बुधवार, 25 दिसंबर 2013

बीमारियों में है रामबाण) लहसुन सिर्फ खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के लिए एक औषधी की तरह भी काम करता है।इसमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज, लवण और फॉस्फोरस, आयरन व विटामिन ए,बी व सी भी पाए जाते हैं। लहसुन शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है। भोजन में किसी भी तरह इसका सेवन करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है आज हम बताने जा रहे हैं आपको औषधिय गुण से भरपूर लहसुन के कुछ ऐसे ही नुस्खों के बारे में जो नीचे लिखी स्वास्थ्य समस्याओं में रामबाण है। 1-- 100 ग्राम सरसों के तेल में दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवाइन के दाने और आठ-दस लहसुन की कुली डालकर धीमी-धीमी आंच पर पकाएं। जब लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर छान लें और बोतल में भर दें। इस तेल को गुनगुना कर इसकी मालिश करने से हर प्रकार का बदन का दर्द दूर हो जाता है। 2-- लहसुन की एक कली छीलकर सुबह एक गिलास पानी से निगल लेने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है।साथ ही ब्लडप्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। 3-- लहसुन डायबिटीज के रोगियों के लिए भी फायदेमंद होता है। यह शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में कारगर साबित होता है। 4-- खांसी और टीबी में लहसुन बेहद फायदेमंद है। लहसुन के रस की कुछ बूंदे रुई पर डालकर सूंघने से सर्दी ठीक हो जाती है। 5-- लहसुन दमा के इलाज में कारगर साबित होता है। 30 मिली लीटर दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। 6-- लहसुन की दो कलियों को पीसकर उसमें और एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर क्रीम बना ले इसे सिर्फ मुहांसों पर लगाएं। मुहांसे साफ हो जाएंगे। 7-- लहसुन की दो कलियां पीसकर एक गिलास दूध में उबाल लें और ठं
डा करके सुबह शाम कुछ दिन पीएं दिल से संबंधित बीमारियों में आराम मिलता है। 8-- लहसुन के नियमित सेवन से पेट और भोजन की नली का कैंसर और स्तन कैंसर की सम्भावना कम हो जाती है। 9-- नियमित लहसुन खाने से ब्लडप्रेशर नियमित रहता है। एसीडिटी और गैस्टिक ट्रबल में भी इसका प्रयोग फायदेमंद होता है। दिल की बीमारियों के साथ यह तनाव को भी नियंत्रित करती है। 10-- लहसुन की 5 कलियों को थोड़ा पानी डालकर पीस लें और उसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह -शाम सेवन करें। इस उपाय को करने से सफेद बाल काले हो जाएंगे। 11- यदि रोज नियमित रूप से लहसुन की पाँच कलियाँ खाई जाएँ तो हृदय संबंधी रोग होने की संभावना में कमी आती है। इसको पीसकर त्वचा पर लेप करने से विषैले कीड़ों के काटने या डंक मारने से होने वाली जलन कम हो जाती है। 12- जुकाम और सर्दी में तो यह रामबाण की तरह काम करता है। पाँच साल तक के बच्चों में होने वाले प्रॉयमरी कॉम्प्लेक्स में यह बहुत फायदा करता है। लहसुन को दूध में उबालकर पिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लहसुन की कलियों को आग में भून कर खिलाने से बच्चों की साँस चलने की तकलीफ पर काफी काबू पाया जा सकता है। 13- लहसुन गठिया और अन्य जोड़ों के रोग में भी लहसुन का सेवन बहुत ही लाभदायक है। लहसुन की बदबू- अगर आपको लहसुन की गंध पसंद नहीं है कारण मुंह से बदबू आती है। मगर लहसुन खाना भी जरूरी है तो रोजमर्रा के लिये आप लहसुन को छीलकर या पीसकर दही में मिलाकर खाये तो आपके मुंह से बदबू नहीं आयेगी। लहसुन खाने के बाद इसकी बदबू से बचना है तो जरा सा गुड़ और सूखा धनिया मिलाकर मुंह में डालकर चूसें कुछ देर तक, बदबू बिल्कुल निकल जायेगी।
कच्चे प्याज के कुछ स्वास्थ्य लाभ
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एनीमिया ठीक करे-
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प्याज काटते वक्त आंखों से आंसू टपकते हैं,
ऐसा प्याज में मौजूद सल्फर की वजह से होता है
जो नाक के दृारा शरीर में प्रेवश करता है। इस
सल्फर में एक तेल मौजूद होता है
जो कि एनीमिया को ठीक करने में सहायक
होता है। खाना पकाते वक्त यही सल्फर जल
जाता है, तो ऐसे में कच्चा प्याज खाइये।

