शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

विशुद्धानंद परमहंस सूर्य साधक गंध बाब हिमालय की रहस्यमई और रोमांचकारी दुनिया के

   

  हिमालय के जितने अंदर जाएंगे, उतनी हमें नई जानकारियां उपलब्ध होती जाएंगी। देवात्मा हिमालय का वर्णन अवर्णनीय है। कहते हैं हिमालय में बडे-बडे आश्रम हैं। जहां पर आज भी सैकडों साधक अपनी-अपनी साधना में लगे हुए हैं। हिमालय की हसीन वादियों में छुपा है एक गहरा राज़.. राज़ उन अनजाने चेहरों का जो इस दुनिया में कहीं नहीं दिखाई देते, राज़ उन अनजाने लोगों को जिन्हें इस दुनिया का नहीं कहा जा सकता. ये रहस्य करीब 250 साल पुराना है और इसे जानने के लिए हिमालय की बर्फीली घाटियों में तांत्रिक कर रहे हैं अब तक की सबसे बड़ी साधना; कहते हैं हिमालय में बडे-बडे आश्रम हैं। जहां पर आज भी सैकडों साधक अपनी-अपनी साधना में लगे हुए हैं। ऐसे ही इस हिमाच्छादित प्रदेश में अनंत रहस्यों से भरा है एक मठ जिसका नाम है ज्ञानगंज। वैसे तो इस आश्रम की स्थापना एक हजार पांच सौ वर्ष पूर्व हुई थी परन्तु इसको प्रकट करने का श्रेय जाता है बनारस के मायावी या गंधबाबा के नाम से प्रसिद्ध स्वामी श्री विशुद्धानंद परमहंस को। हम हिमालय के जितने अंदर जाएंगे, उतनी हमें नई जानकारियां उपलब्ध होती जाएंगी। देवात्मा हिमालय का वर्णन अवर्णनीय है। महर्षि महातपा की उम्र है लगभग १४०० वर्ष जो अधिकतर निराहार ही रहते हैं। श्री भृगराम परमहंस देव जी लगभग ४५० वर्ष के हैं। इसके अलावा पायलट बाबा का भी कहना है कि वह हिमालय में छह-छह माह निराहार रहते है। हिमालय के रहस्यमय व दिव्य स्वरुप के बारे में उनकी दो पुस्तकें बेजोड हैं
  "गंध बाबा"
(रोचक,विस्मयकारी जानकारी)
गंध बाबा के नाम से प्रसिद्ध विशुद्धानंद परमहंस सूर्य विग्यान के प्रवर्तक माने जाते हैं। वे तत्काल कोई भी गंध पैदा कर सकते थे। गुलाब, चमेली, केवड़ा और ऐसे ही अनंत फूलों का गंध पैदा करने में उन्हें एक सेकेंड लगता था। वे सिर्फ गंध ही नहीं, फल, मिठाई या कुछ भी हवा से पैदा कर देते थे। लेकिन ठहरिए। हवा से नहीं, सूर्य की किरणों से पैदा करते थे क्योंकि सूर्य विग्यान में वे पारंगत थे। तो फिर रात को सूर्य की किरणें कहां रहती हैं? उनका कहना था सूर्य की किरणों का प्रभाव रात में भी रहता ही है। सूर्य विग्यान, चंद्र विग्यान, नक्षत्र विग्यान, वायु विग्यान और शब्द विग्यान पर उनकी पुस्तकें आज भी मिल सकती हैं। वे एक वस्तु को दूसरे में बदलने में माहिर थे। यानी आपके सामने अगर एक गिलास रखा है तो उसे वे बड़े मेज में बदल सकते थे। गंध बाबा यानी विशुद्धानंद सरस्वती १८वीं शताब्दी में पैदा हुए और उनका निधन १९३७ में हुआ था। यह प्रश्न सहज ही उठ सकता है कि उनकी जन्मतिथि कैसे पता चलेगी? जैसा कि अनेक संतों के साथ यह रहस्य है, गंध बाबा की प्रामाणिक जन्म तिथि कहीं उपलब्ध नहीं है। उनके एक प्रसिद्ध भक्त गोपीनाथ कविराज ने लिखा है कि एक बार वे सिद्धियों के बारे में उन्हें (गोपीनाथ कविराज को) समझा रहे थे। इसी क्रम में उन्होंने अपनी तर्जनी उंगली को इतना लंबा और मोटा कर दिया कि वे अवाक् रह गए। गोपीनाथ कविराज काफी दिनों तक वाराणसी में रहे औऱ बाद में वे कोलकाता के पास मध्यमग्राम नामक इलाके में बस गए औऱ अंतिम समय तक वहीं रहे। वे गंध बाबा के बहुत करीबी शिष्य थे और उच्च कोटि के साधक थे। उन्होंने भी विस्तार से अपने गुरु के बारे में लिखा है। गंध बाबा का कहना था कि मान लीजिए कपूर बनाना है। तो सूर्य की श्वेत रश्मियों के ऊपर क म त र शब्द स्थापित कर देने से कपूर तत्काल आपके सामने हाजिर हो जाएगा। लेकिन कपूर में तो म या त शब्द है ही नहीं? इस पर वे मुस्करा देते थे। यानी यह रहस्य है। बहरहाल गंध बाबा कहते थे कि यह सब चमत्कार ईश्वर की शक्तियों का मामूली अंश है। कोई भी यह चमत्कार कर सकता है, बशर्ते कि उसमें एकाग्रता और अत्यंत गहरी आस्था हो।

