किसी भी व्यक्ति का शरीर का तापमान की जानकारी लेना हो बिना किसी भी थर्मामीटर या किसी भी अन्य यंत्र के तो नीचे लिखे तरीके से जानकारी ले सकते है ।
पुरुष की नाड़ी परीक्षण हमेशा दाहिनी हाथ से किया जाता है और महिला की बायी हाथ से।
अगर किस भी व्यक्ति का शरीर का
60-65 पल्स है तो शरीर का तापमान 98 डिग्री फ़रेनहाएट
70 पल्स है तो 99 डिग्री फ़रेनहाएट तापमान
80 पल्स है तो 100 डिग्री तापमान
90 पल्स = 101 डिग्री फ़रेनहाएट
100 पल्स = 102 डिग्री फ़रेनहाएट
110 पल्स = 103 डिग्री फ़रेनहाएट
120 पल्स = 104 डिग्री फ़रेनहाएट
130 पल्स = 105 डिग्री फ़रेनहाएट
140 पल्स = 106 डिग्री फ़रेनहाएट
यानि हर 10 स्पंदन बढ़ने पर 10 डिग्री तापमान शरीर का बढ़ेगा गर्भ में बच्चा का पल्स 140 से 150 होगा
सबसे अच्छा पल्स 70 से 74 के बीच होना चाहिए ।
आयु के अनुसार रक्तचाप (Blood Pressure) नापने का अद्भुत तरीका।
गर्भ में बच्चा का बी पी माँ के बी पी के बराबर होगा
जन्म से 5 साल तक बी पी का हाईयर लिमिट 81 और लोअर लिमिट 45
5 साल से 10 साल तक बी पी का हाईयर लिमिट 90 और लोअर 50
10 साल से 15 साल तक हाई 100 और लोअर 62
15 साल से 20 साल तक हाई बी पी 110 और लोअर बी पी 71
20 साल से 30 साल तक हाई बी पी 120 और लोअर बी पी 80
30 साल से 35 साल तक हाई बी पी 124 और लोअर बी पी 82
35 साल से 40 साल तक हाई बी पी 126 और लोअर बी पी 83
40 साल से 50 साल तक हाई बी पी 128 और लोअर बी पी 84
50 साल से 60 साल तक हाई बी पी 132 और लोअर बी पी 86
60 साल से 65 साल तक हाई बी पी 136 और लोअर बी पी 88
65 साल से 80 साल तक हाई बी पी 140 और लोअर बी पी 90
80 साल से ऊपर तक हाई बी पी 145 और लोअर बी पी 92
किसी किसी का बी पी में + 5 या – 5 का अंतर हो सकता है तो किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी । उस से ज्यादा अंतर आने पर व्यक्ति बीमार कहलाएगा
भारत भूमि का प्रकृति के साथ जीवन जीने की पद्धति एक सनातन पद्धति रही है प्रकृति ने जीव और वनस्पति दोनों के हम अपने जीवन में सदुपयोग करें उनके साथ कैसे सहजीवन जीयें यह एक बहुत चमत्कारिक विज्ञान रहा है जो अब विलुप्त सा हो रहा है यह पोस्ट बहुत पढ़े-लिखे मूर्खलोगों के लिए तो नहीं है पर कुछ लोग और हमारे आदिवासी बनवासी भाई अभी भी इन चमत्कारों का उपयोग अपने जीवन में करते हैं और अभी कुछ ग्रामीण भाई भी इसका उपयोग करते हैं यह पोस्ट उन्हीं लोगों के लिए है । इस नई आधुनिक शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों द्वारा डालने के बादऔर नए और आज के आधुनिक समाज के लोग बड़े-बड़े हॉस्पिटलों की शोभा बढ़ाते हैं जब तक उनका शोषण किया हुआ पूरा धन लूट नहीं जाता है