शुक्रवार, 23 मार्च 2018



वीरशैव लिंगायत प्राचीन शिवभक्त थे ।
इस सम्प्रदाय को विदेशियों ने मूर्ख बनाया और ये अपने मृतकों को दफ़नाने लगे ।
विदेशियों ने सिखों को भी बहकाना चाहा ( कि वे भी अपने मुर्दों को दफनाएं ) , पर जमीन से जुड़ा सिख समुदाय उनके झांसे में नहीं आया !!
आज वीरशैव लिंगायत नाम का ये सम्प्रदाय अपने मृतकों के शरीर दफ़नाता है , अतएव ये हिन्दू नहीं है।
कडप्पा का कलेक्टर चार्ल्स फिलिप ब्राउन जायोनिस्टों का वह एजेंट था, जिसकी वजह से लिंगायत अपने मृतकों का दाह-संस्कार नहीं कराते -- वे मृतकों को दफ़नाते हैं -- अतएव हिन्दू नहीं हैं।
(हिन्दू होने की एकमात्र शर्त है -- मृतकों का दाह-संस्कार करना)
धूर्त CP ब्राउन ने #वेमना के नकली #बासव_पुराण का अनुवाद किया और इसका इतना प्रचार करवाया कि आज तेलुगु की स्कूली किताबों में वेमना के नकली पद पढ़ाए जाते हैं ।
जैसे महाराष्ट्र में चितपावन यहूदियों को सत्ता की मलाई खाने को मिली -- कर्नाटक/ आंध्र में लिंगायतों को दी गई । इनमें से अधिकतर देशद्रोही थे ।
1832 - 1833 का कुख्यात गुंटूर- अकाल ( जो जान बूझकर उत्पन्न किया गया, ताकि वहाँ से लोगों को बंधुआ मजदूर बनाकर विदेश भेजा जा सके) , जिसके बाद किसानों पर अत्यधिक टैक्स लगाया गया -- उस समय गुंटूर का कलक्टर कौन था -- वही CP ब्राउन, रोथ्सचिल्ड का एजेंट … पर कमाल देखिये, तेलुगू लोग इसे अपना सबसे बड़ा हमदर्द मित्र मानते हैं ...
और बनाओ - मूर्तियाँ , यूनिवर्सिटी , पोस्टेज स्टाम्प -- पूजा भी करो साले की !
बोलो कर्नाटक वालो -- CP ब्राउन की . . . जै !

सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...