हरतालिका तीज व्रत इस साल 21 अगस्त,
शुक्रवार को रखा जाएगा। सभी सुहागन स्त्रियां इस दिन अपने पति की लंबी
उम्र और #स्वास्थ्य_की_कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता
पार्वती की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन जो कोई भी स्त्री अपने
पति का हित सोचकर व्रत रखती है, उसका #पति_दीर्घायु होता है। मान्यता है कि
भगवान शिव और देवी पार्वती व्रतियों को सुख-संपत्ति, धन-धान्य,
पुत्र-पौत्र और स्वस्थ जीवन का वरदान देते हैं।
👉 हरतालिका तीज व्रत का महत्व
इस
व्रत को फलदायी माना जाता है। उत्तर भारत में इस व्रत की बहुत अधिक
मान्यता है। कहते हैं अगर कोई कुंवारी कन्या अपने #विवाह की कामना के साथ
इस व्रत को करती है तो भगवान शिव के आशीर्वाद से उसका विवाद जल्द हो जाता
है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि अगर कोई कुंवारी कन्या मनचाहे पति की
इच्छा से हरतालिका तीज व्रत रखती है तो भगवान शिव के वरदान से उसकी इच्छा
पूर्ण होती है।
👉 मान्यता है जो स्त्रियां इस व्रत को
सच्चे मन
से करती हैं उसे #अखंड_सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।यह
त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान
में मनाया जाता है। वहीं, कुछ दक्षिणी राज्यों में इस व्रत को गौरी हब्बा
कहा जाता है
👉 हरतालिका तीज व्रत का इतिहास
माना जाता है कि देवी
पार्वती के पिता हिमालय ने उनका विवाह श्रीहरि विष्णु के साथ तय कर दिया
था। लेकिन उन्होंने तो मन ही मन शिव जी को #अपना_पति मान लिया था। महादेव
को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती जंगल में तपस्या करना चाहती
थीं। तब माता पार्वती की एक सखी उन्हें हर कर घन घोर जंगलों में ले आई। तब
से हरतालिका तीज मनाई जाती है।
👉 इस विधि से करें पूजा
इस व्रत
में पूजन रात भर किया जाता है. इसके बाद बालू के भगवान शंकर व माता पार्वती
का मूर्ति बनाकर पूजा करें. एक चौकी पर शुद्ध मिट्टी में #गंगाजल मिलाकर
शिवलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती एवं उनकी सहेली की प्रतिमा बनाई
जाती है. ध्यान रहें कि प्रतिमा बनाते समय भगवान का स्मरण करते रहें और
पूजा करते रहें. इस दिन पूजन-पाठ करने के बाद महिलाएं रात भर भजन-कीर्तन
करती हैं. हर प्रहर को पूजा करते हुए बेल पत्र, आम के पत्ते आदि अर्पण
करें. फिर शिव-गौरी की आरती करें।
👉 भगवान शिव की आराधना इन मंत्रों से करें
ऊं हराय नम:
ऊं महेश्वराय नम:
ऊं शंभवे नम:
ऊं शूलपाणये नम:
ऊं पिनाकवृषे नम:
ऊं शिवाय नम:
ऊं पशुपतये नम:
ऊं महादेवाय नम:
👉 माता पार्वती की पूजा करते वक्त पढ़ें ये मंत्र
ऊं उमायै नम:
ऊं पार्वत्यै नम:
ऊं जगद्धात्र्यै नम:
ऊं जगत्प्रतिष्ठयै नम:
ऊं शांतिरूपिण्यै नम:
ऊं शिवायै नम:
👉 पूजन विधि
हरितालिका
तीज पर #मिट्टी या रेत से शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इसके
बाद इन्हें लकड़ी की चाैकी पर लाल कपड़ा बिछाकर आसन दिया जाता है। चाैकी को
फूलों व केले के पत्तों से सजाया जाता है। चाैकी के सामने एक कलश भी रखा
जाता है। इस दाैरान शिव-पार्वती पर जल छिड़ककर उन पर फूल व फल चढ़ाए जाते
है। धूप, दीप, मेवा, पंचामृत, पान, मिठाई आदि अर्पण किया जाता है। माता
पार्वती पर मेंहदी, चूड़ी, सिंदूर, महवर, बिंदी समेत सुहाग का सारा सामान
चढ़ाया जाता है। इसके बाद हरतालिक तीज की कथा पढ़ी व सुनी जाती है।
👉 हरतालिका तीज की परंपरा-
हरतालिका
तीज व्रत का प्रचलन अति प्राचीन काल से है. कब और कहां से इसका प्रारंभ
हुआ, इस बारे में विशेष विवरण नहीं मिलता. लेकिन व्रत का संबंध शिव औऱ
पार्वती से है, ऐसा सब मानते हैं. मान्यता है कि भगवान शिव को पति रुप में
पाने के लिए सबसे पहले माता पार्वती ने #हरतालिका तीज व्रत का अनुष्ठान
किया था. कुछ लोग इसे शिव-पार्वती के पुनर्मिलन और कुछ लोग इसे शिव को
अमरता प्रदान कराने वाले व्रत के तौर पर भी मानते हैं.
