रखना और भगवान को भोग लगाकर अश्विनी कुमारों से प्रार्थना करना कि ‘हमारी इन्द्रियों का बल-ओज बढ़ायें ।’ फिर वह खीर खा लेना ।
इस रात सूई में धागा पिरोने का अभ्यास करने से नेत्रज्योति बढ़ती है ।
शरद पूर्णिमा की चन्द्रमा की चाँदनी गर्भवती महिला की नाभि पर पड़े तो गर्भ पुष्ट होता है ।
 अमावस्या और पूर्णिमा को चन्द्रमा के विशेष प्रभाव से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है । जब चन्द्रमा इतने बड़े दिगम्बर समुद्र में उथल-पुथल कर विशेष कम्पायमान कर देता है तो हमारे शरीर में जो जलीय अंश है, सप्तधातुएँ हैं, सप्त रंग हैं, उन पर भी चन्द्रमा का प्रभाव पड़ता है । इन दिनों में अगर काम-विकार भोगा तो विकलांग संतान अथवा जानलेवा बीमारी हो जाती है और यदि उपवास, व्रत तथा सत्संग किया तो तन तंदुरुस्त, मन प्रसन्न होता है।
 खीर को बनायें अमृतमय प्रसाद...
खीर को रसराज कहते हैं । सीताजी को अशोक वाटिका में रखा गया था । रावण के घर का क्या खायेंगी सीताजी ! तो इन्द्रदेव उन्हें खीर भेजते थे ।
खीर बनाते समय घर में चाँदी का गिलास आदि जो बर्तन हो, आजकल जो मेटल (धातु) का बनाकर चाँदी के नाम से देते हैं वह नहीं, असली चाँदी के बर्तन अथवा असली सोना धोकर खीर में डाल दो तो उसमें रजतक्षार या सुवर्णक्षार आयेंगे । लोहे की कड़ाही अथवा पतीली में खीर बनाओ तो लौह तत्त्व भी उसमें आ जायेगा । खीर में इलायची, खजूर या छुहारा डाल सकते हो लेकिन बादाम, काजू, पिस्ता, चारोली ये रात को पचने में भारी पड़ेंगे । रात्रि 8 बजे महीन कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में रखी हुई खीर 11 बजे के बाद भगवान को भोग लगा के प्रसादरूप में खा लेनी चाहिए । लेकिन देर रात को खाते हैं इसलिए थोड़ी कम खाना । सुबह गर्म करके भी खा सकते हो ।
(खीर दूध, चावल, मिश्री, चाँदी, चन्द्रमा की चाँदनी - इन पंचश्वेतों से युक्त होती है, अतः सुबह बासी नहीं मानी जाती ।) यह खीर खाने से सालभर मनुष्य स्वथ्य रहता है ।
स्वास्थ्य प्रयोग...
इस रात्रि में 3-4 घंटे तक बदन पर चन्द्रमा की किरणों को अच्छी तरह पड़ने दें ।
दो पके सेवफल के टुकड़े करके शरद पूर्णिमा को रातभर चाँदनी में रखने से उनमें चन्द्रकिरणें और ओज के कण समा जाते हैं । सुबह खाली पेट सेवन करने से कुछ दिनों में स्वास्थ्य में आश्चर्यजनक लाभकारी परिवर्तन होते हैं ।
250 ग्राम दूध में 1-2 बादाम व 2-3 छुहारों के टुकड़े करके उबालें । फिर इस दूध को पतले सूती कपड़े से ढँककर चन्द्रमा की चाँदनी में 2-3 घंटे तक रख दें । यह दूध औषधीय गुणों से पुष्ट हो जायेगा । सुबह इस दूध को पी लें ।