मंगलवार, 17 नवंबर 2020

शनि देव के काले रुप का कारण ब्रम्हर्षि दधिची और उनके पुत्र पिप्लादि बनें


  श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं। इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा।जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा।
एक दिन देवर्षि नारद वहाँ से गुजरे। नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देखकर उसका परिचय पूंछा-
नारद- बालक तुम कौन हो ?
बालक- यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ ।
नारद- तुम्हारे जनक कौन हैं ?
बालक- यही तो मैं जानना चाहता हूँ ।
तब नारद ने ध्यान धर देखा।नारद ने आश्चर्यचकित हो बताया कि हे बालक ! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो। तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी। नारद ने बताया कि तुम्हारे पिता दधीचि की मृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही हो गयी थी।
बालक- मेरे पिता की अकाल मृत्यु का कारण क्या था ?
नारद- तुम्हारे पिता पर शनिदेव की महादशा थी।
बालक- मेरे ऊपर आयी विपत्ति का कारण क्या था ?
नारद- शनिदेव की महादशा।
इतना बताकर देवर्षि नारद ने पीपल के पत्तों और गोदों को खाकर जीने वाले बालक का नाम पिप्पलाद रखा और उसे दीक्षित किया।
नारद के जाने के बाद बालक पिप्पलाद ने नारद के बताए अनुसार ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। ब्रह्मा जी ने जब बालक पिप्पलाद से वर मांगने को कहा तो पिप्पलाद ने अपनी दृष्टि मात्र से किसी भी वस्तु को जलाने की शक्ति माँगी।ब्रह्मा जी से वर्य मिलने पर सर्वप्रथम पिप्पलाद ने शनि देव का आह्वाहन कर अपने सम्मुख प्रस्तुत किया और सामने पाकर आँखे खोलकर भष्म करना शुरू कर दिया।शनिदेव सशरीर जलने लगे। ब्रह्मांड में कोलाहल मच गया। सूर्यपुत्र शनि की रक्षा में सारे देव विफल हो गए। सूर्य भी अपनी आंखों के सामने अपने पुत्र को जलता हुआ देखकर ब्रह्मा जी से बचाने हेतु विनय करने लगे।अन्ततः ब्रह्मा जी स्वयम् पिप्पलाद के सम्मुख पधारे और शनिदेव को छोड़ने की बात कही किन्तु पिप्पलाद तैयार नहीं हुए।ब्रह्मा जी ने एक के बदले दो वर्य मांगने की बात कही। तब पिप्पलाद ने खुश होकर निम्नवत दो वरदान मांगे-

1- जन्म से 5 वर्ष तक किसी भी बालक की कुंडली में शनि का स्थान नहीं होगा।जिससे कोई और बालक मेरे जैसा अनाथ न हो।

2- मुझ अनाथ को शरण पीपल वृक्ष ने दी है। अतः जो भी व्यक्ति सूर्योदय के पूर्व पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाएगा उसपर शनि की महादशा का असर नहीं होगा।

ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह वरदान दिया।तब पिप्पलाद ने जलते हुए शनि को अपने ब्रह्मदण्ड से उनके पैरों पर आघात करके उन्हें मुक्त कर दिया । जिससे शनिदेव के पैर क्षतिग्रस्त हो गए और वे पहले जैसी तेजी से चलने लायक नहीं रहे।अतः तभी से शनि "शनै:चरति य: शनैश्चर:" अर्थात जो धीरे चलता है वही शनैश्चर है, कहलाये और शनि आग में जलने के कारण काली काया वाले अंग भंग रूप में हो गए।
सम्प्रति शनि की काली मूर्ति और पीपल वृक्ष की पूजा का यही धार्मिक हेतु है।आगे चलकर पिप्पलाद ने प्रश्न उपनिषद की रचना की,जो आज भी ज्ञान का वृहद भंडार है  



सोमवार, 16 नवंबर 2020

भैया दूज अन्नकूट का महत्व भारतीय संस्कृति में



 
भारत की सनातन संस्कृति प्रकृति के साथ संबंधों से उत्सव और आनंद के साथ सह जीवन जीने की एक बड़ी श्रेष्ठ परंपरा आज भी हमारे गांव में लोक ब्यवहार व त्योहार में प्रचलित हैं  अच्छा या बुरा दोनों की परिकल्पना हम अपनी जरुरत के हिसाब से तय करते हैं पर अच्छा बुरा,दिन रात, कांटे और फूल सब कुछ यह इश्वर की सृष्टि का भाग है इसी को चरितार्थ करते हुए इस भैयादूज अन्नकूट के उत्सव में यह देखने को मिलता है जो उपेक्षित है उसे भी आज एक विशेष सादर और सम्मान दिया जाता है चाहे वह कांटे या कटीली झाड़ियां जो कभी पूजी नहीं जाती आज उनका पूजन का विधान है। बहन बेटियों को केवल देने का विधान था आज उनके घर जाकर भोजन करने का भी विधान गंगा स्नान का एक विशेष महत्व पूरे साल भर व जीवन भर रहता है पर आज यमुना का भी पूजन और स्नान का विधान व कलम दवात के पूजन का विधान  इस उत्सव में मनाया जाता । प्रकृति की दी हुई सभी वस्तुओं को आदर और सम्मान करने का यह उत्सव है। पर इस आधुनिक भोग वादी व्यवस्था में सब तहस नहस हो गया है इसमें इस डिग्रीधारी शिक्षा व्यवस्था का बहुत बड़ा और मुख्य योगदान है

मित्रोआज पंच दिवसीय त्यौहार दिवाली
का आखिरी दिन भैया दूज है, आपको आपके परिवार को इस पावन पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं!!!!!!!!!