कब्ज दूर करे-
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इसमें मौजूद रेशा पेट के अंदर के चिपके हुए भोजन
को निकालता है जिससे पेट साफ हो जाता है,
तो यदि आपको कब्ज की शिकायत है
तो कच्चा प्याज खाना शुरु कर दीजिये।

गले की खराश मिटाए-
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यदि आप सर्दी, कफ या खराश से पीडित हैं
तो आप ताजे प्याज का रस पीजिये। इमसें गुड
या फिर शहद मिलाया जा सकता है।

ब्लीडिंग समस्या दूर करे-
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नाक से खून बह रहा हो तो कच्चा प्याज काट
कर सूघ लीजिये। इसके अलावा यदि पाइल्स
की समस्या हो तो सफेद प्याज खाना शुरु कर दें।

मधुमेह करे कंट्रोल-
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यदि प्याज को कच्चा खाया जाए तो यह शरीर
में इंसुलिन उत्पन्न करेगा, तो यदि आप
डायबिटिक हैं तो इसे सलाद में खाना शुरु कर दें।

दिल की सुरक्षा-
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कच्चा प्याज हाई ब्लड प्रेशर को नार्मल करता है
और बंद खून की धमनियों को खोलता है जिससे
दिल की कोई बीमारी नहीं होती।

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करे-
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इसमें मिथाइल सल्फाइड और अमीनो एसिड
होता है जो कि खराब कोलेस्ट्रॉल को घटा कर
अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाता है।

कैंसर सेल की ग्रोथ रोके-
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प्याज में सल्फर तत्व अधिक होते हैं। सल्फर शरीर
को पेट, कोलोन, ब्रेस्ट, फेफडे और प्रोस्टेट कैंसर से
बचाता है। साथ ही यह मूत्र पथ संक्रमण
की समस्या को भी खत्म करता है।