सोंठ, काली मिर्च और लौंग डालकर उबाला हुआ दूध चाँदनी रात में 2-3 घंटे रखकर पीने से बार-बार जुकाम नहीं होता, सिरदर्द में लाभ होता है ।
तुलसी के 10-12 पत्ते एक कटोरी पानी में भिगोकर चाँदनी रात में 2-3 घंटे के लिए रख दें । फिर इन पत्तों को चबाकर खा लें व थोड़ा पानी पियें । बचे हुए पानी को छानकर एक-एक बूँद आँखों में डालें, नाभि में मलें तथा पैरों के तलुओं पर भी मलें । आँखों से धुँधला दिखना, बार-बार पानी आना आदि में इससे लाभ होता है । तुलसी के पानी की बूँदें चन्द्रकिरणों के संग मिलकर प्राकृतिक अमृत बन जाती हैं ।*
नोट : दूध व तुलसी के सेवन में दो घंटे का अंतर रखें ।
 भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, 'पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।'

अर्थात रसस्वरूप अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं।(गीताः15.13)
फिर स्वास्थ्य कोई बाजार में मिलने वाली बाजारु वस्तु नहीं है जो आज के शहरों में समाहित मानसिक गुलाम जीवन भर की कमाई का झोला लटकाए इस हास्पिटल उस हॉस्पिटल और बड़े-बड़े फार्मेसी और डॉक्टर के चक्कर लगाते फिर रहे हैं 
 पर ऐसे गुलामों को यह आभास भी नहीं है कि आज अमृत की बरसा भी होती है  जो अंग्रेजी काल गणना में नहीं केवल अपने भारतीय काल गणना में ही संभव है जो शरद ऋतु में अश्विन पूर्णिमा की रात में ही यह अद्भुत संयोग का साक्षात्कार कर पूरे वर्ष भर की निरोगी जीवन को साकार करते हैं
हमेशा मौसमी सब्ज़ी फल खाएं ।
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जो भी फल, सब्ज़ी अथवा आनाज हम खाते हैं, उनकी मियाद 15 से 90 दिन की होती है। इस बीच वे खा लिए गए तो अमृत अन्यथा भूसा। कोई भी फल, सब्ज़ी बारहों महीने उपयोगी नहीं होते और प्रकृति में पैदा होने वाली कोई चीज़ फ़िज़ूल नहीं होती। इसलिए इनका समयानुकूल प्रयोग ही स्वास्थ्यकारी है। अब आज के मौसम में मूली उपयोगी है, पर एक महीने बाद यह सरसों की जड़ होगी, जिसकी वह उपयोगिता नहीं होगी, जो आज की मूली में है। इसके बावजूद लोग वह सरसों की जड़ पराठों में भर कर खाएँगे और वातावरण को प्रदूषित करेंगे। आलू खाना हो, तो अभी रुकें। पंद्रह रोज़ बाद खाना शुरू करें। यानी दिवाली के बाद और होली के पहले तक। प्याज़ भी बारहों महीने नहीं, मार्च से जून तक खाना चाहिए। अमरूद का मौसम भी अब आया है और सेब व संतरे का भी। यह मौसम बाजरा और मक्का खाने का है तथा चावल का भी। गेहूं रबी की फसल है। इसीलिए इसे चने और जौ के साथ मिला कर खाया जाता है। जाड़े में उड़द की दाल खानी चाहिए और गर्मियों में अरहर तथा बरसात में मूँग। दाल कोई भी हो, शाम को न खाएँ। चावल सिर्फ़ उस क्षेत्र में पैदा होने वाला खाएँ, बासमती सिर्फ़ बास मारता है। धनिया, मिर्च और नींबू अगहन तक खा सकते हैं। अदरक शीत में। जो लोग बारहों महीने आम, अमरूद या सेब खाते हैं, उनकी नक़ल न करें। वे बेचारे बाज़ार के मारे हैं। उन्हें बाज़ारू चीजें ही पसंद हैं। इसलिए फल, सब्ज़ी और आनाज मौसम के अनुरूप खाएँ।
ध्यान रखें, बीमार वही पड़ता है जिसका आहार-विहार गड़बड़ होता है। कोरोना भी उसे ही सताता है। इसलिए कभी भी कुलक (किसान कुल कलंक) के चक्कर में न पड़ें। वे बाज़ार के लिए जोतते और बोते हैं।

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2020

अनमोल धातुएं के वर्तन गायबअब इसपर जहर का लेप टेफ्लान कोटिंग का षड्यंत्र


 

 ■ टेफलोन कोटिंग या काला जहर ????

टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों का इतना प्रचार या दुष्प्रचार हुआ कि आजकल हर घर में ये काली कोटिंग वाले बर्तन होना शान की बात समझी जाती है।
न जाने कितने ही ये टेफलोन कोटिंग वाले बर्तन हमारे घर में आ गये हैं, जैसे कि नॉन स्टिक तपेली (पतीली), तवा, फ्राई पेन आदि....अब इजी टू कुक, इजी टू क्लीन वाली छवि वाले ये बर्तन हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गए है।
मुझे आज भी दादी नानी वाला ज़माना याद आ जाता है, जब चमकते हुए बर्तन किसी भी घर के स्टेंडर्ड की निशानी माने जाते थे, लेकिन आजकल उनकी जगह इन काले बर्तनों ने ले ली है।
हम सब इन बर्तनों को अपने घर में बहुतायत से उपयोग में ले रहे हैं और शायद कोई बहुत बेहतर विकल्प नहीं मिल जाने तक आगे भी उपयोग करते रहेंगे।
किन्तु इनका उपयोग करते समय हम ये बात भूल जाते हैं कि ये काले बर्तन हमारे शरीर को भी काला करके नुकसान पहुंचा रहे हैं।
हम में से कई लोग यह बात जानते भी नहीं हैं कि वास्तव में ये बर्तन हमारी बीमारियाँ बढ़ा रहे हैं और इनका प्रयोग करके हम हमारे अपनों को ही तकलीफ दे रहे हैं।
टेफलोन को 20 वी शताब्दी की सबसे बेहतरीन केमिकल खोज में से एक माना गया है, जिसका प्रयोग इंजीनियरिंग के क्षेत्र जैसे कि स्पेस सुइट और पाइप में उर्जा रोधी के रूप में किया जा रहा है, किन्तु यह भी एक बड़ा सच है की ये टेफलोन कोटिंग का काला जहर स्वास्थ्य के लिए बना ही नहीं है और अत्यंत खतरनाक है।
इसके प्रयोग से श्वास की बीमारी, कैंसर, ह्रदय रोग आदि कई गंभीर बिमारियां भी होती देखी जा रही हैं।
यह भी सच है की जब टेफलोन कोटेड बर्तन को अधिक गर्म किया जाता है, तो आसपास के क्षेत्र में रह रहे पालतू पक्षियों की जान जाने का खतरा तुरंत ही काफी बढ़ जाता है।
एक न्यूज के अनुसार कुछ समय पहले एक घर के आसपास के 14 पालतू पक्षी तब मारे गए, जब टेफलोन के बर्तन को पहले से गरम किया गया और तेज आंच पर खाना बनाया गया ये पूरी घटना होने में सिर्फ 15 मिनिट लगे....टेफलोन कोटेड बर्तनों में सिर्फ 5 मिनिट में 700 डिग्री टेम्प्रेचर तक गर्म हो जाने की प्रवृति होती है और इसी दौरान 6 तरह की खतरनाक गैस वातावरण में फैल जाती हैं इनमे से 2 गैस ऐसी होती हैं जो केंसर को भी जन्म देती हैं।
अध्ययन बताते हैं कि टेफलोन को अधिक गर्म करने से पक्षियों के लिए हानिकारक टेफलोन टोक्सिकोसिस बनती है और इंसानों के लिए खतरनाक पोलिमर फ्यूम फीवर की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है टेफलोन कोटिंग से उत्पन्न होने वाले केमिकल के शरीर में जाने से होने वाली बीमारियाँ इस तरह की होती हैं....
1- पुरुष इनफर्टिलिटी - हाल ही में हुए एक सर्वे में ये बात सामने आई है कि लम्बे समय तक टेफलोन केमिकल के शरीर में जाने से पुरुष इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है और इससे सम्बंधित कई बीमारियाँ पुरुषों में देखी जा सकती हैं।
थायराइड - हाल ही में एक अमेरिकन एजेंसी द्वारा किया गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि टेफलोन की मात्र लगातार शरीर में जाने से थायराइड ग्रंथि सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है।