भाई दूज का त्योहार भाई बहन के स्नेह को सुदृढ़ करता है। यह त्योहार दीवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक दो त्योहार मनाये जाते हैं - एक रक्षाबंधन जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसमें भाई बहन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करता है। दूसरा त्योहार, 'भाई दूज' का होता है। इसमें बहनें भाई की लम्बी आयु की प्रार्थना करती हैं। भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास की द्वितीया को मनाया जाता है।
भैया दूज को भ्रातृ द्वितीया भी कहते हैं। इस पर्व का प्रमुख लक्ष्य भाई तथा बहन के पावन संबंध व प्रेमभाव की स्थापना करना है। इस दिन बहनें बेरी पूजन भी करती हैं। इस दिन बहनें भाइयों के स्वस्थ तथा दीर्घायु होने की मंगल कामना करके तिलक लगाती हैं। इस दिन बहनें भाइयों को तेल मलकर गंगा यमुना में स्नान भी कराती हैं। यदि गंगा यमुना में नहीं नहाया जा सके तो भाई को बहन के घर नहाना चाहिए।

यदि बहन अपने हाथ से भाई को जीमाए तो भाई की उम्र बढ़ती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन चाहिए कि बहनें भाइयों को चावल खिलाएं। इस दिन बहन के घर भोजन करने का विशेष महत्व है। बहन चचेरी अथवा ममेरी कोई भी हो सकती है। यदि कोई बहन न हो तो गाय, नदी आदि स्त्रीत्व पदार्थ का ध्यान करके अथवा उसके समीप बैठ कर भोजन कर लेना भी शुभ माना जाता है।

इस दिन गोधन कूटने की प्रथा भी है। गोबर की मानव मूर्ति बना कर छाती पर ईंट रखकर स्त्रियां उसे मूसलों से तोड़ती हैं। स्त्रियां घर-घर जाकर चना, गूम तथा भटकैया चराव कर जिव्हा को भटकैया के कांटे से दागती भी हैं। दोपहर पर्यन्त यह सब करके बहन भाई पूजा विधान से इस पर्व को प्रसन्नता से मनाते हैं। इस दिन यमराज तथा यमुना जी के पूजन का विशेष महत्व है।

भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी। वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा। कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया।
यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया।
यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी। ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है

रविवार, 15 नवंबर 2020

लोक जीवन में गोवर्धन पूजा, विश्वकर्मा दिवस, महावीर स्वामी निर्वाण दिवस, वृश्चिक सक्रांति, अन्नकूट उत्सव धार जिले का एक विशेष वीडियो भी संलग्न

  


#गौवर्धन_अन्नकूट_पूजा.
दीपोत्सव के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है, इसे अन्नकूट पर्व के नाम से भी मनाया जाता है. इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध स्पष्ट दिखाई देता है. हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार गाय उसी प्रकार पवित्र होती जैसे नदियों में मां गंगा को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. गाय को मां लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप कहा गया है, मां लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं, उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से उत्तम स्वास्थ्य रूपी सौभाग्य, आरोग्य, दीर्घायु और धन आदि प्रदान करती हैं और गाय का बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है, इस तरह गौ माता के साथ सम्पूर्ण गौवंश मानव मात्र के लिए वंदनीय, पूजनीय और आदरणीय है. अतः गौमाता के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन गोर्वधन पूजा की जाती हैं. भारत के लोग जीवन में भी आज के दिन गाय के प्रति श्रद्धा और उल्लास का आज सर्वोत्तम उदाहरण आज भीद मिलता है इस वीडियो में आप को दिखाया गया है

मध्य प्रदके धार जिले के दसाई गांव में दीपावली के दूसरे दिन यानि गोवर्धन पूजा के दिन गाय गोहरी पर्व मनाया जाता है। जिसमें मन्नत मांगने वाले लोग औंधे मुंह सोकर अपने उपर से पूरे गांव की गौमाता को गुजरवाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि उन लोगों को कोई चोट नहीं आती बल्कि वे साल भर स्वस्थ रहते हैं। वन्दे गौ मातरम्।

आज का पंचांग - शरद ऋतु, कार्तिक मास, कृष्ण/शुक्ल पक्ष, विशाखा नक्षत्र, अमावस्या/प्रतिपदा तिथि, रविवार, गोवर्धन पूजा, विश्वकर्मा दिवस, महावीर स्वामी निर्वाण दिवस, वृश्चिक सक्रांति, अन्नकूट, अमावस्या पुण्य, देव कार्य एवं स्नान दान की अमावस्या, राहुकाल शाम 4:30 बजे से रात्रि 6:00 बजे तक, दिशाशूल पश्चिम दिशा में, सूर्य दक्षिणायन, युगाब्‍द 5122, सूक्ष्म मान से आनंद और स्थूल मान से प्रमादी नामक विक्रमी संवत 2077 तदानुसार 15 नवंबर सन 2020.

गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है, प्राचीन काल में एक बार देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था, देवराज इन्द्र का अभिमान चूर करने के लिए श्रीकृष्ण जो स्वयं भगवान श्रीविष्णु के अवतार हैं, ने एक लीला रची जिसमें एक दिन उन्होंने देखा कि सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे हैं, श्रीकृष्ण ने मां यशोदा से पूछा मां आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं. मां यशोदा नें बताया कि लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं. श्रीकृष्ण ने पूछा मां हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं ? मां यशोदा ने कहा वह वर्षा करते हैं, जिससे अन्न की पैदावार होती है, उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है. श्रीकृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और देवराज इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं, अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए. लीलाधारी श्रीकृष्ण की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की. देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और बदले में मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी, प्रलय के समान वर्षा देख कर सभी बृजवासी श्रीकृष्ण को कोसने लगे कि सब इन का कहा मानने से हुआ है. तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसके नीचे अपने समस्त गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया. देवराज इन्द्र श्रीकृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी. देवराज इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें, देवराज इन्द्र लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे एहसास हुआ कि उनका मुकाबला करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता, अत: वे प्रजापति ब्रह्मा के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया. प्रजापति ब्रह्मा ने देवराज इन्द्र से कहा कि आप जिस श्रीकृष्ण की बात कर रहे हैं वह तो भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं और पूर्ण पुरूषोत्तम नारायण हैं. प्रजापति ब्रह्मा के श्रीमुंख से यह सुनकर देवराज इन्द्र अत्यंत लज्जित हुए और श्रीकृष्ण से कहा कि हे प्रभु! मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा, आप तो दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल को क्षमा करें तत्पश्चात देवराज इन्द्र ने मुरलीधर श्रीकृष्ण की पूजा आराधना कर उन्हें भोग लगाया. भगवान श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर सभी को हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने को कहा, तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा.