तब तक वो किसी सामान्य और बिना पैसे की चिकित्सा का वह सहारा नहीं लेते इसी संदर्भ में आपको आज कुछ चमत्कारिक वनस्पतियों का और ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ हमारे पर क्या प्रभाव पड़ता है एक लेख आपको भेज रहा हूं कहीं कहीं आपको उलझन भी होगी पर आप अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल जरूर करेंगे कि 100 प्रतिशत कोई प्रामाणिक नहीं कहा जा सकता पर बहुत सारा रहस्य भी इसमें छिपा हुआ है आप अपनी क्षमता का उपयोग करें
१. श्वेत पुनर्नवा की जड़ को दूध के साथ घिसकर पिलाने से स्त्री को गर्भ ठहरता है।
२. श्वेत रांगणी मूल पुष्य नक्षत्र में लेकर एक वर्ण की गाय के दूध में पिए तो बंध्या भी पुत्रवती होती है।
३. श्रवण नक्षत्र में आँवली की जड़ नागर बेल के रस में पिए तो स्त्री नवयौवन होती है।
४. अनुराधा नक्षत्र में चमेली की जड़ को लाकर सर पर रखे तो शत्रु भी मित्र हो जाते हैं।
५. हस्त नक्षत्र में चम्पा की जड़ लाकर गले में पहनने से भूत-प्रेत नहीं .......
https://ajaykarmyogi1.blogspot.comमाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान 93369 19081 पर केवल व्हाट्सएप संपर्क करें
अनुराधा नक्षत्र में चमेलीमें चम्पा की जड़ लाकर गले में पहनने से भूत-प्रेत नहीं लगता।
६. पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में आम की जड़ को लाकर दूध में घिसकर पिलाने से बाँझ स्त्री को संतान की प्राप्ति होती है।
७. पुनर्वसु नक्षत्र में मेहँदी की जड़ लाकर पास में रखने पर शरीर से अच्छी सुगंध आती है।
८. अश्विनी नक्षत्र में अर्धरात्रि में नग्न होकर अपामार्ग की जड़ को लाए।
फिर उसे गले में ताबीज के अंदर धारण करने पर राज्य अधिकारी तथा उच्चाधिकारी अनुकूल होते है।
९. श्वेतसरपंखा की जड़ को नाभि पर लेप वीर्य का स्तम्भन होता है।
१०. मयूरशिखा की जड़ को तीन दिन दूध के साथ पीने से स्त्री पुत्रवती होती है।
११. मातुलिंग (बिजौरा) के बीज के दूध के साथ खीर बनाकर घी के साथ पीने पर स्त्री को निश्चय ही गर्भधारण होता है।
१२. लक्ष्मणा तीन भाग, उभयलिंगी चार भाग, बिहाली छः भाग सब मिलाकर गाय के दूध में पीसकर ऋतुकाल में स्त्री को पिलाने से पुत्र उत्पन्न होता है।
१३. ज्येष्ठ नक्षत्र में जामुन की जड़ लाकर पास रखने पर राज्य सम्मान मिलता है।
१४. स्वाति नक्षत्र में मोगरा की जड़ लेकर भैंस के दूध में घिसकर पीने से रंग में निखार आता है व गोरापन बढ़ता है।
१५. मघा नक्षत्र को पीपल की जड़ लेकर अपने पास रखने पर रात में दुःस्वप्न नहीं आते है।
१६. भरणी नक्षत्र में संखाहोली की जड़ लाकर चांदी अथवा सोने के ताबीज में लगवाकर पहनने से परस्त्री वशीभूत होती है...