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

हम राजीव भाई समर्थको के लिए यह विडियो ही बहुत है केजरीवाल को समर्थन करने का मित्रो मैं आपको उस विडियो का लिंक दे रहा हूँ जो 14-Nov-2010 का है जब राजीव भाई जीवित थे और इसके 15 दिन बाद उनका देहांत हुआ था दिल्ली के जंतर मंतर पर रामदेव जी, अन्ना हजारे और केजरीवाल साथ साथ मंच पर थे पर राजीव भाई नहीं थे, क्यों ? क्योंकि राजीव भाई ने स्वामीजी को छत्तीसगढ़ का प्रवास छोड़ कर केजरीवाल के साथ मंच साँझा करने से मना कर दिया था? क्योंकि उन्हें पता था की आज जो रूप केजरीवाल का है उसको वो पहले से जानते थे अगर राजीव भाई जीवित होते तो केजरीवाल केजरीवाल नहीं होता इसलिए राजीव समर्थक इस भ्रम को दिमाग से निकल दें की राजीव भाई होते तो केजरीवाल उनके साथ होताhttp://www.youtube.com/watch?v=A9oJMewaoMM राजीव भाई ने NGO की व्याख्या कितनी बढ़िया तरीके से की है उनका कहना है जो NGO सरकारी या विदेशी पैसे लेकर काम करते हैं उनपर कभी भरोसा नहीं करना, इसको लेकर कार्यकर्ता भी भ्रमित हो जाते हैं उनको लगता है बहुत बढ़िया देशभक्ति का काम कर रहे हैं ये NGO और फिर उनके एजेंट बन जाते हैं | *अगर कोई NGO विदेशी पैसे लेकर काम करेगा तो वो सिर्फ वोही मुद्दे उठाएगा जो विदेशी हित में हो, ये लोग कभी भी ऐसे मुद्दे नहीं उठाएंगे जिनसे एक आम नागरिक या ग्रामीण किसान स्वावलंबी बन सके, ये लोग ऐसे काम या प्रोजेक्ट ही करेंगे जिनसे आम नागरिक या किसान परावलम्बी बने या आश्रित बने|* हाँ कुछ NGO पर एक बार भरोसा तो कर सकते हैं जो NGO खुद के लोगों के पैसे से अपने काम करते हैं जैसे सहकारी संस्थाएं और उद्योग लगाना | (इसको समझने का एक साधारण उदाहरण - जैसे भिखारी को भीख देने से समस्या कभी हल नहीं हो सकती समस्या का हल उसकी मासिक नियमित आर्थिक आवश्यकता का हल करना है, कोई रोजगार या अन्य काम जिससे आमदनी का स्रोत बना रहे| अब ये विदेशी पैसे पर चलने वाले NGO कभी भी इनके रोजगार के बारे में ना सोचकर, बेमतलब की कोई रैली, दौड़ या कैंडल मार्च (गरीबी हटाने के लिए) का आयोजन करेंगे जिसपर लाखों खर्च किये जायेंगे जिससे की मीडिया में इनकी खबर छपे|) जैसा की अभी धरा 377 को लेकर NGO आन्दोलन कर रहे हैं, पहली बात तो ये हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और ये सारे NGO विदेशी हैं जो अपनी विकृत संस्कृति को हमपर थोपना चाह रहे हैं | शिक्षा, खान-पान, पहनावा, रहन-सहन सबपर विदेशी प्रभाव डाल देने के बाद अब ये ही बाकी रह गया था| देश बचाने से पहले ये तो पता होना चाहिए की देश कैसे बर्बाद किया जा रहा है !
हम राजीव भाई समर्थको के लिए यह विडियो ही बहुत है केजरीवाल को समर्थन करने का मित्रो मैं आपको उस विडियो का लिंक दे रहा हूँ जो 14-Nov-2010 का है जब राजीव भाई जीवित थे और इसके 15 दिन बाद उनका देहांत हुआ था दिल्ली के जंतर मंतर पर रामदेव जी, अन्ना हजारे और केजरीवाल साथ साथ मंच पर थे पर राजीव भाई नहीं थे, क्यों ? क्योंकि राजीव भाई ने स्वामीजी को छत्तीसगढ़ का प्रवास छोड़ कर केजरीवाल के साथ मंच साँझा करने से मना कर दिया था? क्योंकि उन्हें पता था की आज जो रूप केजरीवाल का है उसको वो पहले से जानते थे अगर राजीव भाई जीवित होते तो केजरीवाल केजरीवाल नहीं होता इसलिए राजीव समर्थक इस भ्रम को दिमाग से निकल दें की राजीव भाई होते तो केजरीवाल उनके साथ होताhttp://www.youtube.com/watch?v=A9oJMewaoMM राजीव भाई ने NGO की व्याख्या कितनी बढ़िया तरीके से की है उनका कहना है जो NGO सरकारी या विदेशी पैसे लेकर काम करते हैं उनपर कभी भरोसा नहीं करना, इसको लेकर कार्यकर्ता भी भ्रमित हो जाते हैं उनको लगता है बहुत बढ़िया देशभक्ति का काम कर रहे हैं ये NGO और फिर उनके एजेंट बन जाते हैं | *अगर कोई NGO विदेशी पैसे लेकर काम करेगा तो वो सिर्फ वोही मुद्दे उठाएगा जो विदेशी हित में हो, ये लोग कभी भी ऐसे मुद्दे नहीं उठाएंगे जिनसे एक आम नागरिक या
ग्रामीण किसान स्वावलंबी बन सके, ये लोग ऐसे काम या प्रोजेक्ट ही करेंगे जिनसे आम नागरिक या किसान परावलम्बी बने या आश्रित बने|* हाँ कुछ NGO पर एक बार भरोसा तो कर सकते हैं जो NGO खुद के लोगों के पैसे से अपने काम करते हैं जैसे सहकारी संस्थाएं और उद्योग लगाना | (इसको समझने का एक साधारण उदाहरण - जैसे भिखारी को भीख देने से समस्या कभी हल नहीं हो सकती समस्या का हल उसकी मासिक नियमित आर्थिक आवश्यकता का हल करना है, कोई रोजगार या अन्य काम जिससे आमदनी का स्रोत बना रहे| अब ये विदेशी पैसे पर चलने वाले NGO कभी भी इनके रोजगार के बारे में ना सोचकर, बेमतलब की कोई रैली, दौड़ या कैंडल मार्च (गरीबी हटाने के लिए) का आयोजन करेंगे जिसपर लाखों खर्च किये जायेंगे जिससे की मीडिया में इनकी खबर छपे|) जैसा की अभी धरा 377 को लेकर NGO आन्दोलन कर रहे हैं, पहली बात तो ये हमारी संस्कृति के विरुद्ध है और ये सारे NGO विदेशी हैं जो अपनी विकृत संस्कृति को हमपर थोपना चाह रहे हैं | शिक्षा, खान-पान, पहनावा, रहन-सहन सबपर विदेशी प्रभाव डाल देने के बाद अब ये ही बाकी रह गया था| देश बचाने से पहले ये तो पता होना चाहिए की देश कैसे बर्बाद किया जा रहा है !
पूरी पोस्ट नही पड़ सकते तो यहाँ Click करें : http://www.youtube.com/watch?v=0fo5tDYfMi8