गोवर्धन पूजा के दिन ब्रह्ममुहूर्त जागरण कर दैनिक कार्यों से निवृत्त हो शरीर पर तेल मलकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें. निवास स्थान अथवा देवस्थान के मुख्‍यद्वार के सामने प्रात: गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं, उसे वृक्ष, शाखा एवं पुष्प इत्यादि से श्रृंगारित करें. गोवर्धन पर्वत का अक्षत, पुष्प आदि से विधिवत पूजन करें, पूजन करते समय निम्न प्रार्थना करें -
गौवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक,
विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव.

दीपोत्सव की रात्रि को निमंत्रित की हुई गायों को स्नान कराएं, गायों को विभिन्न अलंकारों, मेहंदी आदि से श्रृंगारित करें, उनका गंध, अक्षत, पुष्प से पूजन करें, नैवेद्य अर्पित कर निम्न मंत्र से प्रार्थना करें -
लक्ष्मीर्या लोक पालानाम् धेनुरूपेण संस्थिता,
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु.

सायंकाल पश्चात पूजित गायों से पूजित गोवर्धन पर्वत का मर्दन कराएं, उस गोबर से घर-आंगन में लेपन कर वैदिक परंपरा में इंद्र, वरुण, अग्नि, विष्णु आदि देवताओं की पूजा व हवन का विधान है. गौवर्धन पूजा से पूर्व ॐ श्री कृष्णाय शरणं मम: मंत्र का उच्चारण अवश्य करें.
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने,
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः

ॐ नमः भगवते वासुदेवाय कृष्णाय
क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे हरे.
हरे राम हरे राम, राम-राम हरे हरे.

अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी आयु तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है, दारिद्रय का नाश होकर मनुष्य जीवन पर्यंत सुखी और समृद्ध रहता है. ऐसा माना जाता है कि यदि इस दिन कोई मनुष्य दुखी रहता है तो वह वर्ष भर दुखी ही रहेगा, इसलिए हर मनुष्य को इस दिन प्रसन्न रहकर भगवान श्रीकृष्‍ण को प्रिय अन्नकूट उत्सव को भक्तिपूर्वक तथा आनंदपूर्वक मनाना चाहिए.
सादर आभार




मंगलवार, 10 नवंबर 2020

क्रिस्चियन मिशनरीयों का खुलेआम जंग का एलान सालवेशन आर्मी के द्वारा






 इन पादरियों के गुनाह कौन माफ करेगा?
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अपने किये गुनाह की माफी के लिए धार्मिक समुदाओं में अलग-अलग रिवाज हैं। ईसाई कहते हैं कि अपने पाप प्रत्येक रविवार को चर्च में जाकर कन्फेन्श करके खत्म कर दो…..
इसके लिए बाकायदा चर्च में एक किनारे पर एक बंद सा केबिन होता है। जिसे कन्फेशन रूम या केबिन कहा जाता है…..
केरल के कोट्टयम के चर्च में एक ईसाई महिला भी अपने गुनाह की माफी मांगने इसी केबिन में गयी थी……
पता नहीं जीसस ने उसकी फरियाद सुनी या नहीं सुनी! लेकिन एक पादरी ने केबिन के अंदर बैठकर उसका कबूलनामा सुना था, वह उल्टा उस औरत को ब्लैकमेल करने लगा। उसने महिला का यौन शोषण किया फिर अन्य पादरी भी इसमें शामिल हो गए……
अब जाकर महिला के पति को ये बात मालूम चली। उसने चर्च को शिकायती चिट्ठी भेजी। जब चर्च के अधिकारियों के लिए इस सच से मुंह मोड़ना मुश्किल हो गया, तो अधिकारियों के पास अपने पंथ की इज्जत बचाने के लिए इसे स्वीकार करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा ताकि चर्च के अनुयायियों को दूसरे लोगों से मुंह छिपाते न फिरना पड़े इस कारण पांचों आरोपी पादरियों को छुट्टी पर भेज दिया है……

अपनी आध्यात्मिक उपलब्धियों का दुरुपयोग, शारीरिक सुख प्राप्त करने की वजह से दुनिया भर के कैथोलिक चर्च आज सैक्स स्कैंडलों की बड़ी बदनामी झेल रहे हैं…..
समूचे यूरोप और अमेरिका सहित अनेक देशों में पादरियों के सैक्स किस्से लोगों की जुबान पर हैं। अगर केवल कल तक में झांक कर देखें तो चर्च के नाम पर भोगविलास में लिप्त इन तथाकथित ईश्वर पुत्रों की सूची आसमान की दूरी तरह लंबी होती चली जाएगी….
बीबीसी की रिपोर्ट में दिया गया था कि आस्ट्रेलिया में एक जांच के दौरान पता चला है कि देश के करीब 40 फीसदी चर्च पर बच्चों के यौन शोषण के आरोप है….

बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों पर नजर रखने वाली रॉयल कमीशन के पास 1980 से 2015 के बीच करीब 4,500 लोगों ने यौन शोषण होने की शिकायत दर्ज कराई थी।

इसके बाद वेटिकन के तमाम प्रयासों के बावजूद पादरियों के कुकर्मों की पोल खुलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पादरियों के यौन दुराचार की बातें उजागर होते देख चर्च को अपनी चूलें हिलती दिख रही हैं इसी वजह से कुछ साल पहले 16 वें पोप बेनेडिक्ट जगह-जगह जाकर प्रार्थना करने के बजाय अपने लंपट पादरियों के कुकर्मों के लिए माफी मांगते नजर आये थे। पीड़ित लोगों से मिल रहे थे और बेहद शर्मिंदगी व दुःख जता रहे हैं कारण सदियों तक जो बात ढ़की रहती थी, अब छिपाए छिप नहीं पा रही और चर्च का यौनसुख अब संकट में है। क्योंकि अब आम जनता के नैतिकता के पैमाने बदल गए हैं…..