👉 ऐसे किया जाता है व्रत
व्रत
वाले दिन महिलएं #सुहाग की सारी वस्तुएं माता पार्वती को अर्पित करती
हैं। सुबह पूजा के बाद महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत करती हैं। पूजन के लिए
गौरी-शंकर की मिट्टी की प्रतिमा बनाई जाती है। रात में भजन-कीर्तन करते हुए
जागरण कर तीन बार आरती की जाती है।
👉 हरतालिका तीज की कथा
हरतालिका
तीज के व्रत की कथा भी माता पार्वती और शिवजी से जुड़ी हुई है। पौराणिक
कथाओं में बताया गया है कि पिता द्वारा कराए गए यज्ञ में जब माता पार्वती
से शिवजी का अपमान बर्दाश्त नहीं हुआ तो उन्होंने उसी #यज्ञ_की_अग्नि में
कूदकर आत्मदाह कर लिया। फिर अगले जन्म में वह राजा हिमाचल की पुत्री उमा
के रूप में जन्मी और इस जन्म में भी उन्होंने भगवान शिव को मन ही मन
अपना पति मान लिया।
👉 गौरी-शंकर की होती है पूजा
इस व्रत में
मुख्य रूप से भगवान शंकर और माता पार्वती की संयुक्त रूप से पूजा होती
है। व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के
बाद 16 श्रृंगार करती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को
पाने के लिए भी कठोर तपस्या की थी, तब जाकर भगवान शिव उन्हें पति के रूप
में प्राप्त हुए थे। सबसे पहले माता पार्वती ने यह व्रत किया था और इसके
प्रभाव से शिवजी उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए थे।
👉 महिलाएं रखती हैं निर्जला व्रत
सौभाग्य
की कामना और पति की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला व्रत हरतालिका तीज
#भाद्र_मास_के_शुक_पक्ष की तृतीया को रखा जाता है। इस साल यह व्रत 21
अगस्त को है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर शाम को भगवान शिव
और माता पार्वती की पूजा करने के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत तोड़ती
हैं और पति का आशीर्वाद लेकर इस व्रत को पूर्ण करती हैं। कुछ स्थानों पर
कुंवारी कन्याएं भी सुयोग्य वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं।
👉 हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त
पंचांग
के अनुसार तृतीया तिथि 21 अगस्त को पड़ रही है. इस दिन #उत्तराफाल्गुनी
नक्षत्र रहेगा. इस दिन सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन सूर्य सिंह
राशि और चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा. 21 अगस्त को प्रात: काल मुहूर्त 05
बजकर 53 मिनट 39 सेकेंड से 08 बजकर 29 मिनट 44 सेकेंड तक. प्रदोष काल
मुहूर्त 18 बजकर 54 मिनट 04 सेकेंड से 21 बजकर 06 मिनट 06 सेकेंड तक रहेगा.
हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त शाम 6 बजकर 54 मिनट से रात 9 बजकर 6 मिनट तक
रहेगा
👉 हरतालिका तीज: निर्जला एवं फलहारी
हरतालिका तीज व्रत
को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है। यह बेहद ही #कठिन_व्रत होता है।
इसे दो प्रकार से किया जाता है। एक निर्जला और दूसरा फलहारी। निर्जला व्रत
में पानी नहीं पीते हैं और न ही अन्न या फल ग्रहण करते हैं, वहीं फलाहारी
व्रत रखने वाले लोग व्रत के दौरान जल पी सकते हैं और फल का सेवन करते हैं।
जो कन्याएं निर्जला व्रत नहीं कर सकती हैं तो उनको फलाहारी व्रत करना
चाहिए।
शुक्रवार, 21 अगस्त 2020
हरितालिका व्रत और त्योहार ही ईस सनातन संस्कृति को बचा रहे हैं दांपत्य जीवन को सुखमय बनाने हेतु हरतालिका तीज व्रत का बड़ा महत्व है
भारतीय
सनातन संस्कृति को नष्ट करने के लिए बहुत सारे अब्राहमिक संस्कृतियों के
दानव राक्षस और यहां के अल्प शिक्षित पढ़े-लिखे मूर्ख अपने ही जड़ों को
खोद रहे हैं जिसके परिणाम स्वरुप पूरा सनातन परंपराएं नष्ट हो कर पूरा समाज
और घर बिखर रहे हैं ।स्त्री पुरुष की एकता व सात जन्मों तक का साथ निभाने
वाला दांम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने वाली भारतीय सांस्कृतिक के छरण से एक हजार
प्रतिशत से ज्यादा तलाक के केस बढ़ गये हैं और घर और समाज विखंडित हो रहा है
वहीं कामी वामी और इस देश के दुश्मन स्त्री और पुरुष को अलग करने में और ऐसे
त्यौहारों को हेय दृष्टि या निम्न स्तर का दकियानूसी विचार कहकर ऐसे व्रत त्यौहारों की निंदा करते हैं फिर भी इस समाज ने धर्म की जड़े बड़ी गहरी है
आप सबको हरि तालिका तीज पर महादेव जी की कृपा बनी रहे और परिवार आपका
सुगठित संगठित बना रहे शिव परिवार की तरह
सकल जगतमें हमारी सनातनकी धरोहरोंका उदगम कालसे परे है जो आप हुकुमने बताया । काल गणनाकी इतनी बारीकाईया किसीभी विज्ञान या संस्कृतिके...
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शिष्य गुरु का चयन नहीं करता अपितु गुरु शिष्य का चयन स्वयं करता हैं। शिष्य अपने अंदर स्वार्थ लेकर गुरु ढूंढेगा तो उसे केवल कालनेमि गुरु म...