हिंदुस्तान की न्याय व्यवस्था में काम करने वाले जो एडवोकेट्स मित्र है उनसे माफ़ी मांगते हुए आप सबसे ये पूछता हूँ के क्या आप जानते है यह काला कोट पेहेनके अदालत में क्यों जाते है ? क्या काले को छोड़ के दूसरा रंग नही है भारत में ? सफ़ेद नही है नीला नही है पिला नही है हरा नही है ?? और कोई रंग ही नही है कला ही कोट पहनना है । वो भी उस देश की न्यायपालिका में जहाँ तापमान 45 डिग्री हो। तो 45 तापमान जिस देशमे रहता हो उहाँ के वोकिल काला कोट पेहेनके बहेस करे, तो बहस के समय जो पसीना आता है वो और गर्मी के कारन जो पसीना आता है वो, तरबतर होते जाये और उनके कोट पर पसीने से सफ़ेद सफ़ेद दाग पड़ जाये पीछे कोलार पर और कोट को उतारते ही इतनी बदबू आये की कोई तिन मीटर दूर खिसक जाये लेकिन फिर भी कोट का रंग नही बदलेंगे। क्योंकि ये अंग्रेजो का दिया हुआ है।

आपको मलिम है अंग्रेजो की अदालत में काला कोट पहनके न्यायपालिका के लोग बैठा करते थे। और उनके यहाँ स्वाभाविक है क्योंकि उनके यहाँ नुन्यतम -40 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान होता है जो भयंकर ठण्ड है । तो इतनी ठण्ड वाली देश में काला कोट ही पेहेनना पड़ेगा कियोंकि वो गर्मी देता है। ऊष्मा का अच्छा अवशोषक है। अन्दर की गर्मी को बाहर नही निकलने देता और बाहर से गर्मी को खिंच के अन्दर डालता है । इसीलिए ठण्ड वाले देश के लोग काला कोट पेहेनके अदालत में बहस करे तो समझ में आता है पर हिंदुस्तान के गरम देश के लोग काला कोट पेहेनके बहस करे !!!!!! 1947 के पहले होता था समझमे आता है पर 1947 के बाद भी चल रहा है ??? हमारी बार काउन्सिल कोइत्नि समझ नही है क्या? के इस छोटी सी बात को ठीक कर ले बदल ले । सुप्रीम कोर्ट की बार काउन्सिल है हाई कोर्ट की बार काउन्सिल है डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की बार काउन्सिल है सभी बार काउन्सिल मिलके एक मिनट में फैसला कर सकते है की काल से हम ये काला कोर्ट नही पहनेंगे।