हालाँकि चर्चों का ये यौनसुख नया नहीं है काफी समय से चर्च अपने पादरियों की नाजायज संतानों की समस्या को भी झेल रहा है। अमेरिका, यूरोप और आस्ट्रेलिया में कई औरतें पादरियों से गर्भवती होकर उनके अवैध बच्चों को पालने पर मजबूर हैं। कई चर्चों से इन औरतों से समझौते पर साइन करवा कर मुआवजे दे दिए गए हैं......
चर्च के सैक्स स्कैंडलों की बदनामी से वैटिकन सिटी बार-बार मीडिया की आलोचना भी करता रहा है लेकिन वैटिकन इन मामलों को रोक नहीं पा रहा है। चर्चों के सैक्स किस्से घटने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं……
न्यूयार्क टाइम्स की सैक्स स्कैंडलों पर कवरेज के लिए आलोचना की गई थी कारण अखबार ने 200 बहरे बच्चों के साथ एक पादरी की दुराचार की खबरें प्रकाशित की थीं।

अपने देश में ही देखें तो में केरल के कन्नूर जिले में एक कैथलिक पादरी पर एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने का इल्जाम लगा था। आरोप था कि पादरी ने उस लड़की का कन्फेशन सुनकर उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था। इसी वर्ष पटना में एक पादरी चंद्र कुमार कथित तौर पर कई महिलाओं का धर्म परिवर्तन करा कर उनका यौन शोषण करता था। जिन्हें पिछले 6 महीनों से वह अपनी हवस का शिकार बना रहा था। इसी दौरान त्रिसूर में एक कैथोलिक पादरी को नौ वर्ष की एक लड़की द्वारा लैंगिक शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।

ये तमाम रिपोर्ट किसी को भी शर्मसार करने के लिए काफी है। ये पांचो आरोपी पादरी फादर जॉब मैथ्यू, फादर अब्राहम वर्गीज, फादर जेस के जॉर्ज, फादर जॉनसन वी मैथ्यू और फादर जीजो जे अब्राहम भी कन्फेशन रूम में अपने किये कृत्यों की माफी मांग लें और चर्च की तरफ से मामला रफा-दफा हो जाये पर लोगों के मन में उफन रहे सवाल कैसे रफा-दफा होंगे कि इन पादरियों के गुनाह कौन माफ करेगा?
कौन माफ़ करेगा .... गरीब बच्चों के नाम पर विदेशों से धन इकठ्ठा किया और खुद के यासी में लगाया .....
केरल के बिलीवर्स ईस्टर्न चर्च पर आयकर विभाग ने कर चोरी करने का दावा करते हुए छापा मारा है। आयकर विभाग ने इस चर्च के मुखिया और इसाई धर्म प्रचारक केपी योहानन के घर और ऑफिस में रेड डाली है। इस चर्च पर आरोप लगा है कि वह चैरिटी फंड का इस्तेमाल धार्मिक और निजी कार्यों के लिए कर रहा है।
आरोप लगाया गया है कि चर्च के मुखिया केपी योहानन ने गरीबों के नाम पर विदेश से धन इकट्ठा किया और उसका इस्तेमाल रियल एस्टेट क्षेत्र में और अपने निजी इन्वेस्टमेंट में किया। इस बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली गई थी जिसके आधार पर यह छापेमारी की कार्रवाई की गई।
बताया जा रहा है कि आईटी विभाग को इस बारे में सूत्रों से कई अहम जानकारी मिली थी। अधिकारियों ने चर्च मुखिया के घर पर खड़ी एक गाड़ी से 57 लाख रुपए और कुछ फोन भी बरामद किए थे।
एक रिपोर्ट के अनुसार छापेमारी अभियान गुरूवार से शुरू हुआ था जो अभी तक केरल समेत देश के कई दूसरे क्षेत्रों में जारी है। अभी तक कई परिसरों से लगभग 8 करोड़ रुपए जब्त किए जा चुके हैं। बताते चले कि 2012 में भी राज्य सरकार ने चर्च मुखिया केपी योहनन के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए थे।
वहीँ, इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों के मुताबिक केरल के 'बीलीवर्स ईस्टर्न चर्च' देशभर में कई पूजास्थलों, विद्यालयों, कॉलेजों तथा केरल में एक मेडिकल कॉलेज और एक अस्पताल को चलाता है। इस चर्च को गरीबों और अनाथों की मदद के लिये विदेश से दान मिलता है, लेकिन असल में इस तरह के टैक्स फ्री फंड का प्रॉपर्टी के में निजी और अन्य अवैध खर्चों के लिये बेहिसाब नकद लेनदेन में इस्तेमाल किया गया था।
अभी भी लोगों को समझ नहीं आये तो क्या किया जाये ...
ध्यान रहे ईसाई तो अपनी बात कर रहे है ... प्रचार कर रहे है .... पर हम अपने विचारों का प्रचार नहीं कर रहे है .....
हमें अपने सनातन विचारों का प्रचार करना ही होगा ....
उससे पहले अपने सनातन धर्म को हमें खुद समझना होगा ..... और पूर्ण आस्था के साथ उसको मानना भी होगा .....
नहीं तो हमारे परिवार के सदस्य उनके विचारों से प्रभावित हो कर उनके पास जायेंगे और वासना के शिकार होंगें ....
सनातन धर्म के मूल्यों को समझे और समझाएं .
https://youtu.be/06N0Bce9zfw

 https://youtu.be/kaUQ6VGD4Lw

 https://youtu.be/2YzX05w1FyU

 



 