*मघा नक्षत्र के फायदे...*
*जिस दिन मघा नक्षत्र में होने वाली बारिश के पानी को एकत्र करके जब भी आंख लाल हो या आपको किसी भी कारणवश आपके आंखों कों थकान हुई हो अथवा आंख संबंधित किसी भी रोग में इस पानी के बूंदो को आंखों में डालने से आंखों के रोग मिटते हैं।*
*जब एलोपैथी उपचार पद्धति का अस्तित्व नहीं था तब मघा नक्षत्र के इसी जल का प्रयोग आंखों के इलाज के लिए हुआ करता था।*
*सोशल मीडिया की सेवा करने वाले ततपर भाई बहन इसका फायदा ज़रूर लेवें कांच की शीशी में गंगाजल मिला कर रख लेवें ताकि इसका लम्बे समय तक उपयोग कर पाएं ।
आज ऋषिपंचमी पर्व हैं.....आज महिलाये व बालिकायें उपवास कर अपामार्ग की 108 ठंठल की गठरी बनाकर सिर पर रखती है और 108 लौटे या मग पानी सिर पर डालकर स्नान करती है ... कहीं कहीं इसकी दातुन भी की जाती है .....इसकी दातून करने से दांत काफी मजबूत होते है और कई वर्षों तक उनमें किसी प्रकार का कीड़ा नही लगता....वहीं इसके डंठल से स्नान करने पर मस्तिष्क में जमा हुआ कफ निकल जाता है साथ ही बालों में छिपे कीड़े भी निकल जाते है...।।
अपामार्ग को #चिरचिटा, #लटजीरा, #चिरचिरा, #चिचड़ा आदि नामों से जाना जाता हैं...।
इस समय सड़क हो या नदी-तालाब किनारे या बंजर भूमि हर कहीं आपको अपामार्ग का पौधा आसानी से दिख जावेगा....हमारे मालवांचल में तो हर गांव कस्बे में यह बड़ी मात्रा में पैदा होता हैं.... पर इसको अपामार्ग के नाम से कोई नही जानता,,हर कोई #आंधीझाड़ा कहता हैं,जो कहीं न कहीं इसका अपमान ही है क्योंकि आंधीझाड़ा का मतलब हमारे इधर बेकार की झाड़ी से लगाया जाता हैं....।
गुणों की खान "अपामार्ग"
अपामार्ग एक बहुओषधिय पौधा हैं, जिसका तना,जड़,पत्ते,बीज सभी का औषधीय मूल्य है....
अपामार्ग को अघाडा ,लटजीरा या चिरचिटा आदि नामों से जाना जाता हैं....।
आंधीझाड़ा के पत्ते ऋषिपंचमी ,गणेश पूजा , हरतालिका पूजा,मंगला गौरी पूजा
आदि समय काम आते है .शायद पूजा में इस्तेमाल ही इसलिए होता होगा ताकि हम
इनके आयुर्वेदिक रूप को पहचान सके और ज़रुरत के समय इनका सदुपयोग करना ना
भूले....।
इसके पत्तों को पीसकर लगाने से फोड़े फुंसी और गांठ तक
ठीक हो जाती है ...अपामार्ग की जड़ को कमर में धागे से बाँध देने से प्रसव
सुख पूर्वक हो जाता है, प्रसव के बाद तुरन्त इसे हटा देना चाहिए....।
ज़हरीले कीड़े काटने पर इसके पत्तों को पीसकर लगा देने से आराम मिलता है
...वहीं इसकी ५-१० ग्राम जड़ को पानी के साथ घोलकर लेने से पथरी निकल जाती
है ....इसके बीज चावल की तरह दीखते है ,जिन्हें #तंडुल
कहते है .....यदि स्वस्थ व्यक्ति इस तंडुल की खीर खा ले तो उसकी भूख-प्यास
आदि समाप्त हो जाती है ,पर इसकी खीर उनके लिए वरदान है जो भयंकर मोटापे के
बाद भी भूख को नियंत्रित नहीं कर पाते,कालांतर में ऋषि-मुनि इस प्रकार की
खीर का उपयोग कर लंबी साधना को पूर्ण करते रहे है......।
अपामार्ग से जुड़ी कोई जानकारी हो तो अवश्य साझा करें....।।
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ अभी मघा नक्षत्र चल रहा है
एक ही समाधान राष्ट्रीय स्वतंत्र गुरुकुल अभियान 9336919081 पर केवल व्हाट्सएप संपर्क करें