वो तो भला हो हिंदुस्तान में कुछ लोगों का हमारे देश पहले अंग्रेज न्यायाधीश हुआ करते थे तो सर पे टोपा पेहेनके बैठते थे, उसमे नकली बाल होते थे। आज़ादी के बाद 40 -५० साल तक टोपा लगा कर यहाँ बहुतसारे जज बैठते रहे है इस देश की अदालत में। अभी यहाँ क्या विचित्रता है के काला कोट पेहेन लिया ऊपर से काला पंट पेहेन लिया, बो लगा लिया सब एकदम टाइट कर दिया हवा अन्दर बिलकुल न जाये फिर मांग करते है के सभी कोट में एयर कंडीशनर होना चाहिए!! ये कोट उतर के फेंक दो न एयर कंडीशन की जरुरत क्या है ? और उसके ऊपर एक गाउन और लाद लेते है वो निचे तक लहंगा फैलता हुआ। ऐसी विचित्रताए इस देश में आज़ादी के ६० साल बाद भी दिखाई दे रहा है।

अंग्रेजो की गुलामी की एक भी निशानी को आज़ादी के 65 साल में हमने मिटाया नही, सबको संभाल के रखा है।

आज मै आप बीती साझा कर रहा हूँ मै जो सफदरजंग से प्रतिमाह 3000 हजार की दवा लाता था 2010 के बाद एक गोली भी नहीं खाई है हमारे यहाँ स्किन के विशेषज्ञ है डॉ महाजन उन्होंने मुझे बराबर दवा खाने के लिए बोला था आज मिलते है तो कहते है यार तुम तो खुद स्किन के विशेषज्ञ हो गए हो मुझे liken plenas और क्रिटिकल alopicia था ldl vldl triglisiride सब गड़बड़ था प्रतिमाह लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट करना पड़ता था और ऐसी खतरनाक दवा ली जिसने पुरे पाचनतंत्र और हार्मॊन को अवैवस्थित कर दिया था बस भगवान् की ऐसी कृपा हो गई की सफदरजंग के dermotology dpt के एक डॉक्टर ने राजीव भाई की स्वास्थ कथा की cd दी और बोले बेटा इसे सुन लेना बस उस दिन मैंने cd ली और घर आकर पूरी रात सोया नहीं रात भर cd सुनता रहा और वो सुबह मेरे जीवन की सबसे सुनहरी सुबह थी मै एक pvt ltd co में था मैंने इतनी दवा खाई थी की मुझे ESI से 37523 रूपये वापस मिले थे मुझे दवा के काले कारोबार में शामिल MR और doctar के सम्बन्ध का भी ज्ञान हुवा । मुझे स्किन की समस्या थी जिसमे बायोप्सी भी हुइ थी जब राजीव भाई से जाना की इस बिमारी का मूल कारण पेट है पहले इसे ठीक करना होगा मैंने अष्टांग हृदयं के नियम का पालन किया और गौमूत्र का प्रतिदिन सेवन किया आज पूर्णतया स्वस्थ हूँ कभी सर्दी जुखाम भी नहीं होता बस राजीव भाई द्वारा बताये गए नियमो का कट्टरता से पालन करता हूँ । बस दुःख इसी बात का है की भारत की उस महान विभूति से कभी मिल नहीं पाया ।और सबसे बड़ा कष्ट ये होता है जब लॊग हजारो लाखो लोगो को हार्टअटैक ब्लडप्रेसर से निजात दिलाने वाले राजीव भाई की मृत्यु का कारण लोग हार्टअटैक बताते है ।ये एक ऐसा सवाल है जो आने वाली पीढ़ी हमसे जरूर पूछेंगी तब शायद ही कोइ इमानदारी से जवाब दे पाए ।अमर शहीद भाई राजीव दीक्षित देशभक्त थे मै गर्व से कहता हूँ मै माँ भारती
के उस लाल का भक्त हूँ । जो उन्हने बोला उसको जीवन में सर्वप्रथम धारण भी किया ।