सोमवार, 9 नवंबर 2020

मनुष्य को निर्वीज नष्ट भ्रष्ट कर समाप्त करने की तैयारी पशुओं पौधों की परीक्षण पूर्ण इस GM टेक्नोलॉजी से

 


 


 
यह करवा रहे हैं वैज्ञानिक जो कभी इन जानवरों ने भी करना नहीं चाहा, #भगवान बनना चाहता है #इंसान।।
यह सिंह (टाइगर) और बब्बर शेर का वर्ण सङ्कर बच्चा है, इसे #Tigon कहते हैं, यह न शिकार कर सकता है न अपना शरीर संभाल सकता है।
दुनिया के 2 सर्वश्रेष्ठ शिकारियों का वर्ण संकर भी किसी काम का नहीं है।
#प्रकृति के कानूनों में छेड़ छाड़ दुनिया तबाह कर रही है।।
  आईवीएफ नामक व्यापार जो अरबों खरबो का होता जा रहा है। जल्दी ही क्रिकेट को स्पॉन्सर करते हुए दिख गए तो समझ जाना की षड्यंत्र सफल हुआ। जैसे खेतों के लिए अब बीज से बीज नहीं होते वैसे ही अब इंसानो से बच्चे नहीं होंगे। बीज बाज़ार से लाने पड़ते हैं तो बच्चे भी बाज़ार से लाने पड़ेंगे।
कृत्रिम बच्चे।
इन का लक्ष्य है 2050 तक सब बच्चे ऐसे ही पैदा हो। एकता तुषार शाहरुख़ करण इस के सेल्स और मार्केटिंग वाले है। ये सब थोड़ा और मेहनत कर रहे हैं जाति, परिवार ,गोत्र,कुल  सब नष्ट करने की योजना है भारत से परिवार प्रथा ख़त्म करो विवाह प्रथा पर भी कुठाराघात किया जा रहा है। एक तीर दो निशाने भारत की संस्कृति मिटाओ और आईवीएफ़ से पैसा कमाओ। बीज बो रहे हैं ये एक भ्रष्ट समाज और परिवार का।        अब चाहे आपकी पूर्वजों के साथ कितना भी अत्याचार हुआ हो चाहे आपकी कोई भी संस्कृति रही हो या आपके खानदान और उनकी कोई भी मर्यादा रही हो चाहे नीचे दिए गए वीडियो में चाहे कितना भी राजीव दीक्षित कितना भी चिल्लाऐं  अब कोई लड़ने वाला नया नौजवान पैदा ही नहीं होगा अभी बीज ही नष्ट हो जाए उनकी योजना का यह मूल प्रयास है क्योंकि हो सकता है अगर बीज है तो कोई गुरु कोई अब इस बीज बचाने में केवल श्रेष्ठ गुरुकुल ज्ञान गाय और गांव से ही इन षड्यंत्रों से बचा जा सकता है अब एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान
केवल श्रेष्ठ बौद्धिक विचार से युक्त कर्मशील ही संपर्क करें
गुरुकुल की व्यवस्था के लिए whatsapp संपर्क 9336919081 कॉल  7984113987 इसका फोटो स्टेटस में देखें


  जितेंद्र को जानते हो?
वो ही ताकि ताकि ........ताकिताकि ताकि रे जब से तू आँख में झाँकी रे। बहुत ही हारामी चीज है। इस की ममेरी बहन ने इस पर बलटकार का आरोप लगाया । बलटकार 1971 में हुआ था और FIR 2018 में करी। असल में बलटकार हुआ ही नहीं था ये तो metoo की स्क्रिप्ट थी। चुनाव नहीं आते तो अब तक क़ानून बन गया होता। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी फूल मूड में थी जनसुनवाई की, कमेटी और क़ानून बनाने की तैयारी थी। कोई नहीं चुनाव के बाद हो जाएगा। जितेंद्र की ममेरी बहन को पैसा मिला होगा अच्छा ख़ासा बलटकार की कहानी के लिए। पैसा बड़ी चीज़ है।
जितेंद्र का एक बेटा है तुषार कपूर ए ओ आई ओ मा अ अ चो..... ऐसी औलाद को जन्म भर बैठ कर खिलाना पड़ता है।
ऐसी ही एक बेटी है एकता कपूर, जैसा भाई वैसी बहन। अब जीने के लिए पैसा तो चाहिए ही। जितेंद्र को भी उस के बेटे और बेटी को भी।
यहाँ ये बिक गए। काम मिला भारत को बर्बाद करने का। भारत माता को बेचने का। एकता निर्माता बनी सास बहु सीरियल की। कम्पनी का नाम रखा बालाजी टेली फ़िल्म। बाला जी मतलब आप जानते ही हो। ये सब से ज़्यादा वेतन लेने वाली CEO भी बनी, इस की कम्पनी से जितेंद्र को भी 5 करोड़ वेतन मिलता था तो इतना ही इस की माँ को भी भाई को भी। उस के अलावा मुनाफ़ा अलग से। हज़ार करोड़ की कम्पनी बन गयी।
ज़्यादा तो नहीं पता मगर विस्तारवादी नीति के तहत इस ने बहुत से प्रोडक्सन हाउस ख़रीदे बहुत से मतलब बहुत से। सास भी कभी बहु थी के समय से जनता हूँ मैं इस के अलावा कुछ नहीं देखा। स्टार टीवी पर आता था और स्टार टीवी जिस के साथ उस को नाम शौहरत दौलत की क्या कमी। होते होते इस ने स्टार टीवी के शेयर भी ख़रीद लिए। बहुत जल्दी सफलता मिलती गयी। 2017 में रीलाइंस ने इस से हाथ मिलाया डील हुयी कुछ 400-500 करोड़ में।
तुषार कपूर ने शादी नहीं की, फिर भी जितेंद्र और उस की बीवी शोभा दादा दादी बन गए। तुषार का बेटा हुआ था। उस का अपना ख़ून। किराए की कोख से। घर में बच्चे की किलकारियाँ गूँज उठी।
27 जनवरी को जितेंद्र और उस की बीवी शोभा नाना नानी बन गए। बिना दामाद के। किराए की कोख भी ली और विकी डोनर से स्पर्म भी लिए। घर में फिर बच्चे की किलकारियाँ गूँज उठी।