2- बच्चे को जन्म देने में समस्या - केलिफोर्निया में हुई एक स्टडी में ये पाया गया है कि जिन महिलाओं के शरीर में जल, भोजन या हवा के माध्यम से पी ऍफ़ ओ (टेफलोन) की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई थी, उन्हें बच्चो को जन्म देते समय अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ा. इसी के साथ उनमे बच्चो को जन्म देने की क्षमता भी अपेक्षाकृत कम हो गई, जिससे सीजेरियन ऑपरेशन करना पड़ा।
3- शारीरिक समस्याएं व अन्य बीमारियाँ - पी ऍफ़ ओ की अधिक मात्रा शरीर में पाई जाने वाली महिलाओं के बच्चो पर भी इसका असर जन्मजात शारीरिक विकार या समस्याओं के रूप में देखा गया है ।
4- लीवर केंसर का बढ़ा खतरा - एक अध्ययन में यह भी सामने आया है कि पी ऍफ़ ओ की अधिक मात्रा होने पर लीवर केंसर का खतरा बढ़ जाता है ।
5- केंसर या ब्रेन ट्यूमर का खतरा - एक प्रयोग के दौरान जब चूहों को पी ऍफ़ ओ के इंजेक्शन लगाए गए तो उनमे ब्रेन ट्यूमर विकसित हो गया. साथ ही केंसर के लक्षण भी दिखाई देने लगे।
6- जहरीला पी ऍफ़ ओ 4 साल तक शरीर में बना रहता है - पी ऍफ़ ओ जब एक बार शरीर के अन्दर चला जाता है तो लगभग 4 साल तक शरीर में बना रहता है जो एक बड़ा खतरा हो जाता है।
■ टेफलोन के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय...
1- टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों को कभी भी गैस पर बिना कोई सामान डाले अकेले गर्म करने के लिए न छोड़े।
2- इन बर्तनों को कभी भी 450 डिग्री से अधिक टेम्प्रेचर पर गर्म न करे सामान्यतया इन्हें 350 से 450 डिग्री तक गर्म करना बेहतर होता है।
3- लेकिन हमारे देश में महिलाओं को पता ही नहीं रहता है कि गेस के बर्नर पर रखे बर्तन का टेम्प्रेचर कितना हुआ है, तो वे कंट्रोल कैसे करेंगी???
4- टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों में पक रहा खाना बनाने के लिए कभी भी मेटल की चम्मचो का इस्तेमाल ना करे इनसे कोटिंग हटने का खतरा बढ़ जाता है।
5- टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों को कभी भी लोहे के औजार या कूंचे ब्रश से साफ़ ना करे, हाथ या स्पंज से ही इन्हें साफ़ करे।
6- इन बर्तनों को कभी भी एक दूसरे के ऊपर जमाकर ना रखे।
7- घर में अगर पालतू पक्षी हैं, तो इन्हें अपने किचन से दूर रखें।
8- अगर गलती से घर में ऐसा कोई बर्तन ज्यादा टेम्प्रेचर पर गर्म हो गया है, तो कुछ देर के लिए घर से बाहर चले जाए और सारे खिड़की दरवाजे खोल दे।
9- ये गलती बार-बार ना दोहराएं, क्यूंकि चारो ओर के वातावरण के लिए भी ये गैस हानिकारक होती हैं और लाखों सूक्ष्म जीवों को भी मार देती हैं।
10- टूटे या जगह-जगह से घिसे हुए टेफलोन कोटिंग वाले बर्तनों का उपयोग बंद कर दे. क्यूंकि ये धीरे धीरे आपके भोजन में ज़हर घोल सकते हैं।
11- अगर आपके बर्तन नहीं भी घिसे हैं, तो भी इन्हें हर दो साल में अवश्य ही बदल दें।
12- जहाँ तक हो सके इन बर्तनों कम ही प्रयोग करिए।
13- इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपने और अपने परिवार के स्वास्थ को बेहतर बना सकते हैं...
टेफलोन कोटिंग के काले जहर से अपने परिवार को बचाएं।

सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...