सोमवार, 23 दिसंबर 2013

मुलेठी----------
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पहचान-
मुलेठी का वैज्ञानिक नाम ग्‍लीसीर्रहीजा ग्लाब्र (Glycyrrhiza glabra ) कहते है। संस्‍कृत में मधुयष्‍टी:, बंगला में जष्टिमधु, मलयालम में इरत्तिमधुरम, तथा तमिल में अतिमधुरम कहते है। एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसमें गुलाबी और जामुनी रंग के फूल होते है। इसके फल लम्‍बे चपटे तथा कांटे होते है। इसकी पत्तियॉं सयुक्‍त होती है। मूल
जड़ों से छोटी-छोटी जडे निकलती है। इसकी खेती पूरे भारतवर्ष में होती है।
अनेक रोगों की दवा मुलेठी

मुलेठी के प्रयोग से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर और छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी लाभ होता है। मुलेठी एक वनौषधि है जिसका एक से छह फुट का पौधा होता है। इसका काण्ड और मूल मधुर होने से इसे यष्टिमधु भी कहा जाता है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। ताजी जड़ मधुर होती है। यह सूखने पर कुछ तिक्त एवं अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण बना रहता है। इसका औषधि के रूप में अति प्राचीन काल से ही उपयोग किया जाता रहा है। सुश्रुत, अष्टांगह्वदय, चरक संहिता जैसे ग्रन्थों में इसके प्रयोग द्वारा चेतना लाने (मूच्र्छा दूर करने), उदर रोग, श्वास रोग, स्तन रोग, योनिगत रोगों को दूर करने की अनेक विधियां दी गई हैं। ईरानी चिकित्सक तो आज भी çस्त्रयों की सेक्स संबंधी बीमारियों में इसका प्रयोग कर रहे हैं। ताजा मुलेठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है। ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है।

पेट के घाव
वैज्ञानिकों ने अनेक प्रयोगों द्वारा इस बात को सिद्ध कर दिया है कि मुलेठी की जड़ का चूर्ण पेट के घावों पर लाभकारी प्रभाव डालता है और घाव जल्दी भरने लगता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम दिनकर का कहना है कि मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित रूप से सेवन करके स्त्रियाँ अपने स्तन, योनि, सेक्स की भावना, सुन्दरता आदि को लंबे समय तक बनाए रख सकती हैं । डॉ. डी.आर. लॉरेन्स की क्लीनिकल फार्मोकॉलॉजी के अनुसार मुलेठी में ग्लाइकोसाइड के अतिरिक्त ट्राइटर्पी नामक अम्ल भी होता है, जिसे कार्बेनोक्लोजीन के नाम से एलोपैथी में प्रयोग किया जाता है। यह पदार्थ आमाशय में श्लेष्मा की मात्रा बढ़ा देता है। यह प्रभाव अन्य अम्ल निरोधक एण्टासिड्स से कहीं अधिक होता है।

अल्सर मिटाए
मुलेठी न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन् छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह से प्रभावशाली है। इण्डियन मेडिकल गजट के अनुसार ड्यूओडनल अल्सर के रोगियों पर जब मुलेठी का चूर्ण दिया जाता है, तो यह चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी इतनी तेज गति से भरता है, जितना अन्य औषधि नहीं भर पाते।

आंतों की टीबी
डॉ. बी.डी. अग्रवाल के अनुसार आज लोग आंतों की टीबी के शिकार होते जा रहे हैं। आंतों की टीबी में लगातार उल्टियां होती हैं, तीव्र पेट दर्द की शिकायत रहती है, पखाने के रास्ते खून बहता रहता है, ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। इस स्थिति में मुलेठी का प्रयोग लाभदायक देखा गया है। आमाशय के रोगों में मुलेठी चूर्ण, क्वाथ या स्वरस रूप में पांच मिलीलीटर से दस मिली. तक दिन में तीन बार तक दिया जाता है। तृष्णा एवं उदरशूल में भी यह शीघ्र लाभ देता है। आमाशयिक व्रणों में विशेष लाभकारी होता है। अम्लाधिक्य एवं अम्लपित्त को भी शांत
रखता है।

खून की उल्टी
खून की उल्टियां होने पर दूध के साथ मुलेठी का चूर्ण एक से चार माशे की मात्रा में अथवा मधु के साथ देने पर लाभ होता है। हिचकी होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से लाभ होता है।

सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...