ये है “कहानी घर घर की” । (थोड़े दिन पहले ये सब हिजड़े मोदी जी से मिले थे।)
ऐसा ही शाहरुख़ खान ने किया तो करण जौहर ने भी किया। उस ही कड़ी में तुषार और एकता भी जुड़े।

रवीना टंडन ने 2 लड़कियाँ गोद ली। वहीं सुष्मिता सेन ने शादी नहीं की उस ने भी 2 लड़कियाँ गोद ली। सलमान खान की माँ हेलन ने एक लड़की गोद ली। सुभाष घई ने तो मिथुन ने भी एक बच्ची गोद ली। पहले ये चलता था। तब अनाथ बच्चों को गोद लेते थे।

मगर ये नया ट्रेंड चल पड़ा। किराए का गर्भ या स्पर्म ख़रीद का लड़का पैदा करो। जल्दी ही ये आम हो जाएगा। आज कल की भाग दौड़ भरी लाइफ़, काम का, कैरियर का लोड, स्ट्रेस ........जिस कारण अब दंपत्तियों के बच्चे नहीं हो रहे। इलाज करवाते हैं कम से कम 2 से 3 साल इलाज चलता है। असल में इलाज नहीं चलता ये ब्लाकिज किया जाता है। 4 - 5 लाख का ख़र्चा हो जाता है। फिर बोला जाता है की कनसिव नहीं हो रहा। आपको कृत्रिम प्रक्रिया करवानी होगी। ख़र्चा 4 से 5 लाख। तब दवाइयाँ बंद।

फिर किसी और के अंडाशय से अंडे तो किसी और के शुक्राणुओं को मिला कर तैयार किया जाता है मोटा ताज़ा लड़का।
ये है आईवीएफ नामक व्यापार जो अरबों खरबो का होता जा रहा है। जल्दी ही क्रिकेट को स्पॉन्सर करते हुए दिख गए तो समझ जाना की षड्यंत्र सफल हुआ। जैसे खेतों के लिए अब बीज से बीज नहीं होते वैसे ही अब इंसानो से बच्चे नहीं होंगे। बीज बाज़ार से लाने पड़ते हैं तो बच्चे भी बाज़ार से लाने पड़ेंगे।
कृत्रिम बच्चे।
इन का लक्ष्य है 2050 तक सब बच्चे ऐसे ही पैदा हो। एकता तुषार शाहरुख़ करण इस के सेल्स और मार्केटिंग वाले है। ये सब थोड़ा और मेहनत कर रहे हैं भारत से परिवार प्रथा ख़त्म करो विवाह प्रथा पर भी कुठाराघात किया जा रहा है। एक तीर दो निशाने भारत की संस्कृति मिटाओ और आईवीएफ़ से पैसा कमाओ। बीज बो रहे हैं ये एक भ्रष्ट समाज और परिवार का।        अब चाहे आपकी पूर्वजों के साथ कितना भी अत्याचार हुआ हो चाहे आपकी कोई भी संस्कृति रही हो या आपके खानदान और उनकी कोई भी मर्यादा रही हो चाहे नीचे दिए गए वीडियो में चाहे कितना भी राजीव दीक्षित कितना भी चिल्लाऐं  अब कोई लड़ने वाला नया नौजवान पैदा ही नहीं होगा अभी बीज ही नष्ट हो जाए उनकी योजना का यह मूल प्रयास है क्योंकि हो सकता है अगर बीज है तो कोई गुरु कोई गुरुकुल उनमें भाव पैदा कर सकता है अब जब भेज ही नहीं होगा तो कोई भी गुरुकुल कोई भी गुरु कोई भी श्रेष्ठ महा मानव का कोई प्रभाव नहीं होगा आप चिल्लपों मचाते रहिए बचाओ बचाओ करते रहिए

 


शनिवार, 7 नवंबर 2020

गौरक्षा के प्रश्न पर मात्र 50 साल के बाद इतना सन्नाटा क्यों

 


अंग्रेजो द्वारा किया गया नरसंहार जलियॉवाला बाग कांड से भी भयंकर रक्तपात आजाद भारत में चुने हुए सरकारों के द्वारा किया गया । वही इतने बड़े नरसंहार को और इतने बड़े आंदोलन को लीपापोती व हजम करके पचा दिया गया और आज के नोजवान पीढ़ी को भनक भी नहीं लगने पा रही है। इस आधुनिक शिक्षा और  बिकाऊ,बनावटी पालतू इतिहासकार और पत्तल कारों के द्वारा इतना संगठित और श्रेष्ठ आंदोलन ना भूतो न भविष्यति को इस संगठित गिरोह के द्वारा मटियामेट कर दिया गया।इतना बड़ा आंदोलन मात्र 50 साल में सन्नाटा बिरानी छाई हुई है वहीं पार्टियों के सभाएं इस करो़ना काल में भी गुलजार हो रही हैं और गौ हत्या प्रतिबंध का कानून आज तक नहीं बन पाया कई सरकारें आई और गई धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के दिए गए श्राप से गांधी खानदान के कई लोगों के चिथड़े उड़ चुके हैं और कई की सरकार भी चली गई और कई pm घिसटते घिसटते जिंदगी के नरक भोग कर मर  गए पर यह गौरक्षा का यक्ष प्रश्न आज भी हमारे सामने एक चुनौती बनकर के खड़ा है आने वाली सरकारों को भी यह एक विशेष चुनौती है
७ नवंबर की कहानी – आचार्य रामरंग (एक प्रत्यक्षदर्शी) की जुबानी     आज भी याद है वो मंजर जब गौरक्षा के लिए सुबह से ही संसद के बाहर लोग जुटने लगे थे। 7 नवम्बर 1966 को सुबह आठ बजे से ही लोग जुटना शुरू हो गए थे। गोरक्षा महाभियान समिति के संचालक व सनातनी करपात्री जी महाराज ने चांदनी चौक स्थित आर्य समाज मंदिर से अपना सत्याग्रह आरंभ किया। पूरी घटना के गवाह आचार्य सोहनलाल रामरंग के अनुसार, ”यह हिंदू समाज के लिए सबसे बड़ा ऐतिहासिक दिन था। नई दिल्ली का पूरा इलाका लोगों की भीड़ से भरा था। संसद गेट से लेकर चांदनी चैक तक सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। कम से कम 10 लाख लोगों की भीड़ जुटी थी, जिसमें 10 से 20 हजार तो केवल महिलाएं ही शामिल थीं। जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के लोग गोहत्या बंद कराने के लिए कानून बनाने की मांग लेकर संसद के समक्ष जुटे थे। गौहत्या रोकने के लिए इंदिरा सरकार केवल आश्वासन ही दे रही थी, ठोस कदम कुछ भी नहीं उठा रही थी। सरकार के झूठे वादे से तंग आकर संत समाज ने संसद के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था।”
रामरंग जी के अनुसार, ”दोपहर एक बजे जुलूस संसद भवन पर पहुंच गया और संत समाज के संबोधन का सिलसिला शुरू हुआ। करीब तीन बजे  https://ajaykarmyogi1.blogspot.com/2020/11/50.html?m=1

अब एक ही के समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान इस गाय गांव गुरुकुल की व्यवस्था के लिए whatsapp संपर्क 9336919081 कॉल  7984113987

 करीब तीन बजे का समय होगा, जब आर्य समाज के स्वामी रामेश्वरानंद भाषण देने के लिए खड़े हुए। स्वामी रामेश्वरानंद ने कहा, ‘यह सरकार बहरी है। यह गो हत्या को रोकने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाएगी। इसे झकझोरना होगा। मैं यहां उपस्थित सभी लोगों से आह्वान करता हूं कि सभी संसद के अंदर घुस जाओ और सारे सांसदों को खींच-खींच कर बाहर ले आओ, तभी गो हत्या बंदी कानून बन सकेगा।’
    ”इतना सुनना था कि नौजवान संसद भवन की दीवार फांद-फांद कर अंदर घुसने लगे। लोगों ने संसद भवन को घेर लिया और दरवाजा तोड़ने के लिए आगे बढ़े। पुलिसकर्मी पहले से ही लाठी-बंदूक के साथ तैनात थे। पुलिस ने लाठी और अश्रुगैस चलाना शुरू कर दिया। भीड़ और आक्रामक हो गई। इतने में अंदर से गोली चलाने का आदेश हुआ और पुलिस ने भीड़ पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। संसद के सामने की पूरी सड़क खून से लाल हो गई। लोग मर रहे थे, एक-दूसरे के शरीर पर गिर रहे थे और पुलिस की गोलीबारी जारी थी। नहीं भी तो कम से कम, पांच हजार लोग उस गोलीबारी में मारे गए थे।”
    ”बड़ी त्रासदी हो गई थी और सरकार के लिए इसे दबाना जरूरी था। ट्रक बुलाकर मृत, घायल, जिंदा-सभी को उसमें ठूंसा जाने लगा। जिन घायलों के बचने की संभावना थी, उनकी भी ट्रक में लाशों के नीचे दबकर मौत हो गई। हमें आखिरी समय तक पता ही नहीं चला कि सरकार ने उन लाशों को कहां ले जाकर फूंक डाला या जमीन में दबा डाला। पूरे शहर में कफ्र्यू लागू कर दिया गया और संतों को तिहाड़ जेल में ठूंस दिया गया। केवल शंकराचार्य को छोड़ कर अन्य सभी संतों को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया। करपात्री जी महाराज ने जेल से ही सत्याग्रह शुरू कर दिया। जेल उनके ओजस्वी भाषणों से गूंजने लगा। उस समय जेल में करीब 50 हजार लोगों को ठूंसा गया था।”
रामरंग जी के अनुसार, ”शहर की टेलिफोन लाइन काट दी गई। 8 नवंबर की रात मुझे भी घर से उठा कर तिहाड़ जेल पहुंचा दिया गया। नागा साधु छत के नीचे नहीं रहते, इसलिए उन्होंने तिहाड़ जेल के अदंर रहने की जगह आंगन में ही रहने की जिद की, लेकिन ठंड बहुत थी। नागा साधुओं ने जेल का गेट, फर्निचर आदि को तोड़ कर जलाना शुरू किया। उधर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गुलजारीलाल नंदा पर इस पूरे गोलीकांड की जिम्मेवारी डालते हुए उनका इस्तीफा ले लिया। गुलजारीलाल नंदा उस वक्त गृहमंत्री के पद पर आसीन थे।
    गुलजारीलाल नंदा गौहत्या क़ानून के पक्ष में थे जिसके बाद उन्हें उनके पद से निष्कासित कर दिया और मंत्रिमंडल में कहीं भी जगह नहीं दी गयी, तत्कालीन महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व चीन से हार के बाद देश के रक्षा मंत्री बने यशवंत राव बलवतंराव चैहान को गृहमंत्री बना दिया गया। तिहाड़ जेल में नागा साधुओं के उत्पाद की खबर सुनकर गृहमंत्री यशवंत राव बलवतंराव चैहान खुद जेल आए और उन्होंने नागा साधुओं को आश्वासन दिया कि उनके अलाव के लिए लकड़ी का इंतजाम किया जा रहा है। लकड़ी से भरे ट्रक जेल के अंदर पहुंचने और अलाव की व्यवस्था होने पर ही नागा साधु शांत हुए।” बाद में सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को एक तरह से दबा दिया ।


सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...